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    स्वामी विवेकानंद के आदर्शों से ही विश्व गुरू बनेगा भारत

    Published: Wed, 13 Sep 2017 11:28 PM (IST) | Updated: Wed, 13 Sep 2017 11:28 PM (IST)
    By: Editorial Team
    13sepp4 13 09 2017

    0 सभी धर्मों के प्रतिनिधियों ने कहा एकता ही ताकत

    अंबिकापुर । नईदुनिया प्रतिनिधि

    श्री रामकृष्ण विवेकानंद सेवाश्रम में अंतरराष्ट्रीय भ्रातृत्व दिवस का आयोजन सरगुजा विवि के कुलपति प्रो.रोहिणी प्रसाद की उपस्थिति में किया गया। मौके पर विभिन्न समाज से जुड़े लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए।

    सरगुजा विवि के कुलपति प्रो.रोहिणी प्रसाद ने कहा कि वे हमेशा स्वामी विवेकानंद के बताए रास्ते पर चलने का प्रयास करते हैं। उन्हीं के आदर्शों के कारण आज वे अपने आपको युवा समझते हैं। युवा किसी भी देश की मुख्य धमनी है। वह दिन दूर नहीं, जब हम स्वामी विवेकानंद के बताए हुए रास्ते पर चल विश्व गुरू बन जाएंगे। दुनिया में सबसे पहले भाईचारे की बात स्वामी विवेकानंद ने की थी। संसार में वेद युग, रामायण युग, महाभारत युग के बाद स्वामी विवेकानंद का युग आया जो हमें आपसी प्रेम, भाईचारा के साथ भारत को विश्व गुरू की राह पर अग्रसर कर रहा है। सिक्ख समाज के प्रतिनिधि देवेंद्र सिंह ने कहा कि हमें एकता की शुरुआत अपने घर से करनी पड़ेगी। कोई धर्म बुरा नहीं होता, केवल इंसान बुरा होता है। हमें सभी धर्मों का सम्मान करना चाहिए। जैन धर्म के प्रतिनिधि डा.अभिजीत जैन ने कहा कि जिस दिन संसार में भाईचारे की भावना कायम होगी, उसी दिन से संसार में शांति कायम होगी। हमें किसी से अधिक अपेक्षा नहीं रखना चाहिए। जैन धर्म में क्षमा, याचना का महत्व होता है। यदि हममें मन, वचन, काया से किसी के प्रति बुरा भाव आया तो हमें क्षमा, याचना करना चाहिए, क्योंकि क्षमा ही वीरों का आभूषण होता है। ईसाई धर्म के प्रतिनिधि सेंट जेवियर्स बीएड कालेज के प्राचार्य जेरोम मिंज ने कहा कि मनसा, वाचा, कर्मणा हम एक साथ लेकर चले तो लोगों का स्वतः ही कल्याण होगा। यदि हम सच में ज्ञानी हैं तो वह ज्ञान हमारे कर्र्मों से भी दिखना चाहिए। हमें आपस में संगठित होकर भाईचारे को बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। इस्लाम धर्म के प्रतिनिधि मौलाना नूर आलम ने कहा कि अगर हम आपस में मिलकर हैं तो हम जीवित हैं और यदि आपस में घृणा करते हैं तो जीवित रहते हुए भी मुर्दे के समान हैं। हमें अपने अंदर बर्दाश्त करने की क्षमता को बढ़ाना चाहिए। हमें अपने-आप में बुराई देखना चाहिए और उसे सुधारना चाहिए। अच्छाई की शुरुआत अपने घर से करनी होगी।

    होना चाहिए एकता का भाव

    श्री रामकृष्ण विवेकानंद सेवाश्रम के स्वामी तन्मयानंद ने कहा कि जीवन में शांति चाहिए तो अपने अंदर की बुराई को देखना चाहिए। सबके अंदर भाईचारा, एकता का भाव होना चाहिए। विद्वान व्यक्ति को सब एक जैसा ही दिखाई देता है। सभी धार्मिक मार्ग ईश्वरी प्राप्ति के मार्ग हैं। कार्यक्रम का संचालन कांत दुबे ने किया। मौके पर समाज के विभिन्न वर्गों के लोग बड़ी तादाद में उपस्थित रहे।

    और जानें :  # India will become world guru
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