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    मध्यप्रदेश के आईएसआई नेटवर्क में अब छत्तीसगढ़ का नाम भी जुड़ा

    Published: Sat, 15 Apr 2017 11:40 PM (IST) | Updated: Mon, 17 Apr 2017 10:27 AM (IST)
    By: Editorial Team
    isinetwork 15 04 2017

    बिलासपुर। मध्यप्रदेश के आईएसआई नेटवर्क में अब छत्तीसगढ़ का नाम भी जुड़ गया है। इसके मास्टर माइंड राजीव उर्फ रज्जन तिवारी के तार जांजगीर से जुड़े हैं। पकड़े गए दोनों युवकों के आधा दर्जन खातों में लाखों स्र्पए जमा कराने व निकालकर दूसरे खातों में जमा कराने का खुलासा हुआ है। इसमें आरोपी संजय के दो खातों में ही 42 लाख स्र्पए जमा होने की पुष्टि हुई है।

    मध्यप्रदेश एटीएस ने बीते फरवरी में आईएसआई नेटवर्क के सक्रिय होने का खुलासा किया था। इस मामले में बलराम सहित अन्य युवकों को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने गिरोह के सदस्यों को पकड़कर पूछताछ की थी, तब पता चला था कि मध्यप्रदेश के सतना जिले के उचेहरा थाना क्षेत्र के पिथौरा पोढ़ी निवासी गांजा तस्कर रज्जन उर्फ राजीव तिवारी शराब के साथ ही अवैध हथियारों की तस्करी करता था।

    बाद में वह आईएसआई नेटवर्क से जुड़कर जासूसों को मदद करने लगा। वह एजेंटों को रकम उपलब्ध कराने मनींद्र यादव व संजय देवांगन जैसे युवकों के खातों का उपयोग करता था। एडिशनल एसपी प्रशांत कतलम ने बताया कि रज्जन तिवारी का रिश्तेदार जांजगीर में रहता है। उसी के जरिए ही उसकी पहचान संजय देवांगन व मनींद्र यादव से हुई थी।

    उसके कहने पर ही उन्होंने अपना अकाउंट नंबर दिया, जिसमें बाहर से रकम मंगाए जाते थे। बाद में स्र्पयों को रज्जन के बताए अनुसार अलग-अलग खातों में जमा किया जाता था। पुलिस इन दोनों युवकों को गिरफ्तार कर पूछताछ कर रही है। प्रारंभिक जांच व पूछताछ में पता चला है कि उनके पास जांजगीर के नैला में एसबीआई, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया के साथ ही आधा दर्जन से अधिक बैंक अकाउंट हैं। उनमें संदिग्ध रूप से बड़ी मात्रा में रकम जमा कराई गई हैं।

    इसी तरह जमा रकम को निकालकर दूसरे खातों में जमा कराया गया है। संजय देवांगन के सिर्फ एक खाते की जांच में पता चला कि एक साल में 23 लाख स्र्पए जमा कराए गए थे। इसी तरह दूसरे खाते में 19 लाख स्र्पए जमा कराए गए थे। पुलिस इन खातों की तस्दीक कर रही है। इसके साथ ही आरोपियों से सघन पूछताछ कर प्रदेश में आईएसआई एजेंटों के नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है।

    नोटबंदी व खातों की जांच से लगी भनक


    पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार देशभर में नोटबंदी लागू होने के बाद आयकर विभाग ने खातों मंे आए स्र्पयों को नजर में रखा था।साथ ही खातों में जमा रकम को दूसरे खातों में ट्रांजेक्शन की भी जानकारी जुटाई जा रही थी।

    सूत्रों का कहना है कि इस तरह से खातों में रकम जमा करने-कराने के साथ ही सभी खाताधारकों की गतिविधियों की जांच केंद्र सरकार की खुफिया एजेंसी कर रही थी। खुफिया एजेंसी की जांच में ही आईएसआई गतिविधियों के प्रदेश में सक्रिय होने की भनक लगी थी, जिसके आधार पर पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले का खुलासा किया है।

    पुलिस हिरासत में रज्जन का रिश्तेदार

    पुलिस की टीम ने इस गंभीर मामले में अन्य सहयोगियों की जानकारी जुटाकर पतासाजी शुरू कर दी है। पुलिस ने संजय देवांगन व मनींद्र से पूछताछ के आधार पर सतना के मास्टर माइंड रज्जन के रिश्तेदार को भी हिरासत में ले लिया है। पुलिस उससे पूछताछ कर यह जानकारी जुटा रही है कि राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में उसकी क्या भूमिका रही है।

    रिमांड पर लेगी पुलिस

    प्रशिक्षु आईपीएस शलभ सिन्हा ने बताया कि अभी प्रारंभिक पूछताछ में दो आरोपियों के आईएसआई नेटवर्क से जुड़े होने की जानकारी मिली है। रविवार को दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया जाएगा। इस दौरान इस गंभीर मामले में पूछताछ व उनके अन्य नेटवर्क की जांच के लिए पुलिस उन्हें रिमांड पर लेगी। हालांकि, अभी यह तय नहीं किया गया है कि रिमांड की अवधि कितने दिन रहेगी।

    सिंचाई विभाग में पदस्थ हैं पिता

    मामले के आरोपी मनींद्र यादव के पिता सिंचाई विभाग अकलतरा में कार्यरत हैं। उसके परिजन को नहीं पता था कि वह इस तरह की राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल था। पुलिस ने उसके साथ ही संजय देवांगन की गिरफ्तारी की सूचना दे दी है। संजय के पिता का निधन हो गया है। दोनों युवक मुख्य सरगना रज्जन के संपर्क में आने के बाद दो साल से जासूसों की मदद कर रहे थे।

    रज्जन की गिरफ्तारी के बाद आ गए थे बिलासपुर

    पुलिस की पूछताछ में आरोपी संजय व मनींद्र ने बताया कि बीते फरवरी में आरोपी रज्जन तिवारी के गिरफ्तार होने के बाद से दोनों को भी पकड़े जाने की चिंता सताने लगी थी। क्योंकि, रज्जन तिवारी के कहने पर ही उन्होंने आधा दर्जन से अधिक बैंक खाते खुलवाए थे और उसके कहने पर ही खातों में आई रकम को निकालकर दूसरे खातों में जमा कराते थे। लिहाजा, रज्जन की गिरफ्तारी के बाद डरे-सहमे दोनों युवक अकलतरा से बिलासपुर आ गए थे। फिर यहां निजी संस्थान में काम करने लगे थे।

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