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    15 जून से कोल माफिया पर 'इज डुइंग' सिस्टम रखेगा नजर

    Published: Fri, 19 May 2017 03:58 AM (IST) | Updated: Sat, 20 May 2017 09:50 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    बिलासपुर। कोयले की अफरा-तफरी करने वाले माफियाओं पर अब 'इज डुइंग' सिस्टम नजर रखेगा। इसके जरिए पूरी प्रणाली को ऑनलाइन किया जा रहा है। 15 जून से इसे प्रदेश में लागू कर दिया जाएगा। केंद्र सरकार के निर्देश पर खनिज विभाग ने ऑनलाइन डॉटा तैयार कर लिया है। पहले चरण में कोल डिपो, कोल वॉशरी व डोलोमाइट खदानों में यह सिस्टम शुरू होगा।

    कोल माइंस से निकलकर कोलवॉशरी और वहां से प्लांटों के अलावा डिपो में डंप किए जाने वाले सभी ग्रेड के कोयले पर अब इज डुइंग प्रणाली के जरिए खनिज विभाग के अफसर दफ्तर में बैठे-बैठे नजर रख सकेंगे। केंद्र सरकार के निर्देश पर प्रथम चरण में महत्वपूर्ण खनिजों पर इस व्यवस्था को लागू किया जा रहा है।

    इसमें कोलवॉशरी से लेकर कोल माइंस और डिपो की पूरी-पूरी जानकारी रहेगी। माइंस से लेकर वॉशरी और डिपो में कोल परिवहन में शामिल वाहनों की कुंडली भी तैयार की जा रही है। इसके लिए कोल परिवहन से जुड़े परिवहनकर्ताओं और वॉशरी संचालकों को परिवहन में उपयोग किए जाने वाले वाहनों का रजिस्ट्रेशन कराना होगा।

    वाहन नंबर से लेकर वाहन चालकों की पूरी जानकारी देनी होगी। मसलन ड्राइविंग लाइसेंस,वाहन चालक का नाम,पता व उससे संबंधित अन्य जानकारी भी विभाग के हवाले करनी होगी। कोल परिवहन करने वाले वाहनों को जीपीएस से लैस किया जाएगा।

    जीपीएस सिस्टम के जरिए कौन सा वाहन किस माइंस से निकलकर कौन सी वॉशरी में जा रही है। किस डिपो से किस प्लांट को कोल आपूर्ति के लिए रवाना हुआ है। यह सब जानकारी मिलते रहेगी। कोल के अलावा बेशकीमती खनिज पदार्थों की श्रेणी में शामिल डोलोमाइट के खनन व परिवहन पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी।

    विभाग में शुरू होगा पेपरलेस काम

    इज डुइंग के लागू होते ही खनिज विभागों में ठेकेदारों की भीड़ खत्म हो जाएगी। इसके अलावा विभाग में पेपरलेस कामकाज का दौर प्रारंभ हो जाएगा। पूरी व्यवस्था ऑनलाइन कर दिया जाएगा। मसलन ठेकेदार घर बैठे खदानों की नीलामी में भाग ले सकेंगे।

    इसके अलावा खदानों से खनन के लिए रायल्टी पर्ची से लेकर जरूरी शुल्क भी जमा करा सकेंगे। नेट बैंकिंग के जरिए शुल्क जमा करने की सुविधा भी मिलेगी । रायल्टी राशि जमा करने के बाद पर्ची भी ऑनलाइन खुद ही ले सकेंगे ।

    अवैध कारोबार होगा खत्म

    मौजूदा व्यवस्था पर नजर डालें तो कोल माफिया मनचाहे गड़बड़ी को अंजाम देने से नहीं हिचक रहे हैं। कोल डिपो में अच्छे ग्रेड के कोयले को डंप कर बी ग्रेड या इससे भी कम क्वालिटी का कोयला सप्लाई किया जा रहा है।

    बेनामी प्लांटों व कंपनियों के कोटे का कोयला भी बड़े पैमाने पर डंप किया जा रहा है। कमोबेश कुछ इस तरह का गोरखधंधा कोल वॉशरी में हो रहा है। ए ग्रेड के कोल को वॉश करने के बाद बी या सी ग्रेड के कोयले की आपूर्ति कर दी जा रही है।

    खनिज विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो जिला मुख्यालय के आसपास 200 से ज्यादा कोल डिपो संचालित है। इसी तरह आधा दर्जन से ज्यादा कोलवॉशरी के जरिए अलग-अलग ग्रेड के कोयले की धुलाई व सफाई की जाती है।

    हिर्री सहित आसपास के इलाकों में डोलोमाइट की खदानें संचालित की जा रही हैं। हिर्री की खदानों को भिलाई स्टील प्लांट द्वारा संचालित किया जा रहा है। यहां से भिलाई स्टील प्लांट के लिए डोलोमाइट का परिवहन किया जाता है।

    केंद्र सरकार के निर्देश पर कोल माइंस,कोल डिपो व डोलोमाइट खदानों में इज डुइंग सिस्टम लागू किया जा रहा है। पूरी व्यवस्था ऑनलाइन की जा रही है। 15 जून से ऑनलाइन सिस्टम काम करना शुरू कर देगा। विभाग ने इसके लिए डॉटा बेस तैयार कर लिया है। - महेश बाबू, उप संचालक,खनिज छत्तीसगढ़ शासन

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