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    25 दिन में ही टूट गई नई लाइन, दौड़ती रही ट्रेनें, टला बड़ा हादसा

    Published: Sat, 18 Mar 2017 09:34 PM (IST) | Updated: Mon, 20 Mar 2017 09:55 AM (IST)
    By: Editorial Team
    bilaspurrail 2017318 213850 18 03 2017

    बिलासपुर/ टेंगनमाड़ा। सल्कारोड से टेंगनमाड़ा के बीच बिछाई गई नई लाइन महीनेभर भी नहीं टिक सकी। टेंगनमाड़ा स्टेशन से करीब 3 किमी पहले पटरी से 9 इंच का हिस्सा टूटकर अलग हो गया। इसके बाद भी पूरी रात यात्री ट्रेनें व मालगाड़ी दौड़ती रहीं। सूचना मिलने के बाद रेलवे में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में अमला ब्लॉक लेकर लाइन को दुरुस्त किया।

    पिछले कई सालों से सल्कारोड-टेंगनमाड़ा के बीच लगभग 17 किमी में दूसरी लाइन बिछाने का काम चल रहा था। कार्य पूरा होने के बाद क्लीयरेंस के लिए 16 फरवरी को मुख्य सुरक्षा आयुक्त सुदर्शन नायक पहंुचे। जांच के बाद उन्होंने 90 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से ट्रेनों के परिचालन की अनुमति दी।

    हालांकि इसके बाद भी कुछ काम बाकी था जिसे रेल प्रशासन ने पूरा किया। 22 फरवरी से दूसरी लाइन में ट्रेनें निर्धारित रफ्तार से दौड़ने लगीं। परिचालन के 25वें दिन ही रेल फ्रैक्चर हो गई। टेंगनमाड़ा रेलवे स्टेशन से पहले किमी 771/36 व 772/01 के बीच पटरी का 9 इंच लोहे टुकड़ा अलग हो गया। इससे पटरी पर गेप हो गया। इतनी बड़ी फ्रैक्चर के बाद भी किसी को इसकी सूचना तक नहीं मिली।

    नतीजतन यात्री ट्रेन और मालगाड़ी अपनी रफ्तार से यहां से गुजरती रहीं। जानकार इस बात को लेकर हैरान हैं कि पटरी टूटने के बाद भी ट्रेनें आखिर कैसे गुजरीं। यहां से एक दर्जन से अधिक यात्री ट्रेनें व मालगाड़ी गुजरती है। सुबह जब पटरी टूटने की सूचना स्टेशन मास्टर व अन्य अधिकारियों को मिली तो सभी मौके पर पहुंच गए। ब्लॉक लेकर टूटे हुए हिस्से में लोहा जोड़ा गया। इसके अलावा दोनों तरफ से क्लिप लगाई गई। इसके बाद ही ट्रेनों का परिचालन सामान्य हुआ।

    सुबह ग्रामीण ने दी सूचना

    पटरी टूटने की यह घटना कितने समय की है यह स्पष्ट नहीं है। एक प्रत्यक्षदर्शी ग्रामीण के आधार पर रेल फ्रैक्चर की घटना रात 1 बजे के करीब की है। घटनास्थल से लगा अकड्डा नाम का गांव है। यहां रहने वाला जियालाल ठेकेदार का मजदूर है और वह पटरी की वेल्डिंग आदि का कार्य करता है। उसने बताया कि रात में जब यहां से ट्रेनें गुजर रही थी तब टकटक की आवाज आ रही थी।

    जानकार होने के नाते उसे इस बात का अहसास भी हो गया कि पटरी में खराबी है। आधी रात होने के कारण वह अकेले मौके पर पहुंचने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। सुबह 5 बजे के करीब उसने चीफ पीडब्ल्यूआई सीएल मीणा को फोन से इसकी सूचना देनी चाही लेकिन उन्होंने रिसीव नहीं किया। ऐसे में असिस्टेंट पीडब्ल्यूआई श्री मंडल को जानकारी दी।

    ये ट्रेनें बच गई हादसे से

    संबंधित निजी कर्मचारी की बात पर यकीन करें तो जिस समय की घटना है उस समय में यहां से आधा दर्जन से अधिक कोचिंग ट्रेनें गुजरती हैं। इतनी ही संख्या में मालगाड़ी में चली। सभी टूटी पटरी पर दौड़ती रही। लेकिन कोई हादसा नहीं हुआ।

    ट्रेनें टेंगनमाड़ा से गुजरने का समय

    0 भोपाल- बिलासपुर पैसेंजर रात 2.30 बजे

    0 अमृतसर- विशाखापट्टनम हीराकुंड एक्सप्रेस रात 3.30 बजे

    0 चिरमिरी - बिलासपुर पैसेंजर रात 3 बजे

    0 अंबिकापुर- दुर्ग एक्सप्रेस सुबह 4 बजे

    0 छपरा- दुर्ग सारनाथ एक्सप्रेस

    0 भोपाल- दुर्ग अमरकंटक एक्सप्रेस

    इनका कहना है

    टेंगनमाड़ा के पास पटरी का बड़ा हिस्सा टूटकर अलग हो गया था। घटना कितने बजे की है यह बता पाना मुश्किल है। सुबह इस लाइन से गुजर रही मालगाड़ी के गार्ड ने इसकी सूचना दी। इसके बाद ब्लॉक लेकर पटरी को ठीक कर लिया गया है।

    बी गोपीनाथ मलिया डीआरएम, बिलासपुर रेल मंडल

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