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    बजट नहीं मिला तो सिर्फ 85 ईंट में छोटे-छोटे शौचालय बना दिए

    Published: Mon, 17 Jul 2017 12:53 AM (IST) | Updated: Mon, 17 Jul 2017 04:46 PM (IST)
    By: Editorial Team
    85 brick made small toilets 2017717 131643 17 07 2017

    दंतेवाड़ा। जिले के कांवड़गांव में तैयार हो रहे शौचालय मुर्गी के दड़बे से भी छोटा है। ग्रामीणों को सीमेंट के 85 से 5 ईंट दी जा रही है। साथ ही छत के लिए चार फीट का एडबेस्टर शीट। दरवाजे भी बमुश्किल दो फीट चौड़ी उपलब्ध कराई गई।

    ग्राम सचिव की देखरेख में तैयार हो रहे गांव के शौचालय की साइज इतनी छोटी है कि स्वस्थ और वयस्क व्यक्ति प्रवेश ही न कर पाए। सचिव के दिए नाप पर ग्रामीण स्वयं सीमेंट-रेत मिलाकर शौचालय तैयार कर हैं। कांवड़गांव पंचायत में प्रति शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार रुपए खर्च करने के निर्देश है।

    सचिव भुनेश्वर ठाकुर का कहना है कि अभी 166 की राशि स्वीकृत हुई और गांव में सभी के घर शौचालय बनवाना है। राशि कम होने से परेशानी हो रही है। प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान के तहत ओडीएफ गांव बनाने सरकार ग्रामीणों के लिए पैसा भेज रही है लेकिन दंतेवाड़ा जिले के कांवड़गांव भ्रष्टाचार नजर आ रहा है।

    गांव में 422 शौचालय निर्माण करना है। इसमें से कुछ ने पूर्व में निर्माण करवा लिया है। बावजूद सचिव कम राशि आबंटन की बात कहते ग्रामीणों को गिनती के ईंट और रेत-सीमेंट देकर शौचालय निर्माण करवा रहा है।

    डूमाम पारा और सरपंच पारा के ग्रामीणों के अनुसार शौचालय बनाने सीमेंट के 85 नग ईंट, तीन बोरी सीमेंट और चार फीट लंबी एक एडबेस्टर शीट के साथ करीब दो फीट चौड़ा दरवाजा दिया गया है। रेत की व्यवस्था ग्रामीण स्वयं कर रहे हैं। गांव के घुसा गावड़े की माने तो तीन बोर सीमेंट, 85 ईंट, लैट्रिन शीट और शौचालय गेट सचिव ने दिया है। इसके बाद कहा कि शौचालयों में सरकार से मिले पैसों से अधिक खर्च हो रहा है।

    इससे ज्यादा पैसा वह नहीं लगा सकता है। ग्रामीण का कहना है जो सामान मिला है उसमें इतनी बड़ी ही शौचालय बन सकता है। सचिव और दो अन्य लोगों ने शौचालय निर्माण के लिए नाप भी दिया है। इसी तरह डूमाम पारा के बुधराम कहता है कि उसके नाम इंदिरा आवास है, इसलिए सचिव 80 ईंट ही दिए।

    निर्माण के दौरान ईंट कम पड़ गई तो 15- 20 ईंट मिट्टी का भी लगा दिया। गांव की विधवा बत्ती की पीड़ा है कि उसे सरकार शौचालय नहीं दे रही है। उसके पति जयराम की मौत दो साल पहले सल्फी के पेड से गिरने से हो चुकी है।

    सचिव ने कहा कि घर में कोई शौचालय बनाने वाला नहीं है। वह चुप हो कर रह गई। इस महिला ने सचिव से कई बार विधवा पेंशन के लिए भी कहा पर कोई सुनवाई नहीं हो रही। इस सबंध में कटेकल्या के जनपद सीईओ से बात करने का प्रयास किया गया लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। इस संबंध में पक्ष जानने जनपद सीईओ से संपर्क किया गया लेकिन उपलब्ध नहीं हो पाए। बताया गया कि वे घरेलू कार्य से अवकाश पर हैं।

    पूर्व विधायक ने भी देखी अनियमितता

    कुछ दिन पूर्व ही कांवड़गांव पहुंचे पूर्व विधायक भीमा मंडावी ने शौचालय निर्माण देखा। उन्होंने सचिव भुनेश्वर ठाकुर से कहा कि इतना छोटा शौचालय कैसे बन रहा। इस पर सचिव का जवाब था कि कम राशि में अधिक शौचालय बनानी है। इसलिए कुछ शौचालय के आकार छोटे हैं। सचिव के अनुसार जनपद के इंजीनियर द्वारा शौचालय के दरवाजे और अन्य सामग्रियां भिजवाई गई है। मैंने केवल ग्रामीणों को सूची के अनुसार सौंपा है।

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