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    पीले सोने महुआ से आय को झटका,नए नियम ने बढ़ाई चिंता

    Published: Fri, 21 Apr 2017 04:09 AM (IST) | Updated: Fri, 21 Apr 2017 04:09 AM (IST)
    By: Editorial Team

    अंबिकापुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

    आबकारी अधिनियम में दो दशक बाद महुआ की खरीद-बिक्री को लेकर शिथिल किए गए नियम को फिर से प्रभावी करने से सरगुजा में पीले सोना कहे जाने वाले महुआ से होने वाली आय को बड़ा झटका लगा है। हालांकि सरगुजा में अधिनियम की कापी नहीं पहुंची है,लेकिन महुआ अधिनियम के प्रभावी होने की खबर से महुआ की खरीदी दर करीब आधी हो गई है। संग्राहक औने-पौने दामों में महुआ की बिक्री कर रहे हैं।

    प्रदेश में विदेशी शराब की बिक्री में ठेकेदारी की प्रथा को समाप्त करने के साथ सरकार ने शराब बिक्री का जिम्मा अपने हाथों में ले लिया है। नए सत्र में शराब बिक्री का काम आबकारी अमले द्वारा प्लेसमेंट एजेंसियों के कर्मचारियों से कराई जा रही है। इसके साथ ही सरकार अब गांव की गलियों तक आसानी से मिलने वाली कच्ची महुआ शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में कदम बढ़ा चुकी है। करीब दो दशक पूर्व शिथिल किए गए आबकारी अधिनियम के महुआ नियम को पुनः क्रियाशील कर देने से अब महुआ की खरीद-बिक्री बड़े पैमाने पर करने वालों पर भी आबकारी एक्ट की धाराओं के तहत्‌ कार्रवाई की जाएगी। नियम के अनुसार पांच किलो से अधिक महुआ की खरीद-बिक्री और परिवहन के लिए कलेक्टर की अनुमति अनिवार्य होगी। ऐसे में सीजन में बड़े पैमाने पर महुआ की खरीदी करने वाले पशोपेश में हैं। लाइसेंस के लिए मात्रा और फीस का भी निर्धारण किया गया है। वर्ष 1996 में आबकारी अधिनियम से महुआ खरीद-फरोख्त के लिए बनाए गए नियम को हटा दिया गया था। हालांकि वन क्षेत्र में रहने वाले संग्राहकों के लिए छूट की सीमा 15 फरवरी से 15 जून निर्धारित की गई है।

    ग्रामीण क्षेत्र में महुआ एवं तेंदूपत्ता दोनों वनोपज ग्रामीणों के आय का बड़ा जरिया माने जाते हैं। फूड फार वर्क एवं मनरेगा के पूर्व तेंदूपत्ता एवं महुआ संग्रहण दो ही बड़े माध्यम थे,जिनसे नकदी पैसा सीधे ग्रामीणों को मिलता था और विवाह से लेकर कपड़े एवं बड़ी खरीददारी के लिए ग्रामीणों को पैसा मिल जाता था। हजारों की संख्या में महुआ संग्रहण में लगे लोगों के लिए महुआ अधिनियम फिर से प्रभावी हो जाने पर झटका लगा है। इस वर्ष महुआ की जबरदस्त फसल होने के बाद भी ग्रामीणों में मायूसी है। गत वर्ष न्यूनतम 25 से 30 रुपए तक बिकने वाला महुआ वर्तमान में 15 से 20 रुपए प्रति किलो के हिसाब से ग्रामीणों से खरीदा जा रहा है। सरकार ने महुआ का समर्थन मूल्य बीस रुपए प्रति किलो निर्धारित किया था, पर महुआ खरीदी केंद्र गांव-गांव में खोलने की व्यवस्था नहीं हुई है। वर्तमान में महुआ की खरीद करने वाले व्यवासायी भी नए अधिनियम से सहमें हुए हैं।

    38 गांव को गौण वनोपज का अधिकार-

    सरगुजा जिले में वन अधिकार कानून के तहत्‌ सरगुजा जिले में 38 गांव को गौण वनोपज का अधिकार दिया गया है। गौण वनोपजों में ग्रामीणों की आय का एक बड़ा साधन महुआ भी है। आबकारी अधिनियम में महुआ बिक्री को लेकर जारी नए नियम ने अब महुआ संग्राहकों के साथ ही बड़े व्यापारियों की भी चिंता बढ़ा दी है।

    आबकारी अधिनियम में समाहित महुआ खरीद-बिक्री के नियमों के संबंध में जारी की गई अधिूसचना की कॉपी अभी विभाग को प्राप्त नहीं हुई है। अधिसूचना की प्रति मिलने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि यह नियम सरगुजा जिले के लिए कितना प्रभावी होगा।

    सीएल पटेल

    आबकारी उपनिरीक्षक

    राष्ट्रीय वनाधिकार कानून में गौण वनोपजों के संग्रहण व बिक्री के मापदंड तय करने का अधिकार ग्रामसभा को है। महुआ बिक्री को लेकर शासन स्तर पर प्रभावी नियम से ग्रामीण क्षेत्रों तक खलबली मची है। गौण वनोपजों के संग्रहण, बिक्री पर इसका असर पड़ने लगा है। संग्राहक महुआ किसे बिक्री करेंगे,कितनी मात्रा में करेंगे,यह अधिकार वनाधिकार कानून के तहत्‌ ग्रामसभा को दी जानी चाहिए।

    गंगाराम पैकरा, अध्यक्ष

    चौपाल ग्रामीण विकास एवं शोध संस्थान

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