Naidunia
    Sunday, September 24, 2017
    PreviousNext

    इंटरनेट पर नहीं, आंगन में दिखे गौरैया

    Published: Sat, 30 Apr 2016 07:06 AM (IST) | Updated: Thu, 16 Mar 2017 10:05 PM (IST)
    By: Editorial Team
    gau raiya 30 04 2016

    बिलासपुर(निप्र)। पर्यावरण की परवाह किए बिना हो रहे विकास और बदलते मौसम की वजह से गौरैया आंगन में दिखना बंद हो गई हैं। आज बच्चे गौरैया को इंटरनेट में सर्च करते हैं। उन्हें बचाने के लिए थोड़ी जिम्मेदारी सभी को निभानी चाहिए। ताकि वह इंटरनेट की जगह एक बार फिर घर-आंगन में दिखने लगे।

    नईदुनिया-जागरण समूह के अभियान लौट आओ गौरैया अभियान के तहत 20 अप्रैल को उसलापुर स्थित ड्रीम इंडिया स्कूल में बच्चों को गौरैया संरक्षण का संदेश देते हुए विशेषज्ञों यह बात कही। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे विकास की रफ्तार बढ़ रही है, वैसे ही लोगों की व्यस्तता भी बढ़ रही है। इससे वे पक्षियों को दाना-पानी नहीं डाल पाते हैं। पक्षियों को संरक्षण नहीं मिलने से वे धीरे-धीरे विलुप्त होते जा रहे हैं।

    विशेषज्ञों ने बच्चों को गौरैया के संरक्षण के लिए प्रयास करने की अपील की। उन्होंने कहा कि हमारे थोड़े-से प्रयास से ही गौरैया दोबारा आंगन में लौटेगी और फिर से चहकने लगेगी। इससे हमारी आने वाली नई पीढ़ी को वाट्सएप और सोशल मीडिया में ही गौरैया को नहीं तलाशेंगे।

    नईदुनिया-जागरण समूह के इस कार्यक्रम के माध्यम से स्कूली बच्चों को गौरैया का महत्व बताते हुए जागरूक किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्हें पक्षियों के संरक्षण व भारतीय संस्कृति से जोड़ने प्रयास किया जा रहा है। इससे बच्चों को बालपन से ही गौरैया के प्रति कुछ करने की प्रेरणा मिलेगी और वे प्रकृति से भी जुड़ेगे। नईदुनिया के इस अभियान से जुड़कर पक्षी विशेषज्ञ स्कूली बच्चों को गौरैया के प्रति जागरूक कर रहे हैं। उन्हें दाना-पानी डालने से लेकर घरों में अप्राकृतिक घोसले बनने के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं।

    गीत से दिया संदेश

    कार्यक्रम में ओ री गौरया छोटी-सी गौरैया.. गीत की सुमधुर प्रस्तुति हुई। गीत के साथ ही बच्चों ने आकर्षक नृत्य भी पेश किया। थिरकते हुए स्कूली बच्चों ने लौट आओ गौरैया का संदेश दिया। इसके साथ ही नृत्य की मोहक मुद्रा के साथ प्रकृति का संतुलन बनाए रखने पशु-पक्षियों को बचाने का संदेश भी दिया। इसका निर्देशन स्कूल की डांस टीचर अंकित सक्सेना ने किया।

    नुक्कड़ नाटिका ने मोहा

    लघु नुक्कड़ नाटिका का मंचन भी कार्यक्रम के दौरान किया गया। इस नाटिका की भाव पूर्ण प्रस्तुति ने सभी का मन मोहा। चिड़िया उड़.., अरे गौरैया नहीं पता.., किसी ने देखा है.., आज गौरैया खो गई है.. जैसे डायलॉग के साथ नुक्कड़ नाटिका देखते ही बन रही थी। कलाकार नाटिका के माध्यम से गौरैया को बचाने का संदेश देते रहे। बच्चों की प्रस्तुति किसी प्रोफेशनल कलाकारों जैसी लग रही थी। सभी अपने-अपने किरदार को बखूबी निभा रहे थे। नाटिका का निर्देशन कामना डोंगरे ने किया। इसे अभिषेक प्रजापति, आयुष यादव, रितेश खांडे, लक्ष्मी कारडा और दुर्गा मिश्रा ने अपने अभिनय ने सजाया।

    नईदुनिया की पहल से समाज और स्कूली बच्चों को अच्छा संदेश जाएगा। इस कार्यक्रम से सभी को अपनी जिम्मेदारी का एहसाह हुआ है। यदि हम आज नहीं जागेंगे तो आने वाली पीढ़ी को गौरैया इंटरनेट में ही तलाशना होगा। नईदुनिया के ऐसे प्रयासों से स्कूली बच्चों को अपने पर्यावरण से जुड़ने का अवसर मिला है।

    रेखा खरे, प्राचार्य, ड्रीम इंडिया स्कूल

    प्रतिक्रिया दें
    English Hindi Characters remaining


    या निम्न जानकारी पूर्ण करें
    नाम*
    ईमेल*
    Word Verification:*
    Please answer this simple math question.
    +=

      जरूर पढ़ें