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    इस लजीज व्यंजन के बीज हो रहे लुप्त, जल्द बनेगा बीज बैंक

    Published: Thu, 12 Oct 2017 11:43 PM (IST) | Updated: Fri, 13 Oct 2017 02:55 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    अंबिकापुर । सरगुजा जिले की प्रचुर जैव विविधता एवं विभिन्न फसलों की बहुमूल्य स्थानीय किस्मों की बहुलता को दृष्टिगत रखते हुए अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता विभाग के समन्वयक डॉ जेसी राणा, राष्ट्रीय पादप आनुवांशिक संसाधन ब्यूरो नई दिल्ली के प्रमुख वैज्ञानिक डा.एसपी अहलावत, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ दीपक शर्मा एवं कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख डॉ. रविन्द्र तिग्गा ने बतौली विकासखंड के नकना, बोदा एवं सलयाडीह ग्रामों का भ्रमण कर कृषक चर्चा के माध्यम से कृषकों द्वारा लंबे समय से उगाई जा रही देसी किस्मों की जानकारी ली।

    चर्चा से यह बात सामने आई कि कई किस्में क्षेत्र से विलुप्त हो जा रही हैं। इसे ध्यान में रखते हुए डॉ जेसी राणा ने विलुप्त हो रही किस्मों के संरक्षण हेतु क्षेत्र में परियोजना संचालित करने पर जोर दिया,जिससे कि बहुमूल्य देसी किस्मों का संरक्षण कर तथा परीक्षण के माध्यम से इन किस्मों में समाहित विभिन्न गुणों की जानकारी प्राप्त कर ऐसे किस्मों के उत्पादों को एक व्यावसायिक रूप प्रदाय किया जा सके जो कि आने वाले समय में कृषकों के जीवकोपार्जन के साथ ही उन्हे स्वावलंबी बनाने में मददगार होगा।

    डॉ एसपी अहलावत ने देसी किस्मों को अपनी संस्था के माध्यम से संग्रहित करने कहा, ताकि भविष्य में इन किस्मों की गुणवत्ता का लाभ देश के अन्य किसानों को भी मिल सके तथा संग्रहित करने वाले कृषकों को उनका लाभ प्राप्त हो।

    वैज्ञानिकों ने इन क्षेत्रों में देसी किस्मों के संग्रहण हेतु बीज बैंक निर्माण करने कहा। डा. दीपक शर्मा द्वारा कृषकों द्वारा उगाई जा रही देसी किस्मों को अपने नाम से पंजीयन करवाने हेतु प्रोत्साहित किया गया तथा इस क्षेत्र में किए गए कार्यों हेतु कुछ चयनित कृषकों को सम्मानित करने की जानकारी दी।

    डॉ रविन्द्र तिग्गा द्वारा केंद्र के विभिन्न गतिविधियों की जानकारी देते हुए आने वाले समय में इस क्षेत्र में फसलों से अधिक उत्पादन हेतु तकनीकों को विभिन्न माध्यमों से संचालित करने कहा तथा स्थाई रूप से आय प्राप्त करने हेतु समन्वित कृषि पद्धति अपनाने का सुझाव दिया। इस भ्रमण कार्यक्रम में कीट वैज्ञानिक धर्मपाल केरकेट्टा भी उपस्थित थे।

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