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    उम्र एक साल और वजन दो माह के बच्चे से कम

    Published: Wed, 12 Jul 2017 06:28 PM (IST) | Updated: Fri, 14 Jul 2017 11:55 AM (IST)
    By: Editorial Team
    dantewada news 12 07 2017

    दंतेवाड़ा। सरकार के लाख दावों के बावजूद अंदरूनी गांव में कुपोषित बच्चों की संख्या कम नहीं हो रही है। एक दिन पहले ही कुआकोंडा ब्लॉक से दो गंभीर कुपोषित बच्चों को जिला हास्पिटल लाया गया। एक साल के बच्चे का हालत ऐसी थी कि दो माह के बच्चा भी उससे बड़ा प्रतीत हो रहा था। इनमें एक बच्चे शिशु विभाग में डॉक्टरों की विशेष निगरानी में उपचार किया जा रहा है। वहीं दूसरे को पोषण पुनर्वास केंद्र में रखा गया है। बच्चे के साथ उसकी मां को भी पूरक आहार दिया जा रहा है।

    जिले में जागरूकता और उचित पोषण के अभाव में बच्चे कुपोषित हो रहे हैं। एक जानकारी के अनुसार जिले में आठ हजार से अधिक बच्चे कुपोषित हैं। जिन्हें एक पखवाड़े तक उपचार और पोषण आहार देने के लिए सभी ब्लॉक मुख्यालयों में पोषण पुनर्वास केंद्र खोला गया है। जहां उनकी सेहत में सुधार हो रहा है।

    केंद्र में मंगलवार को कुआकोंडा के सूरनार एक साल के संजू पिता हड़मा सहित एक अन्य बालक को लाया गया। दोनों की हालत गंभीर थी। चिकित्सकों के अनुसार संजू की उम्र एक साल थी लेकिन उसका शरीर दो माह के बच्चे जैसा है। संजू का वजन भी मात्र तीन किलो 900 ग्राम है। जबकि करीब तीन माह के दूसरे बालक एक किलो 420 ग्राम है। चिकित्सकों ने एक को जिला हास्पिटल के शिशु रोग वार्ड में डॉक्टरों की विशेष निगरानी में रख उपचार कर रहे हैं। जबकि संजू को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया गया है। वहां शिशु रोग विशेषज्ञ और अन्य स्टॉफ बच्चे की तिमारदारी में लगे हैं।

    उपचार के लिए पारितोषिक भी

    जिला मुख्यालय स्थित 20 बिस्तरा पोषण पुनर्वास केंद्र में अभी 21 बच्चों का उपचार हो रहा है। बताया गया कि यहां बच्चे के साथ माताओं को भी भोजन दिया जाता है। 14 दिनों के उपचार के बाद उन्हें 2250 रुपए पारितोषिक राशि के रुप में दिया जाता है। बताया गया कि जिले के अन्य पुनर्वास केंद्र में 10 बिस्तर हैं लेकिन जिला मुख्यालय में 20 बिस्तर का केंद्र है। वर्ष 2011 में स्थापित इस केंद्र में अब तक एक हजार 117 कुपोषित बच्चों का उपचार हुआ है।

    बचेली-दंतेवाड़ा में अधिक कुपोषित

    सूत्रों के अनुसार जिला मुख्यालय स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में दंतेवाड़ा ब्लॉक के अलावा बचेली से अधिक बच्चे आते हैं। इसके अलावा कटेकल्याण और कुआकोंडा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी कुपोषित बच्चों को यहां रिफर किया जाता है।

    जिले में आठ हजार कुपोषित बच्चे

    कुपोषण को मिटाने सरकार गर्भावस्था से लेकर प्रवस और इसके बाद भी जच्चा-बच्चा को पूरक पोषण आहार व दवाएं उपलब्ध कराती है। इतना ही स्कूलों में भी मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। बावजूद कुपोषित बच्चों की संख्या में कमी नहीं आ रही है। एक जानकारी के अनुसार जिले में करीब तीन हजार गर्भवती माताओं को पूरक आहार दिया जा रहा है। वहीं मध्यम और गंभीर कुपोषित बच्चों की संख्या आठ हजार के आसपास है।

    इनमें छह माह से तीन वर्ष आयु वर्ग में 4500 से अधिक और तीन से छह वर्ष के आयु वर्ग में 3300 से अधिक हैं। पिछले विधानसत्र में इस मामले को लेकर विधायक देवती कर्मा ने भी सवाल पूछे थे। तब महिला एवं बाल विकास मंत्री रमशीला साहू ने लिखित जानकारी देते स्थिति नियंत्रण में कहा था। साथ ही गर्भवती माता और कुपोषित बच्चों को दी जाने वाले आहार की मात्रा व तिथि स्पष्ट किया था।

    इनका कहना है

    जिले में कुपोषण की वजह साक्षरता की कमी प्रमुख है। ग्रामीणों को जागरूक करने के साथ ही टीकाकरण और पूरक पोषण लेने की सलाह दी जा रही है। सूरनार से आए दोनों बच्चे अतिकुपोषित है। एक को हॉस्पिटल के शिशु वार्ड में तथा दूसरे को पुनर्वास केंद्र में रख उपचार किया जा रहा है। यहां बच्चे के उपचार के साथ माताओं को भी 14 दिन भोजन उपलब्ध कराया जाता है। साथ ही डिस्चार्ज होने पर पारितोषिक राशि भी दी जाती है।

    - राजेश धु्रव, शिशु रोग विशेषज्ञ एवं पुनर्वास केंद्र प्रभारी

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