Naidunia
    Thursday, December 8, 2016
    PreviousNext

    तीन शिफ्ट के उद्योग को नोटबंदी ने एक शिफ्ट में सिमटाया

    Published: Fri, 02 Dec 2016 04:00 AM (IST) | Updated: Fri, 02 Dec 2016 11:12 AM (IST)
    By: Editorial Team
    note ban three shift work 2016122 111227 02 12 2016

    रायपुर, व्याप्र। पिछले महीने की 8 तारीख से शुरू नोटबंदी ने उद्योगों को पूरी तरह से झकझोर दिया है। हर कोई अपनी-अपनी तरह से मैनेज करने की कोशिश में लगा हुआ है। कभी रोजाना करोड़ों की डील करने वाले उद्योगपति अब कुछ हजार रुपए की ही डील करने लगे हैं। 22 दिनों की नोटबंदी में ही उद्योगों की हालत ऐसी हो गई है कि कारोबार 60 फीसदी तक गिर गया है तथा उत्पादन भी आधा हो गया है।

    उद्योगपतियों का कहना है कि 500 और 1000 के नोट बंद होने के साथ ही लोहा बाजार में सुस्ती छाई हुई है। सरकारी के साथ निजी निर्माण कार्य भी रुके पड़े हुए हैं। इसके कारण बाहरी के साथ ही लोकल डिमांड भी घट गई है। उद्योगों का उत्पादन आधा हो गया है। रोजाना होने वाला करीब 60 लाख का लेन-देन भी घटकर 15 से 20 लाख तक गिर गया है। उद्योगपति अभी मार्केट की स्थिति देखते हुए बाहर से माल मंगाना भी कम कर दिए हैं। उद्योगों में नई भर्ती पूरी तरह से बंद कर जितने संसाधन व मेनपावर हैं, उनमें ही काम चलाया जा रहा है।

    इन 22 दिनों में उद्योगों में एक और बदलाव आया है कि जिन प्लांटों में तीन शिफ्टों में दामा हुआ करता था, वहां केवल एक शिफ्ट में काम हो रहा है। जिनके पास तीन से चार प्लांट हैं, वे उद्योगपति अपना पूरा फोकस एक ही प्लांट पर कर रहे हैं। उद्योगपतियों का कहना है कि लोहा बाजार की स्थिति त्योहार के पहले ही काफी सुस्त चल रही थी। ऊपर से नोटबंदी ने आकर लोहा बाजार की कमर ही तोड़ दी है। उत्पादन घटाने और स्थिति के अनुसार मैनेज करने के अलावा उनके पास कोई उपाय नहीं है। बिजली की दरों को लेकर आए दिन ही उद्योगपति अधिकारियों से मुलाकात करते रहते हैं।

    दर्जनभर प्लांटों ने दिया बिजली काटने का आवेदन

    नोटबंदी के साथ ही बाजार की सुस्ती के चलते उद्योगों ने उत्पादन घटाने के साथ ही बिजली काटने के भी आवेदन दे दिए हैं। बताया जा रहा है कि अभी तक करीब 12 प्लांट संचालकों ने विद्युत मंडल को बिजली कटवाने के लिए आवेदन दे दिया है तथा जनवरी से उनकी बिजली काटी जाएगी। नोटबंदी के 22 दिनों में बाजार की सुस्ती को लेकर उद्योगपतियों की दो बार बैठक भी हो चुकी है।

    उद्योगों की हालत काफी खराब

    नोटबंदी के साथ ही बाजार की सुस्ती के चलते उद्योगों की हालत काफी खराब हो गई है। सरकार ने इनकी ओर जल्द ध्यान नहीं दिया तो उद्योगों को बचाना मुश्किल होगा। इन दिनों हर उद्योगपति अपने-अपने तरीके से मार्केट की स्थिति मैनेज करने की कोशिश कर रहा है। विशेषकर बिजली की दरें तो 4 रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए। -मनीष धुप्पड़, महामंत्री, छत्तीसगढ़ मिनी स्टील प्लांट

    प्रतिक्रिया दें
    English Hindi Characters remaining


    या निम्न जानकारी पूर्ण करें
    नाम*
    ईमेल*
    Word Verification:*
    Please answer this simple math question.
    +=

      अटपटी-चटपटी