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    दसवीं बोर्ड में शहर पिछड़ा, ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों ने मारी बाजी

    Published: Sat, 22 Apr 2017 03:58 AM (IST) | Updated: Sat, 22 Apr 2017 03:58 AM (IST)
    By: Editorial Team

    बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

    इस बार दसवीं बोर्ड के परिणाम ने सभी को चौका दिया। शहरी क्षेत्र के बच्चे आशा अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाए। वहीं सीमित संसाधन के बाद भी ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों ने प्रदेश की मेरिट लिस्ट में जगह बनाने में सफलता पाई है। मस्तूरी के विनिता पटेल ने प्रदेश में दूसरा और ग्राम भकुर्रा-नवापारा के योगेश कुमार कैवर्त ने 6 वां स्थान प्राप्त किया है। जिला का परीक्षा परिणाम 57.11 प्रतिशत रहा। 3851 बच्चे प्रथम श्रेणी से पास हुए।

    शहरी क्षेत्र के मल्टीपरपस गवर्नमेंट स्कूल, महारानी लक्ष्मी बाई स्कूल, बालक हाईस्कूल सरकंडा, कन्या हाईस्कूल नूतन चौक, कुदुदंड हाईस्कूल प्रबंधन ने 10वीं बोर्ड को लेकर बड़े दावे किए थे। स्कूल के बच्चों के मेरिट लिस्ट में आने का भरोसा जताया गया था। लेकिन यह दावा खोखला साबित हुआ। मेरिट लिस्ट में बड़े सरकारी स्कूलों का एक भी बच्चा शामिल नहीं है। दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्र में संचालित होने वाले स्कूलों के परिणाम चौकाने वाले आए। सरस्वती शिशु मंदिर मस्तूरी की छात्रा विनिता पटेल ने 97.67 प्रतिशत अंक लेकर दूसरा स्थान प्राप्त किया है। वहीं द्वारिका प्रसाद हाई स्कूल भकुर्रा-नवापारा का छात्र योगेश कुमार कैवर्त 96.83 प्रतिशत अंक के साथ छठवें स्थान पर है। इसी स्कूल का उदित कुमार यादव सिर्फ कुछ अंक से मेरिट लिस्ट में जगह बनाने से चूक गया। उदित ने 96 प्रतिशत अंक हासिल किया है। इस परिणाम से साफ है कि शहरी क्षेत्र में पढ़ाई के लिए बेहतर संसाधन होने के बाद भी बच्चे पिछड़ रहे हैं। जबकि सीमित संसाधन में ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों ने अपनी मेहनत के बाद पर मेरिट लिस्ट में जगह बनाई है।

    वरिष्ठ व अनुभवी शिक्षक का भी नहीं दिखा असर

    शहरी क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में अनुभवी और वरिष्ठ शिक्षकों को तैनात किया गया है। इस परिणाम ने साफ कर दिया है कि वरिष्ठ शिक्षकों का कोई लाभ नहीं मिला है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र के कम अनुभवी शिक्षक होने के बाद भी बेहतर परिणाम आया है।

    इस बार भी छात्राओं ने मारी बाजी

    इस बार भी 10वीं बोर्ड में लड़कियों का बोल बाला रहा। जिले में कुल 33235 बच्चे परीक्षा में शामिल हुए थे। इसमें से 17041 लड़कियां और 16194 लड़के थे। 1894 लड़के प्रथम श्रेणी से पास हुए। वहीं 1957 लड़कियों ने प्रथम श्रेणी में जगह बनाई। इसी तरह 2884 लड़के दूसरी श्रेणी में आए। जबकि 3344 लड़कियां दूसरी श्रेणी में पास हुईं। जिला में 55.96 लड़के व 58.20 लड़कियां पास हुईं।

    इन कारणों से पिछड़े शहरी बच्चे

    - ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में अतिरिक्त क्लास ली गई, लेकिन शहरी स्कूल में नहीं।

    - ग्रामीण क्षेत्र में मेद्यावी बच्चों की पहचान कर उस पर अलग से फोकस किया गया, लेकिन शहरी स्कूल में ऐसा नहीं हुआ।

    - शहरी क्षेत्र में अध्यापन के अलावा प्रबंध कार्य में जुटे रहे शिक्षक, पर ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षकों का पूरा ध्यान पढ़ाने पर रहा।

    - शहर में कोर्स पूरा करने में पीछे रहे स्कूल, जबकि ग्रामीण क्षेत्र 60 फीसदी से ज्यादा स्कूल में कोर्स हुआ पूरा।

    - शहरी शिक्षकों का बच्चों के प्रति उदासीन रवैया रहा, जबकि गुणवत्ता अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्र में अच्छी पढ़ाई कराई गई। बाक्स

    क्या कहते हैं जिम्मेदार

    अतिरिक्त कक्षा न लगाना वजह

    कुदुदंड हाईस्कूल की प्राचार्य रीता तिवारी का मानना है कि शहरी क्षेत्र के स्कूलों में कुछ कमी रह गई है। अतिरिक्त कक्षा नहीं लगने का प्रभाव पड़ा है। यदि पढ़ाई और विशेष कोचिंग बच्चों को मिलती तो बच्चे मेरिट लिस्ट में जगह बनाने में सफल होते।

    बच्चे करते हैं दूसरे काम

    मल्टीपरपस हाई स्कूल के प्राचार्य राघवेंद्र गौरहा का कहना है कि शहरी क्षेत्र में ज्यादातर अभिभावक बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ाना पसंद करते हैं। शहरी क्षेत्र में वैसे ही बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ने आते है तो आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं। ऐसे बच्चों को पढ़ाई के साथ अन्य काम करना पड़ता है। इसलिए वे पढ़ाई पर पूरी तरह से ध्यान नहीं दे पाते। इसके वितरीत ग्रामीण क्षेत्र में बड़े प्राइवेट स्कूल नहीं होने की वजह से बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाया जाता है। इससे परिणाम बेहतर आता है।

    इस साल का 10वीं बोर्ड का परिणाम पिछले साल अपेक्षा बेहतर रहा है। जिला का परीक्षा परिणाम 57.11 प्रतिशत है। ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों का प्रदर्शन सराहनीय रहा है।

    हेमंत उपाध्या, डीईओ

    और जानें :  # Children in rural areas
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