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    साथियों ने छीने पैसे तो नेपाल से 6 माह पैदल चलकर घर पहुंचा तीर्थयात्री

    Published: Mon, 15 May 2017 03:59 AM (IST) | Updated: Mon, 15 May 2017 09:19 AM (IST)
    By: Editorial Team
    gulab say 2017515 91942 15 05 2017

    कोतबा। तीर्थयात्रा के लिए नेपाल पहुंचा युवक गुलाब साय साथियों के साथ विवाद होने पर नेपाल से विभिन्न रास्तों में होते हुए लगभग 5 हजार किलोमीटर पैदल चलकर वापस आया। नेपाल से पैदल चलकर वापस कोतबा पहुंचने में युवक को पूरे 6 माह लगे।

    13 अक्टुबर को कुनकुरी निवासी संजीत पांडे के नेतृत्व में कोतबा सहित आसपास के क्षेत्रों से लगभग 60 तीर्थयात्रियों का दल रवाना हुआ जो नालंदा, पटना होते हुए नेपाल पहुंचा था। नेपाल में मंदिरों के भ्रमण में एक यात्री का पैसा चोरी हो गया।

    चोरी का आरोप कोतबा निवासी गुलाब साय उर्फ गुला पैंकरा (45) के उपर लगा और सभी ने गुलाब साय के को पैसा लौटाने के लिए दबाव बनाया। गुलाब साय ने बताया कि वह 6 हजार रुपए लेकर घर से निकला था और दबाव होने पर कुछ पैसे रखकर उसने सारे पैसे दल के सदस्यों को दे दिए।

    पैसे देने के बाद भी साथियों ने गुलाब साय को 17 अक्टुबर 2016 की रात धमकाया और कहा कि सुबह उसकी पिटाई होगी। डर से गुलाब साय पूरी रात नहीं सोया और तड़के लगभग चार बजे साथी यात्रियों को नींद में देख वह धर्मशाला से भाग निकला।

    गुलाब साय उस दिन पूरे रात भर जंगल में बिताया और सुबह बचे पैसों के माध्यम से एक बस में बैठा। रास्ते में एक ढाबे में जब बस रूकी तो कुछ बदमाश उसके सामान और पैसे के लिए उस पर हमला कर दिए। बदमाशों ने उसके पास रखे बचे पैसे भी लूट दिए और चाकू से उस पर हमला भी कर दिया। इसके बाद गुलाब साय डर कर फिर जंगलों की ओर भाग निकला और भागता रहा।

    सबसे खुद को बचाता हुआ गुलाब साय पूरी रात जंगलों के माध्यम से सफर करता और दिन में आसपास के बस्ती में भोजन की तलाश के लिए जाता। गुलाब छत्तीसगढ़ी और सादरी बोली ही बोलता था, जिससे लोग उसकी भाषा पूरी तरह नहीं समझते।

    लगभग ढाई माह तक जंगलों के किनारे-किनारे गुलाब साय पैदल घर आने की जिद लिए चलता रहा, लेकिन गुलाब को किसी प्रकार मदद नहीं नहीं मिल सकी और उसकी स्थिति पागलों के समान हो गई। इधर जब तीर्थ यात्री दल गांव लौटा और गुलाब साय वापस नहीं आया तो परिवार के लोग काफी परेशान हुए।

    गुलाब साय की पत्नी तीर्थयात्रियों सहित ले जाने वाले संजीत पांडे से मुलाकात की तो उसे बताया गया कि वह रास्ते में पागल होकर भाग गया। संजीत पांडे के द्वारा कोतबा पुलिस चौकी में गुलाब साय के गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।

    ढाई माह बाद पहुंचा कानपुर

    जंगलों सहित विभिन्न शहरों में होते हुए जब गुलाब साय ढाई माह बाद कानपुर पहुंचा तो उसे भारत में होने का एहसास हुआ। उसने कानपुर का नाम सुना था और उम्मीद जगी कि वह अपने घर पहुंच सकता है। यहां से जब वह छत्तीसगढ़ जाने की उम्मीद लिए बढ़ा तो वह राजस्थान पहुंच गया।

    इसी प्रकार विभिन्न रास्ते में भटकते हुए वह गुजरात पहुंच गया। गुजरात से वह भोपाल फिर जबलपुर होते हुए वह चंद्रपुर (रायगढ़) पहुंचा। चंद्रपुर में उसने लोगों से मदद मांगा और पैसे लेकर रायगढ़ पहुंचा।

    रायगढ़ के एक बस में यह कहकर कोतबा पहुंचा कि वह कोतबा पहुंचकर पैसे दे देगा। कोतबा बस स्टैंड में पहुंचते ही उसे कई लोगों ने पहचान लिया और तत्काल पैसे लेकर कंडक्टर को देते हुए जब वह शनिवार शाम घर पहुंचा तो घर वालों की खुशी का ठिकाना नहीं था।

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