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    दुबई से सस्ता पड़ेगा अमेरिका से आयात हुआ कच्चा तेल, रिपोर्ट का दावा

    Published: Tue, 03 Oct 2017 01:10 PM (IST) | Updated: Wed, 04 Oct 2017 04:39 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    नई दिल्ली। 1975 में अमेरिका द्वारा लगे प्रतिबंध के बाद पहली बार अमेरिका से कच्चे तेल की खेप सोमवार को भारत पहुंचीं।

    ओडिसा के पारादीप पोर्ट पर जब अमेरिका से कच्चा लेकर ये जहाज पहुंचा तो हैदराबाद में अमेरिका के काउंसलेट जनरल कैथरीन हड्डा के अलावा पेट्रोलियम मंत्रालय में ज्वाइंट सेक्रेटरी और भारत के विदेश मंत्रालय में ज्वाइंट सेक्रेटरी मौजूद रहे।

    एक रिपोर्ट की मानें तो अमेरिका से आयात हो रहा ये कच्चा तेल दुबई से आयात होने वाले तेल से सस्ता पड़ेगा। अगर आंकड़ों पर गौर करें तो अमेरिका से आयात होने वाला कच्चा तेल दुबई से आने वाले तेल की तुलना में दो डॉलर प्रति बैरल सस्ता पड़ेगा। ऐसे में देश की उर्जा जरूरतों को पूरा करने में पानी की तरह बह रहा पैसा बचाने में मदद मिलेगी।

    अमेरिका से कच्चे तेल की पहली खेप पहुंचीं-

    अमेरिका से हुए कॉन्ट्रैक्ट के तहत इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड यानि बीपीसीएल जैसी तेल कंपनियां अमेरिका से दो मिलियन बैरल कच्चा तेल आयात करेगी। इससे आने वाले सालों में दोनों देशों के बीच तेल व्यापार दो बिलियन अमेरिकी डॉलर तक बढ़ जाएगा।

    भारत में अमेरिकी दूतावास भी इस घटना को दोनों देशों के रिश्ते के लिए मील का पत्थर मान रहा है। दिल्ली की अमेरिकी दूतावास की चार्ज डि अफेयर मैरी कार्लसन ने भी बताया कि इस पहल से उर्जा, नवीकरणीय उर्जा, परमाणु उर्जा और नई टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ेगी।

    वहीं उन्होंने कहा कि अमेरिका की ये कोशिश होगी कि आने वाले दिनों में प्राकृतिक गैस के मामले में भी दोनों देशों की साझेदारी और बढ़े।

    आईओसी ने 3.9 मिलियन बैरेल का ऑर्डर बुक किया-

    अमेरिका से आयात हुए कच्चे तेल को इंडियन ऑयल पारादीप, हल्दिया, बरौनी की अपनी रिफाइनरी में साफ करेगा। इंडियन ऑयल देश की पहली तेल कंपनी है, जिसने अमेरिका से तेल आयात किया है। वहीं इस कंपनी ने अपने कोच्चि और वाइजैग रिफाइनरी के लिए 3.9 मिलियन बैरेल का ऑर्डर भी बुक किया है।

    भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की तेल रिफाइनरी कंपनियां अभी 7.85 मिलियन बैरल कच्चा तेल मंगा रही है। वहीं भारत की निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने अमेरिका में पांच बिलियन डॉलर का निवेश भी किया है।

    दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्ता मजबूत बनाने के लिए इस साल जून में ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी के बीच वार्ता हुई थी। इसके बाद ही अमेरिका से कच्चा तेल आयात करने का रास्ता साफ हुआ था।

    अब जबकि कच्चे तेल की पहली खेप अमेरिका से भारत पहुंची है, ऐसे में आगे आने वाले वक्त में दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्ता और मजबूत हो सकता है।

    प्राकृतिक गैस मिलने का रास्ता खुलेगा

    अपनी उर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत अब प्राकृतिक गैस के इस्तेमाल पर जोर दे रहा है। ऐसे में इस करार क बाद अमेरिका से प्राकृतिक गैस, पीएनजी मिलने में भी थोड़ी आसानी होगी। इसे देखते हुए देश में पाइप्ड नेचुरल गैस और खाना बनाने में इस्तेमाल होने वाले एलपीजी के इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर काम हो रहा है।

    भारत के विदेश मंत्रालय ने भी एक बयान जारी कर कहा कि अमेरिका से कच्चा तेल आयात करना दोनों देशों के रिश्ते में ऐतिहासिक पल है। क्योंकि अमेरिका से कच्चे तेल का आयात शुरू होने से भारत की दूसरे मुल्कों पर निर्भरता कम होगी। खासतौर पर ऐसे हालात में जब अरब देशों,अफ्रीकी देशों में राजनैतिक संकट गहराते हैं।

    नई व्यवस्था के तहत अमेरिका से कच्चा तेल आयात होने की सूरत में इसकी कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी वहीं देश की उर्जा जरूरतों की भी पूर्ति होगी।

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