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    बाल विवाह में सहयोग देने वाला हर व्यक्ति अपराधी

    Published: Sat, 20 May 2017 01:16 AM (IST) | Updated: Sat, 20 May 2017 01:16 AM (IST)
    By: Editorial Team

    जांजगीर-चांपा।नईदुनिया न्यूज। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष व जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में बाल विवाह प्रतिषेध विषय पर विधिक जागरूकता अभियान के तहत बाल विवाह रोकने विधिक जागरूकता प्रदान करने के लिए अधिवक्ताओं का पैनल गठित किया गया है, जिसमें सुश्री शशिकांता राठौर, विशाल तिवारी, योगेश गोपाल, राजेश पाण्डेय, अशोक साहू व शिवकिशोर शर्मा शमिल हैं। अधिवक्ताओं के इस पैनल ने प्राधिकरण की सचिव सुश्री शुभदा गोयल के साथ ग्राम मुनुंद व धनेली में ग्रामीणों को विधिक जानकारी दी।

    विधिक साक्षरता शिविर को संबोधित करते हुए सुश्री शुभदा गोयल ने बताया कि 18 वर्ष से कम आयु की बालिका या 21 वर्ष से कम आयु के बालक का विवाह बाल विवाह है। ऐसा विवाह अपराध की श्रेणी में आता है। बाल विवाह में सहयोग देने वाला हर व्यक्ति अपराधी होता है। बाल विवाह सक्षम न्यायालय में आवेदन देकर शून्य घोषित कराया जा सकता है। बाल विवाह के परिणामस्वरूप उत्पन्न संतान वैध या धर्मज मानी जाती है। बाल विवाह एक सामाजिक कुरूति है, जिसे समाप्त करने हम सभी को आगे आना होगा। बाल विवाह संबंधित कोई भी सूचना मिलने पर हमारा कर्तव्य है कि हम निकटस्थ थाने या महिला बाल विकास विभाग को तत्काल सूचित करें। इसके अलावा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के द्वारा सम्पूर्ण जिले के न्यायालयों में 8 जुलाई को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें न्यायालय में लंबित विभिन्न राजीनामा योग्य प्रकरणों का निराकरण पक्षकारों की सहमति से किया जा सकेगा, इसलिए इस दिशा में भी हम जागरूक हों और स्वयं का या ऐसे किसी व्यक्ति का मामला जो न्यायालय में लंबित है और राजीनामा योग्य है, तो उसे आपसी सहमति के साथ निराकरण के लिए संबंधित न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत करें। पैनल अधिवक्ता सुश्री शशिकांता राठौर ने भी बाल विवाह के दुष्परिणामों पर जानकारी देते हुए बताया कि बालिका या बालक शारीरिक रूप से पूर्ण विकसित नहीं हो पाते हैं, कम उम्र में बाल विवाह करने से उनमें विभिन्न प्रकार की शारीरिक समस्याएं आती है। कम उम्र में मां बनने से मां एवं बच्चे दोनों कमजोर होते हैं। बच्चों में पारिवारिक एवं सामाजिक दायित्वों के निर्वहन की भी परिपक्वता नहीं होती है। ऐसे में उन्हें विवाह के बंधन में बांधकर हम उनका मानसिक शेषण करते हैं। बाल विवाह के कारण उनकी शिक्षा-दीक्षा बाधित होती है। उन्होंने विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा प्रदान की जाने वाली निःशुल्क विधिक सहायता योजना के बारे में भी जानकारी दी। आभार प्रदशन मुनुन्द सरपंच कालिका चरण कश्यप व धनेली सरपंच श्रीमती मिथिलेश राठौर ने किया। कार्यक्रम में विभिन्न बैनरों के माध्यम से जागरूकता संदेश दिया गया और पाम्प्लेट्स वितरित किए गए।

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