Naidunia
    Saturday, December 16, 2017
    PreviousNext

    मनोरोगियों के लिए 11 साल की कानूनी लड़ाई, तब बना मेंटल हॉस्पिटल

    Published: Sun, 13 Aug 2017 03:59 AM (IST) | Updated: Sun, 13 Aug 2017 10:24 AM (IST)
    By: Editorial Team
    mental hospital bilaspur 2017813 102449 13 08 2017

    बिलासपुर। राज्य स्थापना के बाद प्रदेश में सर्वसुविधायुक्त मेंटल हॉस्पिटल की स्थापना के लिए एक सामाजिक संस्था को 11 साल तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। हाईकोर्ट में वर्ष 2010 तक मामला चला। इस बीच राज्य शासन ने निर्माण कार्य में कानूनी व तकनीकी पेंच भी फंसाया। इसके बाद भी याचिकाकर्ता और उनके वकील ने हार नहीं मानी। आखिरकार बिलासपुर जिले के ग्राम सेंदरी में 100 बिस्तरों को मानसिक चिकित्सालय बना।

    छत्तीसगढ़ में मेंटल हॉस्पिटल स्थापना के लिए कानूनी लड़ाई की शुरुआत भी काफी दर्दनाक थी। वर्ष 2004 में दिसंबर की सर्द रात में बसस्टैंड चौक के पास बीमार हालत में एक विक्षिप्त महिला मिली। तेज बुखार के कारण वह दर्द से कराह रही थी। एक भयानक तस्वीर और सामने आई।

    किसी वहशी दरिंदे की वह शिकार भी हो गई थी। बीमारी की हालत में उसे जब सिम्स में भर्ती कराया गया और जब उसका इलाज शुरू हुआ तब चिकित्सकों को इस बात की जानकारी मिली कि वह गर्भवती है। चिकित्सकों के मानसिक रूप से विक्षिप्त महिला अपना नाम भी नहीं बता पा रही थी।

    अखबार में खबर प्रकाशित होने के बाद एफएफडीए नामक सामाजिक संस्था ने वर्ष 2004 में वकील श्रीमती मीना शास्त्री व जेके शास्त्री के माध्यम से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की। चूंकि मानसिक रोगी महिला अपना नाम नहीं बता पा रही थी लिहाजा जनहित याचिका में उसका नाम प्रतीक स्वरूप छाया रख दिया। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में दो प्रमुख मांगे रखी।

    छाया का उदाहरण सामने रखते हुए कहा कि छाया जैसी कई महिलाएं व तथा पुरुष लावारिस हालत में घूम रहे हैं। महिलाओं व युवतियों के साथ दरिंदे छाया जैसे बर्ताव भी कर रहे हैं। मानसिक रूप से विक्षिप्त युवती व महिलाओं की सुरक्षा के लिए राज्य में एक सुव्यवस्थित मानसिक चिकित्सालय का होना जरूरी है। जहां प्रदेश के किसी भी जगह लावारिस हालत में पाए जाने वाले मानसिक रोगियों को मेंटल हॉस्पिटल में रखकर इलाज कराया जाए । मामला चूंकि छाया और उनके जैसी मानसिक रोगी महिलाओं व युवतियों से जुड़ा हुआ था लिहाजा हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर इस संबंध में जवाब मांगा।

    राज्य शासन ने पहले तो व्यवहारिक व तकनीकी दिक्कतों का हवाला देते हुए मानसिक चिकित्सालय के निर्माण से हाथ खींच लिया था। इसके बाद भी याचिकाकर्ता और उनके वकील ने हार नहीं मानी । मामला 11 साल चला। वकील की कोशिश रंग लाई । इस बीच हाईकोर्ट ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य शासन को कड़े निर्देश दिए। लगातार दबाव के चलते राज्य शासन ने वर्ष 2010 में हाईकोर्ट के डिवीजन बेंच के समक्ष मानसिक चिकित्सालय के निर्माण को लेकर सहमति जताई व जवाब पेश किया। शासन के जवाब के बाद डिवीजन बेंच ने राज्य शासन ने विस्तृत कार्ययोजना पेश करने कहा था। इस पर शासन ने जिला मुख्यालय से तकरीबन 12 किलोमीटर दूर ग्राम सेंदरी में मानसिक चिकित्सालय की स्थापना करने व बजट सहित अन्य जानकारी दी थी।

    प्रतिक्रिया दें
    English Hindi Characters remaining


    या निम्न जानकारी पूर्ण करें
    नाम*
    ईमेल*
    Word Verification:*
    Please answer this simple math question.
    +=

      जरूर पढ़ें