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    बाल्को-नाबार्ड की योजनाओं से कृषि को नया आयाम

    Published: Sun, 13 Aug 2017 04:03 AM (IST) | Updated: Sun, 13 Aug 2017 04:03 AM (IST)
    By: Editorial Team

    कोरबा। जनजातियों को आजीविका के नए संसाधन मुहैया कराने के उद्देश्य से भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बाल्को) एवं नेशनल बैंक ऑफ एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) ने जनजातीय विकास कार्यक्रम संचालित किया है। यह परियोजना बाड़ी परियोजना के नाम से जानी जाती है।

    इसके अलावा ग्राम परसाखोला, सरईपाली, भटगांव और रूगबहरी में परियोजना संचालित की जा चुकी है। वर्ष 2008 से वर्ष 2014 तक 1499 हेक्टेयर भूमि परियोजना के दायरे में शामिल की गई। स्वयंसेवी संगठन स्त्रोत ने परियोजना का क्रियान्वयन किया। परियोजना के दायरे में शामिल गांवों में नए मेढ़ों का निर्माण, कंटूर खंती, जल अवशोषक खंती, डायसर्वन कैनाल और डबरियों का निर्माण किया गया। स्व-सहायता समूहों को कौशल उन्नयन प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षित समूहों को मुर्गी पालन, मशरूम उत्पादन, डिटर्जेंट पाउडर निर्माण आदि कार्यों में संलग्न किया गया। पांच वर्षों में लक्षित क्षेत्रों के किसानों के फसल उत्पादन में लगभग 30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। खेती का रकबा बढ़ गया। 90 फीसदी किसान रोपा पद्धति से खेती करने लगे हैं। परियोजना क्रियान्वयन से पूर्व ग्राम भटगांव के किसान सब्जी का उत्पादन नहीं करते थे। अब पांच वर्ष के बाद भटगांव से प्रतिदिन औसतन 300 किलोग्राम सब्जी का उत्पादन होने लगा है। ग्राम भटगांव के 30 किसान ड्रिप पद्धति से खेती करते हैं। यहां के किसानों ने नव किसान बहुउद्देशीय सहकारी समिति का गठन किया है। इस समिति से आसपास के 10 गांवों के 1000 किसानों को जोड़ने की योजना है। इसके माध्यम से किसानों को सबसिडी दरों पर उच्च गुणवत्ता के खाद और बीज पाने में आसानी होगी। उन्हें विभिन्न एजेंसियों के जरिए खेती की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण भी मिल सकेगा।

    बाक्स

    योजना पर एक नजर

    0बाल्को और नाबार्ड की ओर से जनजातीय विकास के क्षेत्र में लगभग दस वर्षों से कार्य जारी है।

    0परियोजना के दायरे में मुख्य रूप से कबीरधाम के बोड़ला विकासखंड के 500 और सरगुजा जिले के मैनपाट विकासखंड के 250 जनजातीय परिवार शामिल हैं।

    0परियोजना के अंतर्गत लक्षित परिवारों की परती और अनुपजाऊ जमीन पर भूमि का विकास कर फलदार पौधे रोपे जाते हैं।

    0मृदा उपचार एवं जमीन सिंचित करने के लिए संसाधनों में बढ़ोतरी के लिए जनजातीय परिवारों को मदद दी जाती है।

    0महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से स्व-सहायता समूहों के गठन को प्रोत्साहित किया जा रहा।

    0स्वयंसेवी संगठन एमएसएसवीपी परियोजना क्रियान्वयन एजेंसी है।

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    वाटरशेड परियोजना

    पर्यावरण संरक्षण-संवर्धन, हरियाली विकास और सिंचित क्षेत्र के रकबे में वृद्धि के लिए बाल्को ने नाबार्ड के सहयोग से कोरबा जिले के ग्राम सोनगुढ़ा, औंराकछार और दोंदरो की 1700 एकड़ भूमि पर वाटरशेड परियोजना संचालित की है। परियोजना पांच वर्षों तक संचालित की जाएगी।

    और जानें :  # balko nabard ki
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