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    बिना चर्चा ध्वस्त हो गया जिला पंचायत का अविश्वास प्रस्ताव

    Published: Fri, 21 Apr 2017 04:09 AM (IST) | Updated: Fri, 21 Apr 2017 04:09 AM (IST)
    By: Editorial Team

    अंबिकापुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

    जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान की स्थिति ही नहीं बनी। भाजपा से बगावत कर कांग्रेस के साथ मिल अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले भाजपा समर्थित चार जिला पंचायत सदस्यों की अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पर विश्वास जता दिए जाने के बाद संपूर्ण प्रक्रिया महज नौटंकी ही साबित हुई।

    अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के साथ भाजपा समर्थित 10 जिला पंचायत सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया में शामिल होना उचित ही नहीं समझा। अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया में कांग्रेस समर्थित छह जिला पंचायत सदस्य उपस्थित तो हुए लेकिन उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा ही नहीं किया और बहिष्कार कर वापस लौट आए। उपाध्यक्ष की प्रक्रिया के दौरान दोनों दलों से जुड़े जिला पंचायत सदस्यों के गैर मौजूदगी से मतदान की स्थिति नहीं बनी। पीठासीन अधिकारी ने अविश्वास प्रस्ताव पारित नहीं होने की जानकारी संचालक पंचायत को भेज दी है।

    भाजपा से बगावत कर चार जिला पंचायत सदस्यों ने कांग्रेस समर्थित जिला पंचायत सदस्यों के साथ मिलकर भाजपा समर्थित जिला पंचायत अध्यक्ष फूलेश्वरी सिंह व उपाध्यक्ष प्रभात खलखो के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया था। संचालक सह आयुक्त पंचायत द्वारा गुरूवार 20 अप्रैल को अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा व वोटिंग के लिए निर्धारित किया गया था। पीठासीन अधिकारी अपर कलेक्टर एसएन राम, जिला पंचायत के एडिशनल सीईओ महावीर राम की उपस्थिति में प्रातः साढ़े 10 बजे से अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव व चर्चा की कार्रवाई का समय निर्धारित किया गया था। कांग्रेस समर्थित जिला पंचायत सदस्य राकेश गुप्ता, मुन्ना टोप्पो, सरला सिंह, भोजवंती सिंह, मीना रवि व शकुंती बाई निर्धारित समय पर कलेक्टोरेट सभाकक्ष में पहुंच गए थे। इनके साथ मिलकर अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले भाजपा समर्थित जिला पंचायत सदस्य शांति एक्का, सुनीता राजवाड़े, जसिंता बड़ा व विमला पैकरा दोपहर लगभग 12 बजे तक उपस्थित ही नहीं हुए। कांग्रेस समर्थित जिला पंचायत सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा किए बगैर इसका बहिष्कार कर वापस लौट आए। भाजपा समर्थित जिला पंचायत सदस्यों ने प्रक्रिया में हिस्सा लेना जरूरी नहीं समझा। बिना मतदान के ही अविश्वास प्रस्ताव ध्वस्त हो गया और अध्यक्ष फूलेश्वरी सिंह की कुर्सी बच गई।

    वहीं दोपहर ढाई बजे से जिला पंचायत उपाध्यक्ष के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होनी थी। लेकिन इस बार भाजपा के अलावा कांग्रेस समर्थित जिला पंचायत सदस्य भी उपस्थित नहीं हुए। इस प्रकार बिना मतदान के ही अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव खारिज हो गया। अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान को लेकर गुरुवार सुबह से ही कलेक्ट्रेट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती कलेक्टोरेट सभाकक्ष के बाहर व परिसर में की गई थी। एडिशनल एसपी रामकृष्ण साहू, सीएसपी आरएन यादव, एसडीएम पुष्पेंद्र शर्मा, नगर निरीक्षक नरेश चौहान के साथ अन्य अधिकारी व्यवस्था पर नजरे जमाए हुए थे।

    भाजपा समर्थित जिला पंचायत अध्यक्ष फूलेश्वरी सिंह व उपाध्यक्ष प्रभात खलखो के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के ध्वस्त हो जाने की संभावना पिछले दिनों ही प्रबल हो गई थी,जब कांग्रेस के साथ मिलकर अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले भाजपा समर्थित चार जिला पंचायत सदस्यों के साथ भाजपा प्रदेशाध्यक्ष, प्रदेश संगठन मंत्री की तस्वीर जारी कर एकजुटता की दलील दी गई थी। गुरूवार को अविश्वास प्रस्ताव के दौरान जारी प्रक्रिया में भाजपा समर्थित किसी भी सदस्य ने अपनी उपस्थिति ही दर्ज नहीं कराई।

    14 सदस्यों वाले जिला पंचायत सरगुजा में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष को मिलाकर भाजपा के पास आठ सदस्य हैं। कांग्रेस समर्थित छह सदस्यों के भरोसे अविश्वास प्रस्ताव किसी भी कीमत पर पारित ही नहीं हो सकता था। अविश्वास प्रस्ताव पारित करने के लिए कुल सदस्यों का तीन चौथाई यानि 11 सदस्यों का समर्थन जरूरी है। भाजपा के सभी आठ सदस्य यदि प्रक्रिया में भाग ही नहीं लेंगे तो भी कांगे्रस समर्थित छह सदस्यों के बूते अध्यक्ष उपाध्यक्ष की कुर्सी पर कोई खतरा नहीं था। सारा गणित फिट होने के कारण भाजपा समर्थित जिला पंचायत सदस्य पूरे दिन भाजपा कार्यालय में ही जमे रहे।

    कांग्रेस समर्थित सदस्य निकल आए बाहर-

    कांग्रेस समर्थित छह जिला पंचायत सदस्य, अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए निर्धारित समय पर अपनी उपस्थिति दी, लेकिन वे भी दोपहर लगभग 12 बजे प्रस्ताव पर चर्चा किए बगैर प्रक्रिया का बहिष्कार कर वापस लौट आए। दोपहर ढाई बजे से उपाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होनी थी। इस बार भाजपा के अलावा कांग्रेस समर्थित जिला पंचायत सदस्य भी उपस्थित नहीं हुए।

    भाजपाइयों ने मनाई खुशी-

    भाजपा समर्थित चार जिला पंचायत सदस्यों द्वारा बगावत कर अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव ने सरगुजा की सियासत में गर्माहट ला दी थी। अंतिम समय में भाजपा संगठन ने सभी जिला पंचायत सदस्यों को एक सूत्र में बांधकर रखने में सफलता प्राप्त कर ली। जब कलेक्टोरेट सभाकक्ष में अध्यक्ष,उपाध्यक्ष पर अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा को लेकर पीठासीन अधिकारी, सदस्यों के आने का इंतजार कर रहे थे, उसी दौरान भाजपा समर्थित अध्यक्ष फूलेश्वरी सिंह, उपाध्यक्ष प्रभात खलखो, जिला पंचायत सदस्य सुनीता राजवाड़े, मालती राजवाड़े, शांति एक्का, जसींता बड़ा, विमला पैकरा, देवनाथ उंजन भाजपा कार्यालय में मौजूद थे। सांसद कमलभान सिंह, प्रदेश मंत्री अनुराग सिंहदेव, भाजपा जिलाध्यक्ष अखिलेश सोनी, भाजपा नेता अंबिकेश केशरी सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ बंद कमरे में उनकी बैठक चल रही थी। जब अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए निर्धारित समय समाप्त हो गया, तो सभी ने एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए कलेक्ट्रेट तक रैली निकाली। अध्यक्ष व उपाध्यक्ष की कुर्सी बचा लेने की खुशियां भी भाजपाईयों ने मनाई।

    जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित नहीं हुआ। अविश्वास प्रस्ताव की चर्चा में यदि एक भी सदस्य भाग लेता तो हमें पूरी प्रक्रिया पूर्ण करनी पड़ती। अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा ही नहीं हुई। अविश्वास प्रस्ताव पारित न होने की जानकारी आयुक्त सह संचालक पंचायत को भेजी जा रही है।

    एसएन राम

    अपर कलेक्टर व पीठासीन अधिकारी

    हमारे कुछ सदस्य गुमराह होकर चले गए थे। समय पर वे परिवार में वापस लौट आए। सभी के सहयोग व समर्थन से अविश्वास प्रस्ताव ध्वस्त हो गया।

    फूलेश्वरी सिंह

    अध्यक्ष, जिला पंचायत

    अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले चार सदस्यों के उपस्थित नहीं होने से हम लोग प्रक्रिया का बहिष्कार कर वापस आ गए। हम लोग तो मतदाता के रूप में शामिल होने आए थे। अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले ही जब उपस्थित नहीं हुए तो इस पर चर्चा करना भी उचित नहीं समझा गया।

    राकेश गुप्ता

    कांग्रेस समर्थित जिपं सदस्य

    फूट डालो और शासन करो कांग्रेस की पुरानी नीति है। इसी नीति के तहत हमारे कुछ सदस्यों को तोड़ने का प्रयास किया गया था, लेकिन हमारी एकजुटता से अविश्वास प्रस्ताव ध्वस्त हो गया, जिससे कांग्रेसियों की पद पाने की मंशा फेल हो गई।

    कमलभान सिंह

    सांसद, सरगुजा

    पहले नाराजगी थी, कोई हमारी नहीं सुनता था। लेकिन पार्टी व संगठन की बात आई तो हम वापस आ गए। पार्टी संगठन की छवि व गरिमा बनाए रखना हमारा कर्तव्य है।

    शांति एक्का

    भाजपा समर्थित जिपं सदस्य

    कांग्रेस के पास अविश्वास के लिए पर्याप्त संख्याबल नहीं था। कांग्रेस खरीद-फरोख्त के माध्यम से उभरते आदिवासी नेतृत्व को दबाने की कोशिश में थी। कांग्रेस के पास सभी पद हैं। भाजपा के पास सिर्फ जिपं है। इस प्रकार से बीजेपी को तोड़ने की कोशिश कांग्रेस द्वारा की जा रही है,उसका भविष्य में भी पुरजोर जवाब देंगे। 2018 में अच्छा परिणाम आएगा। थोक में निर्वाचित कांग्रेस के जनप्रतिनिधियों से जनता उब चुकी है।

    अनुराग सिंहदेव

    प्रदेशमंत्री,भाजपा

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