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    पैसे ज्यादा हों और वक्त भी तो पीएमएस आजमाएं

    Published: Sat, 18 Mar 2017 09:01 PM (IST) | Updated: Mon, 20 Mar 2017 02:01 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    ब्याज दरों में निरंतर गिरावट, प्रोपर्टी में निवेश से कम मुनाफा और सोना रखने की सीमा ऐसे कारण हैं, जिनके चलते मौजूदा दौर के निवेशक नए विकल्पों पर गौर करने लगे हैं। निवेश और मुनाफे का गणित समझने वाले होशियार निवेशक डेट (ऋण), इक्विटी म्यूचुअल फंड्स या सीधे शेयर बाजार में पैसा लगाने जैसे पारंपरिक तरीकों से इतर विकल्पों की तरफ देख रहे हैं।

    यदि आप ऐसा पोर्टफोलियो बनाना चाहते हैं, जिसमें काफी विविधता हो तो आपको निवेश के सभी वैकल्पिक साधनों पर गौर करना होगा। दुनियाभर में निवेश के ऐसे कुछ साधन हैं, जिनकी लोकप्रियता देर से ही सही, लेकिन भारत में भी बढ़ने लगी है। दिक्कत यह है कि इन पर दांव लगाने के लिए जोखिम उठाने की ज्यादा क्षमता और प्रोडक्ट की गहन समझ होनी चाहिए। इनमें ज्यादा पैसे लगाने की भी जरूरत होती है।

    पोर्टफोलियो आपका, अनुभव विशेषज्ञों का

    पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (पीएमएस) निवेश के वैकल्पिक साधनों में से एक है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें शानदार प्रोफेशनल मैनेजमेंट अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से पोर्टफोलियो तैयार करते हैं। पीएमएस के लिए कम से कम 25 लाख रुपए निवेश करने की जरूरत होती है। इसके जरिए सीधे-सीधे इक्विटी (शेयर) में, डेट में या फिर दोनों में पैसा लगाया जाता है, जो स्कीम की निवेश रणनीति पर निर्भर करता है।

    पीएमएस का सर्विस प्रोवाइडर आम तौर पर विभिन्न इंवेस्टमेंट स्कीम और जोखिम उठाने की क्षमता के हिसाब से कुछ मॉडल पोर्टफोलियो तैयार करता है। मसलन, इक्विटी मॉडल पोर्टफोलियो 20-25 शेयरों का हो सकता है। ये आक्रामक, संयत और कम जोखिम वाले हो सकते हैं। निवेशक जोखिम उठाने की अपनी क्षमता के हिसाब से इनमें से कोई एक चुन सकते हैं। यही नहीं, वे अपनी खास जरूरतों के आधार पर इनमें बदलाव भी कर सकते हैं।

    अच्छे रिटर्न

    पोर्टफोलियो मैनेजमेंट स्कीम चलाने वाली कंपनियों का दावा है कि वे ज्यादा रिटर्न दिलाते हैं। इस मामले में सटीक पोर्टफोलियो बनाने की उनकी क्षमता और निवेश बनाए रखने की लंबी अवधि मददगार साबित होती है। उदाहरण के लिए आस्क ग्रुप के आईईपी पीएमएस पोर्टफोलियो ने साल 2010 से लेकर फरवरी 2017 के बीच 20.9 फीसदी चक्रवृद्घि सालाना रिटर्न (सीएजीआर) मिला। कंपनी के इंडिया सेलेक्ट पोर्टफोलियो ने इसी अवधि में 19.7 फीसदी रिटर्न दिया। ये रिटर्न फीस और अन्य चार्जेज से मुक्त हैं। इसी तरह मोतिलाल ओसवाल का नेक्स्ट ट्रिलियन डॉलर अपॉर्चुनिटी पीएमएस स्कीम ने 5 साल में 32.6 फीसदी रिटर्न दिया। यूनिफाई कैपिटल के डीप वैल्यू फंड ने भी दिसंबर, 2012 से अब तक 42.47 फीसदी का जोरदार रिटर्न दिया है।

    जोखिम प्रबंधन

    पीएमएस स्कीम्स रिस्क मैनेज करने का भी प्रयास करती हैं। किसी भी म्यूचुअल फंड की तरफ इनकी निवेश प्रक्रिया में एक समिति की अहम भूमिका होती है, जो जोखिम और रिटर्न की संभावनाओं के बीच संतुलन बिठाने का काम करती है। इसके अलावा इन पर बाजार नियामक सेबी की नजर भी रहती है। यानी ये नियमों का उल्लंघन करके निवेशकों को धोखा नहीं दे सकतीं।

    फीस और चार्जेज

    पीएमएस प्रोवाइडरों की फीस सभी ग्राहकों के लिए एक जैसी नहीं होती। लेकिन ग्राहक फिक्स्ड फी स्ट्रक्चर (जैसे 2-2.5 फीसदी) अपना सकता है। लेकिन एक सीमा से अधिक रिटर्न (हर्डल रेट) के लिए आपको अतिरिक्त रिटर्न का 20 फीसदी तक हिस्सा पीएमएस प्रोवाइडर को देना पड़ सकता है। हर्डल रेट स्कीम की रिस्क-रिटर्न प्रोफाइल पर निर्भर करता है। गैर-फिक्स्ड फी वाले ढांचे में बहुत कम शुल्क (जैसे 1 फीसदी) का फायदा भी मिल सकता है, लेकिन ऐसे मामले में प्रदर्शन शुल्क अलग से देना होता है। इन सबके अलावा लेनदेन या ब्रोकरेज शुल्क भी चुकना होता है, जो बहुत कम तकरीबन 0.20 फीसदी होता है।

    रणनीति

    ज्यादातर इक्विटी फंडों की रणनीति केवल लंबी अवधि के लिए होती है। ये शेयर की बुनियादी बातों (फंडामेंटल्स) के आधार पर तैयार की जाती हैं। लेकिन, पीएमएस में ऐसी कोई बात नहीं होती है। इसमें निवेश की रणनीति निवेशक की जरूरतों के हिसाब से बनाई जाती है। मसलन, आस्क की पीएमएस रणनीति का फोकस पर्याप्त फ्री कैश फ्लोकके साथ हाई क्वालिटी बिजनेस पर होता है। यही वजह है कि इस फंड ने मदरसन सुमी, ल्यूपिन और इंडसइंड बैंक जैसे शेयरों पर दांव लगाया है। इसी तरह यूनिफाइ कैपिटल का डीप वैल्यू एट डिस्काउंट फंड कंपनी के वैल्यूएशन के हिसाब से शेयर में पैसा लगाता है। उदाहरण के लिए इस फंड ने केमिकल कंपनियों के शेयरों में निवेश किया है क्योंकि उनके प्रोमोटर लगातार कंपनी में हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं।

    ऐसे करें पीएमएस का चयन

    • प्रोवाइडर और मैनेजर के ट्रैक रिकॉर्ड पर बारीकी से गौर करें
    • देखें की उनकी रणनीति म्यूचुअल फंड स्कीम से कितनी अलग है
    • शेयरों के चयन की प्रक्रिया और आधार के बारे में जानकारी मांगे
    • फीस, चार्जेज और टैक्स के बाद शुद्घ रिटर्न का हिसाब लगाएं
    • संभव हो तो फी स्ट्रक्चर को लेकर मोल-भाव की गुंजाइश खंगालें
    • कुछ प्रोवाइडर शेयर चुनाव, ट्रेड की आजादी देते हैं, इन पर गौर करें

    ध्यान रखें

    यदि आप तीन साल से कम समय के लिए निवेश करना चाहते हैं तो हो सकता है कि पीएमएस आपके लिए अच्छा साधन न हो। आदर्श स्थिति में ये तभी अच्छा रिटर्न देते हैं, जब कम से कम 5 साल के लिए पैसा लगाया जाए। आस्क जैसे कुछ पीएमएस प्रोवाइडर तो 3-3.5 साल से पहले पैसे निकालने पर एग्जि लोड भी चार्ज करते हैं। ऐसे में निवेशक को नुकसान हो सकता है। जाहिर है, पीएमएस में पैसा लगाते समय यह जानना जरूरी है कि निवेश की न्यूनतम अवधि क्या होगी और एग्जिट लोड जैसा कोई प्रावधान भी है या नहीं।

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