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    नक्सलियों के दबाव में पहुंचते हैं ग्रामीण

    Published: Mon, 20 Mar 2017 07:11 PM (IST) | Updated: Mon, 20 Mar 2017 07:19 PM (IST)
    By: Editorial Team
    naxali 2017320 191921 20 03 2017

    दंतेवाड़ा । मुठभेड़ में मारे गए नक्सलियों के शव परिजनों को सौंपने के समय पुलिस ऐहतियात बरतती है। शव लेने आने वाले परिजनों में कई बार वास्तविक लोग नहीं होते। इसलिए पुलिस काफी पड़ताल और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों का सहयोग लेती है।

    बिज्जे के पहले कुन्ना डब्बा मुठभेड़ में भी नक्सलियों के दबाव में आकर अन्य ग्रामीण शव लेने पहुंचे थे। जिसका खुलासा होने पर वास्तविक परिजनों की तलाश की गई थी। बिज्जे का शव लेने आए कथित चाचा की बातों पर भी पुलिस को संदेह था। जानकारों का कहना है कि नक्सली संगठन में जाने के बाद कई परिवान उन्हें नहीं अपनाना चाहते। ऐसे में नक्सली अन्य ग्रामीणों पर दबाव बनाकर उन्हें शव लेने के लिए भेजते हैं।

    मॉरच्यूरी में सुरक्षा के इंतजाम

    नक्सलियों की शव जिला हॉस्पिटल के मॉरच्यूरी में रखा गया है। संवेदनशील क्षेत्र होने से इसकी सुरक्षा के लिए पुलिस दो जवानों की 24 घंटे तैनाती कैंपस में कर रखी है। हथियारबंद दो जवान मॉरच्यूरी की सुरक्षा में तैनात हैं और डॉक्टरों सहित वहां आने-जाने वालों पर नजर रखे हुए हैं।

    इनका कहना है

    'मारे गए नक्सलियों में से दो का शव सोमवार को उनके परिजनों को सौंप दिया गया। बिज्जे का शव लेने उसका चाचा गंगा आया था लेकिन वह पुलिस के सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। इसलिए उसके वास्तविक माता-पिता को लाने कहा गया है।

    -राजेश देवदास, टीआई, कोतवाली

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