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    बिरसा मुंडा ने धर्मांतरण के विरुद्ध किया था आंदोलन

    Published: Wed, 15 Nov 2017 06:22 PM (IST) | Updated: Wed, 15 Nov 2017 06:22 PM (IST)
    By: Editorial Team

    0.आज भी भगवान के रूप में पूजे जाते हैं बिरसा मुंडा

    0.बिरसा जयंती पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन

    पᆬोटो क्रमांक- 15जेएसपी 8 बिरसा मुंडा चौक में पूजा करने रैली में पहुंचे लोग।

    जशपुरनगर। नईदुनिया प्रतिनिधि। बुधवार को बिरसा मुंडा की जयंती पर आदिवासी समाज के द्वारा जिला मुख्यालय में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ग्राम भागलपुर, टिकैतगंज सहित विभिन्न क्षेत्रों से बिरसा चौक जशपुर तक मुंडा समाज सहित आदिवासी समुदाय के द्वारा रैली निकाली गई। नगर भर में भ्रमण कर लोगों ने भगवान बिरसा के जयकारे लगाए। बिरसा चौक में बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर विशेष पूजाअर्चना की गई।

    बुधवार को बिरसा जयंती पर ग्राम टिकैतगंज सहित ग्राम बरटोली में बड़ी संख्या में मुंडा समाज सहित अन्य जनजातीय समाज के लोग जुटे। बिरसा जयंती को लेकर हर वर्ग में उत्साह देखने को मिला। नगर में विभिन्न कार्यक्र मों में उमड़ी भीड़ के मद्देनजर इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे। बुधवार की सुबह भागलपुर बिरसा मंच बरटोली से बिरसा मुंडा चौक तक शोभायात्रा निकाली गई। वनवासियों ने रैली निकाली और भगवान बिरसा के जयकारे लगाए। सुबह नौ बजे सभी बिरसा चौक पहुंचे जहां विशेष रूप से भगवान बिरसा मुंडा की पूजा अर्चना की गई। यहां पुष्प अर्पित करने के लिए लंबी कतार लग गई वहीं प्रसाद पाने के लिए भी सैकड़ों की संख्या में लोगों को कतार में लगे देखा गया। इस अवसर श्रीमती रजनी प्रधान ने कहा कि भगवान बिरसा के स्मरण मात्र से वनवासी समाज में ऊर्जा का संचार होता है और उनसे नई पीढ़ी को प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने बताया कि आजादी की लड़ाई में बिरसा मुंडा ने जमीनी स्तर की लड़ाई में अपनी सहभागिता सुनिश्चित कर दी थी। वहीं धर्मांतरण के विरूद्घ सबसे पहले उन्होंने आंदोलन की शुरूआत की थी। प्रांतीय संगठन मंत्री मुकेश्वर मास्टर ने बताया कि बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को झारखंड के ग्राम उलिहात में हुआ था। उन्होंने रांची से लेकर हजारीबाग सहित आसपास के क्षेत्रों में वनवासियों को एकजुट किया और अंग्रेजों के खिलापᆬ एक जन अंदोलन खड़ा किया। बिरसा जहां समाज को एकजुट बनाकर स्वाभिमान की रक्षा के लिए लड़ाई कर रहे थे। वहीं उन्हें दिव्य शक्ति प्राप्त थी, जिसके माध्यम से वे जड़ी बूटियों के द्वारा लोगों का इलाज भी करते थे। श्रीमती प्रधान ने कहा कि जब अंग्रेजों को बिरसा मुंडा से खतरा महसूस होने लगा तो षडयंत्र रच उन्हें 1898 में जेल भेज दिया गया। जेल में ही सन 1900 में उनकी संदिग्ध मौत हो गई। अंग्रेजों ने यह बात पᆬैलाई कि उनकी मौत हैजा के कारण हुई है। लेकिन किसी ने इस पर विश्वास नहीं किया क्योंकि हैजा जैसी बीमारी से ऐसा कैसे हो सकता है कि सिपर्ᆬ एक आदमी प्रभावित हो। उन्होंने बताया कि बिरसा मुंडा को आज भी समाज के लोग भगवान बिरसा के नाम से संबोधित करते हैं और झारखंड सहित पूरे देश के जनजातीय समाज के लोगों में उनके प्रति आस्था है। इससे पूर्व कल्याण आश्रम छात्रावास में रह रहे बच्चों के साथ ही आश्रम के पदाधिकारियों के द्वारा भी विशेष आयोजन किया गया और भगवान बिरसात के जयकारे के साथ सैकड़ों की संख्या में सभी बिरसा चोैक पहुंचे। संस्था के द्वारा गोष्ठी का भी आयोजन किया गया। इस अवसर पर पूर्व नपा अध्यक्ष श्रीमती रजनी प्रधान सहित, मुंडा समाज के प्रांतीय संगठन महामंत्री मुकेश्वर इंदवार मास्टर, रामदयाल मुंडा, कोषाध्यक्ष प्रकाश मुंडा, सहबीर राम, लिलेंद्र प्रधान सहित बड़ी संख्या में समाज के पदाधिकारी एंव प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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