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    जिंदगी और मौत से लड़ रहा तिहरे हत्याकांड का चश्मदीद

    Published: Fri, 14 Jul 2017 01:21 AM (IST) | Updated: Fri, 14 Jul 2017 11:25 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    धमतरी। जिला मुख्यालय के नजदीक बसे ग्राम तेलीनसत्ती में तिहरे मर्डरकांड के एकमात्र चश्मदीद राजा सिन्हा (14) हत्यारों के हमले से बुरी तरह घायल है। रायपुर के एक अस्पताल में वह जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है। उसके होश में आते ही हत्यारों की पहचान होने की उम्मीद है।

    पुलिस के मुताबिक अर्जुनी थाना क्षेत्र के ग्राम तेलीनसत्ती में गुरुवार अलसुबह 3 से 4 बजे के बीच अज्ञात लोग महेन्द्र सिन्हा के घर दाखिल हुए और ताबड़तोड़ हमला शुरू कर दिया। महेन्द्र सिन्हा, पत्नी उषा सिन्हा व छोटे पुत्र महेश उर्फ लक्की सिन्हा को बेरहमी से मौत के घात उतार दिया।

    सुबह 6 बजे के बाद पड़ोस में रहने वाला महेन्द्र सिन्हा का भतीजा चित्रसेन सिन्हा दादी रामबाई के कहने पर अपनी चाची उषा सिन्हा को खेत जाने के लिए उठाने उसके घर गया। सबसे पहले लहुलूहान और क्षत-विक्षत लाश उसी ने देखी। उसके चिल्लाने पर परिजनों को जानकारी हुई और पूरे गांव में खबर फैल गई।

    इसके बाद मृतक के घर के पास सैकड़ों ग्रामीणों की घंटों भीड़ लग गई। पुलिस को सूचना देकर घायल त्रिलोक उर्फ राजा को मसीही अस्पताल ले जाया गया। यहां के आईसीयू में जब तक राजा का उपचार चलता रहा। बाहर सुरक्षा के लिए पुलिस तैनात रही। गंभीर हालत को देखते हुए उसे रायपुर रेफर कर दिया गया।

    सूचना पाकर एसपी मनीष शर्मा, एएसपी केपी चंदेल, डीएसपी पीएस महिलांगे, डीएसपी मीता पवार, प्रशिक्षु डीएसपी उदयन बेहार, कर्ण कुमार उइके समेत कोतवाली, अर्जुनी, क्राईम ब्रांच, यातायात, महिला सेल समेत पुलिस की 8 टीमें पहुंच गई।

    सभी टीमों ने अपने-अपने स्तर पर एसपी के निर्देशन में सुराग ढूंढने की कोशिश की। एसपी मनीष शर्मा ने स्वयं मृतक के बड़े भाई चंद्रहास सिन्हा और पड़ोसियों से पूछताछ की। एसडीएम जीआर राठौर भी घटनास्थल पहुंचे थे।

    किसी से नहीं थी दुश्मनी

    परिजनों और पड़ोसियों से पूछताछ की गई। पुलिस को लोगों ने बताया कि महेन्द्र सीधासादा था। उसकी किसी के साथ दुश्मनी नहीं थी। वह गांव में रहकर टेलरिंग का काम करता था। परिवार में भी कोई विवाद नहीं हुआ है। मृतक के बड़े भाई चंद्रहास सिन्हा 2 बेटों, पत्नी और बच्चों समेत रहते हैं। पिता रामसिंग और माता रामबाई भी उन्हीें के साथ रह रहे हैं।

    किसी ने नहीं सुनी चीख पुकार

    घटना को हत्यारों ने विभत्स तरीके से अंजाम दिया है। सिर और चेहरे को टारगेट कर ताबड़तोड़ हमले किए गए हैं। महेन्द्र सिन्हा और उनकी पत्नी उषा सिन्हा के शव अर्द्घनग्न अवस्था में पाए गए हैं। पूरे कमरे में खून फैला हुआ था। छोटे बेटे महेश उर्फ लक्की की लाश पलंग के नीचे मिली। इतना सबकुछ होने के बावजूद आसपास रहने वाले लोगों ने कैसे चीख पुकार नहीं सुनी, यह सवाल उठ रहा है।

    रोते-बिलखते परिजन हुए बेहोश

    सूचना पाकर मृतक महेन्द्र सिन्हा के रिश्तेदार और उषा सिन्हा के मायके पक्ष के लोग रोते-बिलखते तेलीनसत्ती पहुंचते रहे। महिलाएं बड़ी संख्या में पहुंची थी। घटना के कमरे को पुलिस ने सील कर दिया था। इसलिए सभी दूसरे कमरे में बैठे हुए थे। रोने-बिलखने के कारण कुछ परिवार के सदस्यों की तबीयत भी खराब हो गई। उपचार के लिए डॉक्टर बुलाना पड़ा। तब उनकी हालत सुधरी।

    लुसी डॉग आसपास ही घूमती रही

    पुलिस के डॉग स्क्वायड में शामिल लुसी डॉग को घटनास्थल पर सुराग ढूंढने के लिए लाया गया था। घटनास्थल के बाद लुसी मृतक के बड़े भाई चंद्रहास सिन्हा और पड़ोसी के घर में गई। फारेंसिक एक्सपर्ट और फ्रिंगर प्रिंट एक्सपर्ट ने भी आसपास की जांच-पड़ताल की। जांच में क्या क्लू मिला है पुलिस कुछ भी बताने से बच रही है।

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