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    नक्सलगढ़ में शिक्षा की चाहत, इंद्रावती पार खुली आश्रम शाला

    Published: Thu, 14 Sep 2017 09:29 PM (IST) | Updated: Fri, 15 Sep 2017 09:10 AM (IST)
    By: Editorial Team
    school 14 09 2017

    दंतेवाडा। नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले के इंद्रावती नदी पार अबूझमाड़ इलाके में भी विकास की चाहत देखी जा रही है। जिला मुख्यालय से करीब 60 किमी दूर इंद्रावती नदी के उस पार बसे तुमरीगुंडा पंचायत के लोग अपने बच्चों को शिक्षा देना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि उनके बच्चे भी अन्य गांव के बच्चों की तरह ऊंची तालिम पाए। पर दिक्कत थी नदी पार कर करीब 15 बारसूर कैसे पहुंचे। इसलिए प्रशासन ने अब गांव में ही अस्थाई आश्रम शाला खोल दिया। अब इस गांव की सूरत भी बदलेगी और शिक्षा से अन्य समस्याओं का समाधान भी होगा।

    ग्रामीणों की मांग पर आश्रम शाला का शुभारंभ भी बुधवार सहायक आयुक्त आदिम जाति विभाग ने 25 बच्चों के साथ कर दिया। इससे ग्रामीणों में काफी उत्साह और संतोष देखा गया। ग्रामीणों का कहना है कि दूरस्थ गांव होने से जनप्रतिनिधि और बड़े अधिकारी इस गांव में नहीं पहुंचते। खाद्यान्न् नदी पार 10 किमी दूर मूचनार या 25 किमी दूर बारसूर से लाना पड़ता है।

    हालांकि मानसून के चार माह का खाद्यान्न् सरकार पहले भेज देती है लेकिन बाकि सामानों के लिए दिक्कत होती है। ऐसे में बच्चों को पढ़ाने भी कहां भेज पाते। पर अब गांव आश्रम शाला खुलने से बच्चों की प्राथमिक शिक्षा गांव में ही मिलेगी।

    ग्रामीणों ने सहायक आयुक्त आश्रम शाला परिसर में हैंडपंप और बाउंड्रीवाल की मांग भी की है। जिसे पूरा करने आश्वासन अधिकारी ने ग्रामीणों को दिया। उल्लेखनीय है कि पुराने स्कूल भवन को ग्रामीणों की मदद से तैयार कर 25 बच्चों के लिए आश्रम शाला बनाया गया है। यहां बच्चों के लिए बिस्तर, भोजन, बर्तन और कपड़ों के साथ अन्य पाठ्य सामग्री प्रशासन मुहैया कराया है।

    गांव में स्वास्थ्य सुविधा भी मांगी

    आश्रम शुभारंभ मौके पर पहुंचे मीडिया कर्मियों के समक्ष ग्रामीणों ने मूलभुत समस्याओं का जिक्र किया। जिनमें मुख्य रुप से पानी, बिजली, सड़क और स्वास्थ्य सुविधा थी। ग्रामीणों के अनुसार करीब एक हजार की आबादी वाले आठ पारा में बिजली नहीं है, सौर ऊर्जा की सुविधा है।

    मानसून की तरह ही राशन प्रत्येक चार या तीन माह में भेज दें तो बार-बार नदी पार करना नहीं पड़ेगा। गांव में छोटे बच्चों के लिए जिस तरह आश्रम शाला खोला गया, उसकी तरह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोलना चाहिए। 25 किमी दूर बारसूर से डॉक्टर नहीं पहुंचते। स्वास्थ्य कार्यकर्ता भी नदी उस पार या बारसूर में रहते हैं। बीमार होने पर बारसूर या 15 किमी दूर बीजापुर जिले के कोशलनार स्वास्थ्य केंद्र जाना होता है।

    चार स्कूल के बच्चों के लिए खुला आश्रम

    ''पंचायत में चार प्राथमिक शालाएं संचालित होती थी। जहां बच्चों की उपस्थिति न्यून थी। चारों स्कूल के 25 से अधिक बच्चों के लिए अस्थाई आश्रम शाला खोला गया है। चारों स्कूल के शिक्षक और अतिथि शिक्षक इन्हें शिक्षा देंगे। गांव में आश्रम खोलने की मांग पिछले दिनों ग्रामीणों ने कलेक्टर से की थी।

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