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    कितनी फायदेमंद है कंपोजिशन स्कीम?

    Published: Sat, 17 Jun 2017 08:59 PM (IST) | Updated: Mon, 19 Jun 2017 03:00 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    मनोज पी गुप्ता

    हाल ही में जीएसटी काउंसिल ने कंपोजिशन स्कीम की लिमिट को 50 लाख रुपए वार्षिक टर्नओवर से बढ़ाकर 75 लाख रुपए कर दिया है। नईदुनिया को जीएसटी से जुड़े कई ई-मेल मिले हैं। इनमें बहुत से कारोबारियों ने ये सवाल पूछा है कि उन्हें जीएसटी में रेगुलर स्कीम में टैक्स भरना चाहिए या कंपोजिशन स्कीम अपनाना चाहिए। इसके बाद कई व्यापारियों के मन में इससे जुड़े सवाल उठ रहे हैं।

    कौन सी स्कीम अपनाई जाए इसका कोई स्पष्ट जवाब तो नहीं है बल्कि इसका निर्णय केस दर केस ही हो सकता है। इस बात को ऐसे समझा जा सकता है।

    अरविंद कुमार का कुल वार्षिक टर्नओवर 25 लाख रुपए है। उसकी कुल खरीदी 20 लाख है और जीएसटी की दर 5 फीसदी है। अब उन्हें निर्णय करना है कि वो कंपोजिशन स्कीन अपनाएं या नहीं। यह मानते हुए कि विक्रय मूल्य में टैक्स की रकम जोड़कर उसे बढ़ाया नहीं जा सकता है अगर वो कंपोजिशन स्कीम अपनाते हैं तो कर दायित्व और मुनाफे की स्थिति ऐसी होगी

    • कुल वार्षिक बिक्री 25 लाख
    • कुल वार्षिक खरीदी 20 लाख
    • खरीदी पर 5% जीएसटी 1 लाख
    • कुल खरीदी मूल्य 21 लाख

    • मुनाफा 4 लाख
    • कंपोजिशन टैक्स 1% 25 हजार
    • नेट मुनाफा 3.75 लाख

    जो व्यापारी कंपोजिशन स्कीम अपनाएंगे उन्हें जीएसटी वसूली का अधिकार नहीं रहेगा। इसलिए अरविंद कुमार 25 लाख की विक्रय रकम पर 5 फीसदी जीएसटी अलग से वसूल नहीं कर पाएंगे।

    अगर वो कंपोजिशन स्कीम नहीं अपनाते हैं तो उनकी स्थिति ऐसी होगी

    • कुल वार्षिक बिक्री- 25 लाख
    • कुल वार्षिक खरीदी- 20 लाख
    • कुल मुनाफा- 5 लाख
    • विक्रय पर 5% जीएसटी 1.25 लाख
    • खरीदी पर 5% जीएसटी 1 लाख
    • जीएसटी का दायित्व 25 हजार

    इस तरह अरविंद कुमार अगर कंपोजिशन स्कीम अपनाते हैं तो उनका मुनाफा 3.75 लाख होगा लेकिन अगर वो कंपोजिशन स्कीम नहीं अपनाते हैं तो उनका मुनाफा बढ़कर 5 लाख रुपए हो सकता है क्योंकि अगर वो कंपोजिशन स्कीम नहीं अपनाते हैं तो वो 5 फीसदी जीएसटी की वसूली अलग से कर सकते हैं।

    कैसे करें निर्णय

    कंपोजिशन स्कीम को अपनाया जाए या नहीं इसका निर्णय इन पहलुओं पर निर्भर है

    1. विक्रय की जा रही वस्तु किस मूल्य पर बेची जा सकती है क्या उसे एक तय राशि पर बेचना जरूरी है, क्या प्रतिस्पर्धा की वजह से कीमतें बढ़ाना संभाव नहीं है। यदि यह स्थिति बनती है तो कंपोजिशन स्कीम अपनाना ठीक नहीं होगा क्योंकि फिर व्यापारी को ही खरीदी मूल्य पर चुकाए गए कर का भार वहन करना होगा।
    2. माल किससे खरीदा जा रहा है रजिस्टर्ड डीलर से अथवा बिना रजिस्टर्ड डीलर से। अगर बिना रजिस्टर्ड डीलर से भी माल खरीदा जा रहा है तो ऐसी खरीदी पर रिवर्स चार्ज में टैक्स देना होगा। जो व्यापारी कंपोजिशन स्कीम अपनाएंगे वे रिवर्स चार्ज में चुकाए गए टैक्स की इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं ले पाएंगे।
    3. माल बेचने में उपयोग की जा रही सेवाएं कौन सी है क्या उन पर लग रहे जीएसटी की छूट मिल सकती है। जैसे यदि किसी शॉपिंग मॉल में दुकान हो और उसके किराए पर जीएसटी देना पड़े तो जो व्यापारी कंपोजिशन स्कीम अपनाएंगे उन्हें किराए पर चुकाए गए जीएसटी की छूट नहीं मिल पाएगी।
    4. कंपोजिशन स्कीम अपनाने वाले व्यापारी को विस्तृत हिसाब नहीं रखना होगा और साल भर में केवल 5 रिटर्न ही जमा करने होंगे। वहीं कंपोजिशन स्कीम नहीं अपनाने वाले व्यापारी को अपने व्यापार का विस्तृत हिसाब रखना होगा और साल भर में कुल 37 रिटर्न इसके लिए भरना होंगे। इसके लिए उन्हें नियमित एकाउंटेंट रखना होगा और अपने सीए से ज्यादा सेवाए लेनी होंगी। इसलिए कंपोजिशन स्कीम अपनाएं या नहीं इसका कॉस्ट बेनिफिट एनालिसिस भी करना होगा।
    5. यदि विक्रय की जा रही वस्तु को तय कीमत पर बेचना जरूरी नहीं हो और विक्रय मूल्य ग्राहक के अनुसान बढ़ाए-घटाए जा सकते हो तो कंपोजिशन स्कीम अपनाई जा सकती है। जैसे अगर कोई व्यापारी साड़ी का विक्रय किसी ग्राहक को करता है और वह साड़ी 1 हजार में भी बिक सकती है और 1200 रुपए में भी तो ऐसी स्थिति में कंपोजिशन स्कीम अपनाई जा सकती है।

    और जानें :  # composition scheme # GST
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