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    पुलिस बल लगाकर शराब दुकानों की होगी व्यवस्था, दबंगई दिखाएगी सरकार

    Published: Mon, 20 Mar 2017 03:51 AM (IST) | Updated: Tue, 21 Mar 2017 11:04 AM (IST)
    By: Editorial Team
    wine shop police protection 2017320 95424 20 03 2017

    रायपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। एक अप्रैल जैसे-जैसे करीब आ रहा है, वैसे-वैसे सभी जिलों के कलेक्टर, आबकारी अधिकारियों, नगर निगम आयुक्तों और पंचायतों के सीईओ पर शराब दुकानों की व्यवस्था करने का दबाव बढ़ता जा रहा है। सरकार ने अधिकारियों को 25 मार्च तक दुकान आबकारी विभाग को हैंडओवर करने का निर्देश दिया है। सरकार और जनता के विरोध का दबाव इतना ज्यादा है कि अधिकारी गोपनीय तरीके से काम में जुटे हैं।

    रायपुर और महासमुंद जिले में हाइवे से शिफ्ट होने वाली शराब दुकानों में से एक के लिए भी न नई दुकान बनवाई जा सकी है और न ही किराए पर ढूंढ़ पाए हैं। ऐसी स्थिति में अधिकारी आधिकारिक तौर पर बात करने को भी तैयार नहीं हैं। अनाधिकृत तौर पर कहना है कि महीने के आखिरी में विरोध वाली जगहों पर पुलिस बल लगाकर आनन-फानन में दुकानों का निर्माण कराना होगा या फिर कई दुकान तम्बू लगाकर भी चालू करनी पड़ सकती है।

    रायपुर जिले में हाइवे से 35 दुकानों की शिफ्टिंग होनी है। यहां नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायतों और ग्राम पंचायतों ने सरकारी जमीन पर दुकानों के निर्माण का टेंडर निकालने का दबाव बनाया। नगरीय निकायों ने टेंडर निकाला, लेकिन विरोध के कारण ज्यादातर जगहों पर काम शुरू नहीं हो पाया। रायपुर नगर निगम क्षेत्र में ही 11 दुकानों की व्यवस्था करनी है। निगम ने टेंडर निकाला, लेकिन विरोध को देखकर ठेकेदार ही नहीं आए। लाभांडी का टेंडर निरस्त करना पड़ा, जबकि फुंडहर, गोगांव, राजेंद्र नगर का टेंडर नहीं खोल पाए।

    किराए की चार-पांच दुकानें देखी, विरोध होने पर अब तक उनका भी अनुबंध नहीं हो पाया है। शेष 24 शराब दुकान वहीं चलाने की तैयारी है, जहां अभी ठेके पर चल रही हैं। ऐसे ही महासमुंद जिले में 47 शराब दुकानें हैं, जिनमें से 25 को हाइवे से हटाना है। यहां पूरी दुकानों के निर्माण का टेंडर जारी हुआ है, लेकिन अब तक सभी के लिए न स्थल चिन्हांकित किया जा सका है और न ही टेंडर फाइनल हो पाया है। यही हाल दुर्ग का भी है, जहां 40 शराब दुकानों के लिए टेंडर जारी हुआ है।

    इनमें से 19 का भवन निर्माण और 21 किराए पर लेने की कवायद चल रही है। अब तक टेंडर नहीं खोला जा सका है। धमतरी जिले में हाइवे से हटने वाली 22 दुकानों की व्यवस्था करनी है, यहां एक दुकान का जबरदस्त विरोध है। भखारा के लोगों ने अब तक दुकान की नींव नहीं रखने दी है। इन्होंने किराए पर भी दुकान नहीं चलने की चेतावनी दे डाली है। इस कारण कोई भी अपना भवन आबकारी विभाग को देने के लिए तैयार नहीं हो रहा।

    आज और कल में खोले जाएंगे टेंडर

    दुर्ग, महासमुंद समेत कई जिलों में निर्माण के लिए टेंडर आ चुके हैं, उन्हें सोमवार या मंगलवार को खोलने की तैयारी है, ताकि काम शुरू कराया जा सके। ऐसे ही किराए की दुकानों के लिए भवन स्वामियों ने टेंडर भरा है, उसे कांकेर, राजनांदगांव समेत कुछ ही जिलों में खोला गया है। इन जिलों के अधिकारियों के मुताबिक किराए के भवनों का काम चल रहा है। शेष जिलों में किराए के टेंडर भी नहीं खोले जा सके हैं। इन्हें भी सोमवार या मंगलवार को खोलकर किराए के भवन फाइनल करने की तैयारी है।

    किराए की दुकान भूखंड स्वामी बनाकर देगा

    विरोध के कारण अधिकारी समूह क्षेत्रों में घूमकर किराए की दुकान नहीं खोज पा रहे हैं। पहले यही प्रयास हुआ, लेकिन बाद में सभी जिलों को यह निर्देश दिया गया कि किराए की दुकानों के लिए भी टेंडर बुलाया लिया जाए। जो अपने भवन या दुकान को किराए पर देना चाहता है, वह एडवांस और मासिक किराया भरकर टेंडर में भाग ले रहा है। इससे अधिकारियों को दोहरी राहत मिली है, पहली उन्हें भटकना नहीं पड़ रहा, दूसरी विरोध हुआ तो भवन स्वामी को सामने खड़ा होना पड़ेगा। क्योंकि प्लॉट है तो दुकान बनाने और भवन तैयार हैं तो वहां शराब दुकान खुलवाने की जिम्मेदारी भवन स्वामी की होगी।

    मंत्री का कहना- 10-15 दिन देर से चालू कर सकते हैं

    आबकारी मंत्री अमर अग्रवाल का कहना है कि कुछ जगहों पर शराब दुकानों के निर्माण का काम शुरू नहीं हो पाया है। किराए की दुकानों की भी व्यवस्था नहीं हो पाई है। दोनों तरीकों से दुकानों की व्यवस्था करने के लिए टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। महीने के आखिरी तक शत-प्रतिशत दुकानों को चालू कराने की पूरी कोशिश है। अगर इसके बाद भी किसी कारणवश सभी जगहों की शराब दुकान शुरू नहीं हो पाई तो वहां 10-15 दिन बाद व्यवस्था कर दुकान चालू की जाएगी।

    दुकान निर्माण और किराए के भवन के लिए टेंडर आ चुका है, लेकिन खोला नहीं जा सका है। टेंडर प्रक्रिया जारी है। दुकानों का निर्माण नहीं हो पाया या किराए की नहीं मिलीं तो विकल्प कई हैं। उन पर बाद में विचार होगा।उमेश अग्रवाल, कलेक्टर, महासमुंद

    (रायपुर जिले में शराब दुकानों की व्यवस्था पर पूछा गया तो, जवाब मिला...) अभी इस बारे में कुछ नहीं बोलूंगा। किसी और अधिकारी से बात कर लें। मैं इस विषय पर 30 तारीख के बाद बात करूंगा। ओपी चौधरी, कलेक्टर, रायपुर

    25 मार्च तक दुकानें हैंडओवर करनी हैं। हमारे जिले की कई दुकानें पूर्णता की ओर हैं, जबकि कई का काम चल रहा है। 25 मार्च तो नहीं, लेकिन एक अप्रैल तक सभी दुकानें हैंडओवर करने की स्थिति में आ जाएंगे। वीएस शर्मा, सहायक आयुक्त, आबकारी, राजनांदगांव

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