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    ISI से जुड़े हैं छत्तीसगढ़ के इस शहर के युवकों के तार

    Published: Wed, 15 Nov 2017 10:50 AM (IST) | Updated: Wed, 15 Nov 2017 12:09 PM (IST)
    By: Editorial Team
    janjgir youth 15 11 2017

    बिलासपुर। जांजगीर-चांपा के युवकों के तार पाक की आईएसआई (इंटर सर्विसेस इंटेलीजेंस) से गहरे तक जुड़े हैं। इनकी गिरफ्तारी के बाद से जांच चल रही है। फिलहाल, सिविल लाइन पुलिस ने जम्मू-कश्मीर के बारामूला में एलओसी ट्रेडर्स के ठिकानों पर दबिश दी। वहां से कंप्यूटर का सीपीयू और हार्डडिस्क आदि जब्त कर लिया है। पिछले 11 दिन से पुलिस की टीम आईएसआई के नेटवर्किंग की पतासाजी कर रही थी।

    पुलिस राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के साथ ही जम्मू-कश्मीर के बारामूला तक पहुंची। टीम को एनआईए के साथ ही एमपी एटीएस से भी महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। खुफिया इनपुट के आधार पर भोपाल एटीएस ने बीते फरवरी में सतना समेत कई अन्य जगहों पर दबिश दी थी।

    इसमें आईएसआई नेटवर्क का पता चला था। इसके बाद से केंद्रीय खुफिया एजेंसी ने पूरे देश में अलर्ट जारी किया था। आईजी पीएस गौतम व एसपी मयंक श्रीवास्तव के निर्देश पर बिलासपुर की सिविल लाइन पुलिस तभी सक्रिय हो गई थी।

    पुलिस को सूचना मिली थी कि जांजगीर-चांपा निवासी संजय देवांगन की जम्मू-कश्मीर पुलिस को तलाश है। वह अपने सहयोगियों के साथ मिलकर आईएसआई नेटवर्क के लिए काम करता है।

    पुलिस ने जानकारी जुटाकर संजय के साथ ही जांजगीर के अकलतरा निवासी मनींद्र यादव, अवधेश दुबे और धमेंद्र यादव को पकड़ कर पूछताछ की थी। पता चला था कि सतना निवासी रज्जन तिवारी का मामा गांव अकलतरा में है और वह कुछ समय पहले यहां आकर इन युवकों का बैंक अकाउंट खुलवाया था।

    फिर रज्जन उनके एटीएम कार्ड को लेकर चला गया था। इस बीच मनींद्र यादव व धर्मेंद्र यादव को नौकरी दिलाने के लिए दिल्ली ले जाया गया।

    प्रशिक्षु आईपीएस शलभ सिन्हा व सिविल लाइन टीआई नसर सिद्दीकी ने बताया कि जैसे-जैसे पुलिस की जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि इन युवकों का आईएसआई से सीधा संपर्क था।

    संजय देवांगन का लिंक जम्मू-कश्मीर में पकड़े गए जासूस सतविंदर सिंह से पाया गया। दोनों के बीच बातचीत के साथ ही रुपए का लेनदेन भी होता रहा है।

    क्या है एलओसी ट्रेडर्स

    टीआई सिद्दीकी ने बताया कि एलओसी ट्रेडर्स पाकिस्तान बार्डर से सामान पहुंचाने का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि बार्डर पर तीन से साढ़े तीन सौ ट्रेडर्स काम करते हैं जो भारत से पाकिस्तान और पाकिस्तान से भारत सामान पहुंचाते हैं।

    उन पर भारतीय खुफिया एजेंसी के साथ ही पाकिस्तान की भी नजर रहती है। लेकिन खुफिया एजेंसी को उनकी गतिविधियों की भनक न लगे, इसलिए वस्तु विनिमय को जरिया बनाकर आतंकी संगठन व उनके एजेंटों तक रकम पहुंचाई जाती है।

    ऐसे काम करता है ठगी माड्यूल कॉल सेंटर

    प्रशिक्षु आईपीएस श्री सिन्हा ने बताया कि पाक एजेंटों ने देशभर में कॉल सेंटर बनाया है, जिसमें स्थानीय युवकों को रोजगार व कमीशन की मोटी रकम देने के बहाने काम कराया जाता है।

    पाकिस्तान से आए फोन काल्स को काल सेंटर के जरिए स्थानीय काल में बदल दिया जाता है और इसके जरिए ठगी की जाती है। इससे मिलने वाली रकम को यहां आईएसआई नेटवर्क तक पहुंचाया जाता है। एमपी एटीएस की टीम ने ऐसे ही कॉल सेंटरों में दबिश देकर इस मामले का भंडाफोड़ किया था।

    विश्लेषण करने के बाद होगा और राजफाश

    पुलिस अफसरों ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी पीर अशरद के घर से मिले सीपीयू व हार्डडिस्क की जांच में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। इसी तरह एनआईए, एमपी एटीएस व अन्य खुफिया जानकारी की पुलिस तस्दीक करेगी।

    पुलिस ने एनआईए व एटीएस से ठगी माड्यूल कॉल सेंटर के साथ ही आईएसआई नेटवर्क की भी महत्वपूर्ण जानकारी व टेलीफोन नंबर जुटाए हैं जिसका विश्लेषण करने के बाद पुलिस कई और महत्वपूर्ण राज खुलने का दावा कर रही है।

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