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    चिन्नााबोडकेल में मुठभेड़ से लौटते जवानों ने रायगुड़ा में फूंके आदिवासियों के 16 घर,

    Published: Sat, 20 May 2017 07:33 AM (IST) | Updated: Sat, 20 May 2017 07:33 AM (IST)
    By: Editorial Team

    0 पहले ग्रामीणों को गांव से भगाया और एक-एक कर फूंकते चले गए मकान

    0 फोर्स ने घटना के लिए नक्सलियों को जिम्मेदार ठहरा लिखा दी है एफआईआर

    फोटो 19बीजा 1, 2, 4, 8

    गणेश मिश्रा

    बीजापुर। नईदुनिया

    बस्तर में सुरक्षाबलों की बर्बरता की एक औऱ तस्वीर उजागर हुई है। नईदुनिया टीम तक शिकायत पहुंची तो हकीकत जानने मौके पर गए। वहां का नजारा दिल दहला देने वाला था। 12 से 15 मई तक नक्सलियों के खिलाफ चलाए अब तक के सबसे बड़े अभियान के दौरान बीजापुर सीमा पर सुकमा के रायगुड़ा में आदिवासियों के 16 घर जला दिए गए। इसमें राशन व घर-गृहस्थी का सामान भी खाक हो गया। भीषण गर्मी में छत छिन जाने से 9 परिवारों के 30 लोग बेघर हो गए, जो एक ही जाति के हैं। इनका आरोप है कि 14 मई की सुबह पास के चिन्नााबोडकेल में मुठभेड़ के बाद वापसी में जवानों ने उनके घर जलाए। फिर 18 मई को सुकमा के 2 जवानों ने आगजनी के लिए नक्सलियों को जिम्मेदार ठहराते हुए चिंतलनार थाने में एफआईआर दर्ज करा दी।

    डीआरजी, एसटीएफ और कोबरा जवानों ने नक्सलियों के बड़े अड्डे माने जाने वाले सुकमा के पूवर्ति इलाके में 96 घंटे का महाभियान चलाया था। इस दौरान रायगुड़ा के 16 घरों को आग लगा दी गई। घटना की पड़ताल के लिए 18 मई को जिला मुख्यालय से 90 किमी दूर नईदुनिया टीम पहुंची। वहां घटना के 4 दिन बाद भी जले हुए घरों से धुआं उठ रहा था। हमें देख पूरा गांव जुट गया। पीड़ित और ग्राम पटेल माडवी मुत्ता ने बताया कि उस दिन दोपहर करीब 2 बजे जवान गांव पहुंचे और ग्रामीणों को खदेड़ दिया। ढाई से चार बजे के बीच दोरला जाति के सोढ़ी धर्मा, सोढ़ी जोगा, वेट्टी भीमा, सोढ़ी कन्नाा, माडवी नरसा, माडवी गणेश, माडवी सरेस व सोढ़ी चिलका सहित 9 परिवारों के घरों को निशाना बनाया। इनमें एक घर खपरैल की छत वाला था औऱ बाकी 15 घास वाले। खौफजदा 37 घरों के लोगों ने पास के भीमारम गांव में दो दिन तक शरण ली। थाने में रिपोर्ट नहीं लिखाई है।

    पीड़ितों के घर बनाने जुटे 4 गांव के 3 सौ ग्रामीण

    फोटो

    घटना के बाद रायगुड़ा, चिन्नााबोडकेल, जब्बागट्टा और पूवर्ति के ग्रामीणों ने बैठक कर नई जगह पीड़ितों को नए मकान बनाकर देने का निर्णय हुआ। मंगलवार से चारों गांव के करीब 3 सौ बच्चे, युवा, महिला, बुजुर्ग मिलकर इस काम में जुटे हुए हैं। पीड़ित परिवारों को दोनों समय का भोजन चारों गांव के ग्रामीण मिलकर करवा रहे हैं।

    और जानें :  # force fire tribals home
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