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    दसवीं बोर्ड के परीक्षा परिणाम ने फिर किया निराश

    Published: Sat, 22 Apr 2017 03:59 AM (IST) | Updated: Sat, 22 Apr 2017 03:59 AM (IST)
    By: Editorial Team

    अंबिकापुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

    छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित 10वीं बोर्ड परीक्षा के परिणाम घोषित कर दिए गए किन्तु एक बार फिर सरगुजा का परिणाम भारी निराशाजनक रहा है। राज्य की प्रावीण्य सूची में एक भी छात्र का नाम नहीं है। सरगुजा ही नहीं संभाग के सूरजपुर, बलरामपुर व कोरिया जिला भी फिसड्डी साबित हुआ है। शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। राशि भी खर्च हो रही है पर सरगुजा क्षेत्र में 10वीं के परिणाम ने लगातार निराश किया है। गत वर्ष भी सरगुजा से कोई छात्र प्रावीण्य सूची तक नहीं पहुंचा था। जिले का परीक्षा परिणाम 55 प्रतिशत रहा जो राज्य में 23वें स्थान पर है। बलरामपुर जिला 24 वां और सूरजपुर 25वें स्थान पर है। इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि संभाग के इन तीनों जिले का शिक्षा का स्तर क्या है।

    सरगुजा जिले में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर लगातार कवायद की जा रही है। बोर्ड की तर्ज पर प्रश्नपत्र तैयार किए जाते हैं और अर्द्घवार्षिक परीक्षाएं आयोजित होती है। जिले में एक साथ बोर्ड की तर्ज पर प्रश्नपत्र तैयार कर अर्द्घवार्षिक परीक्षा आयोजित की गई थी जिसमें लाखों खर्च हुई थी किन्तु इसका परिणाम भी निराशाजनक रहा। अर्द्घवार्षिक परीक्षा के परिणाम में ही 10वीं बोर्ड की वार्षिक परीक्षा परिणाम की स्थिति का आंकलन करा दिया था। जिसका डर था हुआ भी वही। शुक्रवार को राज्य माध्यमिक शिक्षा मंडल ने 10वीं बोर्ड के परिणामों की घोषणा की तो सरगुजा जिला ही नहीं पड़ोस के बलरामपुर, सूरजपुर और कोरिया जिले की स्थिति बेहद चिंताजनक रही। संभाग के इन चारों जिले से एक भी छात्र प्रावीण्य सूची में अपना नाम दर्ज नहीं करा सका। सरगुजा जिले का परीक्षा परिणाम 55.8 प्रतिशत रहा है जो राज्य में 23वें स्थान पर है। बलरामपुर जिले का परिणाम 50.56 प्रतिशत रहा है जो प्रदेश में 24वें स्थान पर है। सूरजपुर जिले का परीक्षा परिणाम भी 50 प्रतिशत के साथ प्रदेश में 25वें स्थान पर रहा जो घोर निराशाजनक है। गत वर्ष भी जिले का परीक्षा परिणाम निराशाजनक रहा था। लगभग 50 प्रतिशत में ही परीक्षा परिणाम सिमट गया था। तब परिणाम सुधारने की बड़ी-बड़ी बातें प्रशासन स्तर पर हुई थी किन्तु सारी कवायद इस बार के परीक्षा परिणाम ने फेल कर दिए हैं। अब शिक्षाविद् भी सरगुजा के परीक्षा परिणाम को लेकर चिंतित हैं। कई तरह के कारण खोजे जा रहे हैं।

    साढ़े 59 हजार ने दी थी परीक्षा, आधे फेल-

    सरगुजा जिले में नियमित, स्वाध्यायी और व्यवसायिक पाठ्यक्रम के तहत कुल 59537 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी थी जिसमें 32571 परीक्षार्थियों को सफलता मिली है। 59495 परीक्षार्थियों के परिणामों की घोषणा की गई है। प्रथम श्रेणी में 5119, द्वितीय श्रेणी में 10422, तृतीय श्रेणी में 16498 परीक्षार्थियों को सफलता मिली है। 532 पास किए गए हैं व 3382 पूरक श्रेणी में आए हैं। हालांकि जिले के कुछ स्कूलों का परीक्षा परिणाम काफी बेहतर बताया जा रहा है। काफी संख्या में बच्चे प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हुए हैं। कुछ शासकीय स्कूलों की काफी दयनीय स्थिति है।

    कमजोर हो रहा है बेस-

    लगातार सरगुजा जिले में 10वीं का परीक्षा परिणाम खराब होने के कई कारण जानकार बता रहे हैं। जानकारों का कहना है कि कक्षा 8वीं तक बच्चों को उत्तीर्ण करने का पैमाना ही शिक्षा की बुनियाद को कमजोर कर रहा है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के मिडिल स्कूलों का शिक्षा स्तर बेहद खराब है। सभी बच्चे उत्तीर्ण होकर कक्षा 9वीं में प्रवेश लेते हैं और आधे फेल हो जाते हैं। किसी तरह 10वीं में पहुंचे बच्चों की हालत बोर्ड परीक्षा से खराब हो जाती है।

    दरिमा स्कूल से 49 में 44 फेल-

    जिले के कई स्कूलों के परिणामों को लेकर चर्चाएं शुरु हो गई हैं। सोशल मीडिया में ऐसे स्कूलों के परीक्षा परिणामों को लेकर लोग मजाक बना रहे हैं। सोशल मीडिया में वायरल हुए दरिमा हायर सेकेण्डरी स्कल से कक्षा 10वीं में कुल 49 परीक्षार्थी शामिल हुए थे जिनमें 44 फेल हो गए हैं। दो परीक्षार्थी द्वितीय श्रेणी व दो परीक्षार्थी तृतीय श्रेणी से उत्तीर्ण हुए हैं व एक परीक्षार्थी पूरक है।

    मल्टी परपज ने बचाई लाज-

    सरगुजा संभाग के सबसे बड़े माडल मल्टीपरपज स्कूल के परीक्षार्थियों ने लाज बचाई है। प्रदेश के प्रावीण्य सूची में भले ही किसी परीक्षार्थी का नाम नहंी है, पर मल्टीपरपज का लगभग 92 प्रतिशत परीक्षा परिणाम ने स्कूल के गौरव को बरकरार रखा है। 10वीं बोर्ड परीक्षा में 151 बच्चे शामिल हुए थे जिनमें 138 बच्चे उर्त्तीण हुए। सर्वाधिक 60 बच्चे प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हुए हैं। 58 बच्चे द्वितीय श्रेणी व 20 बच्चे तृतीय श्रेणी से सफलता प्राप्त की है। गत वर्ष भी स्कूल का परीक्षा परिणाम 90 प्रतिशत था।

    बच्चों को समय पर पाठ्यक्रम का न मिलना, एसईआरटी से पुस्तकों का लेट छपना, शिक्षा के गिरते स्तर का कारण माना जा सकता है। पाठ्यक्रम को न शिक्षक समझ पा रहा है और नही छात्र। जबतक बच्चो के बीच समूह चर्चा नहीं होगी, अलग-अलग विषय पर प्रस्तुतीकरण नहीं होगा, तैयारी नहीं होगी, टीएलएम सामग्री व लगातार एक्टीविटी नहीं होंगे तबतक बोर्ड परीक्षाओं में बेहतर सफलता मिलना मुश्किल है।

    आरके सेंगर

    शिक्षाविद्

    जिले से कोई भी परीक्षार्थी प्रावीण्य सूची में नहीं है, किंतु परिणाम खराब भी नहीं है। अधिकांश बच्चे प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हुए हैं। 10वीं का परिणाम बेहतर हो इसके लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं। भविष्य में और अच्छा करेंगे। निश्चित रूप से बेहतर परिणाम आएंगे।

    संजय गुप्ता

    डीईओ, सरगुजा

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