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    मानव-हाथी द्वंद नियंत्रण के लिए कर्नाटक में प्रशिक्षित हो रहे वनकर्मी

    Published: Wed, 13 Sep 2017 11:46 PM (IST) | Updated: Wed, 13 Sep 2017 11:46 PM (IST)
    By: Editorial Team

    0 हाथी बाहुल्यता वाले राज्यों के सारे उपाय छग में भी

    0 आक्रोशित होने पर ही इंसानों पर हमला करते हैं हाथी

    अंबिकापुर । नईदुनिया प्रतिनिधि

    मानव-हाथी द्वंद को नियंत्रण करने कर्नाटक में प्रशिक्षण ले रहे सरगुजा के वनकर्मियों ने तुलनात्मक रूप से पाया है कि सरगुजा वनवृत्त में हाथियों के झुंड को देखकर ग्रामीण पटाखे, राकेट, गुलेल चलाते हैं और पत्थरबाजी, तीर-धनुष व ट्रैक्टर के साइलेंसर निकालकर तेज आवाज तथा उत्सुकतावश भीड़ लगाकर जंगली हाथियों को आक्रोशित करते हैं, जिससे जनहानि की घटनाएं होती हैं। छत्तीसगढ़ राज्य में भी देश के हाथी बाहुल्य राज्यों में मानव-हाथी द्वंद को नियंत्रित करने के लिए अपनाए जाने वाले प्रयोगों को छत्तीसगढ़ में भी लागू किया जा रहा है।

    एलिफेंट रिजर्व सरगुजा के फिल्ड डायरेक्टर केके बिसेन व उपनिदेशक सीएस तिवारी ने बताया कि छग राज्य में मानव-हाथी द्वंद को नियंत्रित करने देश के हाथी बाहुल्य राज्यों में उपयोग किए जा रहे सभी प्रयासों को छग के हाथी प्रभावित क्षेत्रों में उपयोग किया जा रहा है। स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप नवाचार गतिविधियां भी संचालित की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि हाथी-मानव द्वंद की चुनौतीपूर्ण समस्या ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, उत्तराखंड में भी है। इन राज्यों ने इस चुनौतीपूर्ण समस्या के निराकरण के लिए किए जा रहे प्रयास छग में भी लागू हैं। उन्होंने बताया कि हाथियों से जानमाल की सुरक्षा के लिए जनजागरूकता अभियान, हाथी रहवास क्षेत्रों में चारा-पानी की उपलब्धता, हाथियों द्वारा पहुंचाए जानी वाली क्षति का त्वरित आंकलन कर भुगतान किया जा रहा है। कर्नाटक राज्य से छह कुनकी हाथी लाए जा रहे हैं, इन हाथियों की मदद से सरगुजा के साथ ही छग के उत्पाती हाथियों को काबू में करने का प्रयास होगा। हाथी प्रभावित क्षेत्रों में पक्के आवासीय मकानों का निर्माण कराया जा रहा है, साथ ही प्रभावितों के लिए राहत शिविर व हाथियों के स्वच्छंद आगमन हेतु सुरक्षित मार्ग का निर्धारण भी किया गया है। हाथी बचाव एवं पुनर्वास केंद्र की स्थापना का काम शुरू करा दिया गया है। मानव-हाथी द्वंद के प्रबंधन हेतु पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा व पश्चिम बंगाल के मध्य एमओयू हस्ताक्षरित करने पहल की गई है। प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष स्ट्राइक फोर्स का गठन व प्रत्येक दल हेतु आवश्यक संसाधनों से युक्त वाहन उपलब्ध कराया गया है ताकि हाथियों से बचाव की पहल की जा सके।

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