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    खराब ग्रेडिंग से बदनामी, अब सी व डी ग्रेड स्कूलों को कहेंगे फोकस स्कूल

    Published: Tue, 18 Jul 2017 08:22 AM (IST) | Updated: Tue, 18 Jul 2017 12:37 PM (IST)
    By: Editorial Team
    durg school 2017718 123610 18 07 2017

    दुर्ग। डॉ. एपीजी अब्दुल कलाम शिक्षा गुणवत्ता अभियान के तहत मूल्यांकन में फिसड्डी साबित होने वाले स्कूलों को अब सी और डी ग्रेड नहीं दिया जाएगा। बल्कि इन स्कूलों को फोकस स्कूल के नाम से पुकारा जाएगा। इसकी वजह है खराब ग्रेडिंग से स्कूलों की बदनामी होती थी इसलिए नाम बदला गया है।

    राज्यभर के प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में शिक्षा गुणवत्ता बढ़ाने के लिए डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम शिक्षा गुणवत्ता अभियान चलाया जा रहा है। अभियान का यह तीसरा साल है। पांच से 15 जुलाई तक दुर्ग जिले के 926 प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में इस अभियान के तहत सोशल ऑडिट कराया गया।

    सोशल ऑडिट की रिपोर्ट राज्य को ऑनलाइन एंट्री कर भेज दी गई है। रिपोर्ट में कौन से स्कूल को क्या ग्रेड मिला है, इसका खुलासा फिलहाल नहीं हुआ है, लेकिन ये तय है कि अब स्कूलों को सी और डी ग्रेड नहीं मिलेगा। इस बार सी और डी ग्रेड वाले स्कूलों का नामकरण फोकस स्कूल के रूप में होगा।

    इसलिए नाम दिया गया फोकस स्कूल

    सी और डी ग्रेड वाले स्कूलों को फोकस स्कूल का नाम इसलिए दिया जा रहा है, ताकि आम लोगों की धारणा उस स्कूल के प्रति बदल सके। दरअसल सी और डी ग्रेड की वजह पालकों को ऐसा लगने लगा था कि वे कमजोर श्रेणी के स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ा रहे हैं।

    वहीं बच्चों के दिमाग पर मनोवैज्ञानिक असर पड़ता था कि वे फिसड्डी स्कूल के विद्यार्थी हैं। फोकस शाला होने से इस तरह की छाप हटेगी और आम धारणा भी बदलेगी। पिछले साल गुणवत्ता अभियान में दुर्ग जिले के 209 स्कूल को सी और डी ग्रेड मिले थे।

    इस साल अभियान के दौरान स्कूलों में सोशल ऑडिट के तहत प्राचार्य, व्याख्याता और पूर्व माध्यमिक शाला के हेडमास्टरों ने निरीक्षण किया है और 20 बिन्दुओं पर प्रपत्र भरा है। इस प्रपत्र के आधार पर कमजोर स्कूलों को सुधारने के लिए रणनीति बनाई जाएगी और उनकी गुणवत्ता बढ़ाने के लिए कार्ययोजना तैयार कर उस पर अमल किया जाएगा।

    फोकस शाला कहेंगे

    'सी और डी ग्रेड के बजाय ऐसे स्कूलों को फोकस शाला संबोधित करना है। इससे फिसड्डी होने या कमजोर गुणवत्ता वाले स्कूल की छाप हटेगी।' - श्रीमती छबिदास, जिला परियोजना अधिकारी सर्व शिक्षा अभियान

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