Naidunia
    Sunday, October 22, 2017
    PreviousNext

    बालिका गृह का मायका छोड़ विदा हुई 'सोना'

    Published: Mon, 04 Jul 2016 04:03 AM (IST) | Updated: Mon, 04 Jul 2016 04:50 PM (IST)
    By: Editorial Team
    orphaned girl 201674 115140 04 07 2016

    कोरबा, नईदुनिया न्यूज। बालिका गृह में रह रही सोना का दामन खुशियों से भर गया। कल तक दुनिया में अकेले संघर्ष को विवश इस युवती को उसका जीवनसाथी मिल गया। प्रशासन ने बाबुल का फर्ज निभाया और योग्य वर की तलाश पूरी कर रिश्ता तय किया गया। रविवार को मड़वारानी के राम मंदिर में दोनों परिणय सूत्र में बंधे।

    इस शुभ मौके पर मौजूद रही महिला एवं बाल विकास विभाग की डीपीओ व आश्रम अधीक्षिका समेत कई गणमान्य उनके नए जीवन की शुरूआत के साक्षी बने। बीकॉम कर चुके एक युवा व्यवसायी ने बेसहारा सोना का हाथ थामकर समाज में एक मिसाल पेश की है।

    कुछ रुपए के लालच में सौतेली मां ने बांगो में रहने वाली सोना (18) को एक अंजान परिवार के हवाले करीब चार साल पहले कर दिया था। एक बंधुआ नौकरानी की जिंदगी जी रही इस किशोरी ने कभी सपने में भी नहीं सोचा रहा होगा कि एक दिन ऐसा भी आएगा, जब उसका घर बसेगा।

    बचपन में ही सोना के सिर से माता-पिता का साया उठ गया। जिस उम्र में पढ़-लिखकर सपनों को उड़ान भरने पंख की जरूरत होती है, उस वक्त उसे स्कूल जाने का भी मौका नहीं मिला। छोटी सी उम्र में आई ढेरों मुश्किलों में घिरी सोना के चेहरे से गायब मुस्कुराहट जिला प्रशासन की पहल और बालिका आश्रय गृह के प्रयास से वापस लौट आई।

    बमुश्किल अपना नाम लिख पाने में सक्षम सोना का रिश्ता बलौदाबाजार के बीकॉम पास युवा व्यावसायी विश्वेष जालान से तय हुआ। विभाग की देख-रेख में दोनों पक्षों, सोना और विश्वेष की मुलाकात कराई गई। एक ही मुलाकात में न सिर्फ सोना, बल्कि विश्वेष ने भी एक-दूसरे के मन को समझ लिया और जीवनभर एक दूसरे का साथ निभाने का वादा कर लिया।

    रविवार को महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती रेणु प्रकाश व बालिका आश्रय गृह कोरबा की अधीक्षिका श्रीमती रुकमणी नायर की मौजूदगी में सोना और विश्वेष का विवाह विधि विधान से कराया गया। इस दौरान जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी आदित्य शर्मा, संरक्षण अधिकारी संस्थागत रवि सिंह, संरक्षण अधिकारी गैर संस्थागत श्रीमती दीपमाला सिंह, बालिका गृह की संचालिका श्रीमती रूकमणी नायर, सामाजिक कार्यकर्ता आलोक पांडेय, मनोज पटेल, सम्मेसिंह कंवर व लेखापाल शैलेंद्र सिंह समेत अन्य उपस्थित रहे।

    सोशल इन्वेस्टिगेशन के बाद स्वीकृति

    करीब आठ माह तक बालिका आश्रय गृह में रह रही सोना की जिंदगी के लिए सही रास्ते का चयन अनिवार्य था। इस बात को ध्यान में रखते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग व बालिका गृह, दोनों की ओर से लगातार एक अच्छे वर की तलाश की जा रही थी। एक अच्छे रिश्ते की बात शुरू हुई और सोना की रजामंदी के साथ सामाजिक दृष्टिकोण से जरूरी हर पहलू पर इन्वेस्टिगेट किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों से सामने आए रिश्ते पर अंतिम निर्णय से पहले सामाजिक जांच कराई गई। पारिवारिक बैकग्राउंड से लेकर संवैधानिक औपचारिकताओं को पूरा किया गया। वर का चरित्र प्रमाणपत्र, सामाजिक जांच रिपोर्ट और सोना की सहमति के बाद शादी की अनुमति मिली। बीकॉम तक पढ़े विश्वेष बलौदाबाजार में एक व्यावसायी हैं।

    बांगो से दिल्ली तक का सफर

    किसी अपने के नाम पर पूरी दुनिया में उसकी सौतेली मां ही थी, जिसने चंद पैसों के लिए उसे एक अंजान शहर में अंजान परिवार के हवाले कर दिया। सोना मूलतः जिले के पोड़ी-उपरोड़ा में ग्राम बांगो की रहने वाली है, जहां से शुरू हुए उसके छोटे से जीवन में इतने उतार-चढ़ाव आए कि खुशियों का इंतजार करना भी बेमानी लगने लगा था। दिल्ली के एक परिवार के साथ रह रही सोना को दिन-रात घर का काम करने के बाद भी भर पेट खाना भी नसीब न होता। किसी तरह उसने हिम्मत जुटाई और वहां से भागकर कानपुर और फिर भोपाल आ गई। ट्रेन में मिले एक भले मुसाफिर की मदद से चाइल्ड लाइन को संपर्क किया। कुछ दिन वह बालिका गृह भोपाल रही और अंततः चाइल्ड लाइन कोरबा की मदद से आखिरकार वह बालिका आश्रय गृह कोरबा आई।

    सहमति के बाद वर की तलाश

    कई मुश्किलों से जूझकर बालिका गृह पहुंची सोना पिछले आठ माह से यहां रह रही थी। उसकी सहमति के बाद शादी के लिए एक अच्छे वर की तलाश की गई। खासकर बालिका गृह के सतत प्रयास से बलौदाबाजार में अच्छा परिवार मिला। सीडब्ल्यूसी की अनुमति से सामाजिक जांच व दोनों पक्ष की काउंसिलिंग कराई गई। सभी बिंदुओं पर खरा उतरने के बाद रविवार को मड़वारानी में विधि-विधान से सोना का विवाह बलौदाबाजार के विश्वेष से कराया गया। यह विवाह एक मिसाल है, जो समाज के अन्य वर्ग को प्रेरित करेगा, ऐसी उम्मीद है।

    - आदित्य शर्मा, महिला एवं बाल विकास अधिकारी

    हमने निभाई जवाबदारी

    मुश्किलों से लौटी बालिकाओं को प्रशिक्षण, बेहतर शिक्षा, पोषण समेत शासन की कल्याणकारी योजनाओं से जोड़कर समाज की मुख्यधारा में लाना और अपने पैरों में खड़े होने के काबिल बनाना विभाग की पहली जिम्मेदारी है। इसके बाद विवाह योग्य होने पर उनके लिए एक अच्छा परिवार व योग्य वर का चयन कर उसकी सहमति के साथ नए जीवन की शुरूआत करने में मदद करना भी हमारी की जवाबदारी है। रविवार को हुई सोना की शादी एक ऐसा ही उदाहरण है, जो समाज के लिए एक मिसाल है।

    - रेणु प्रकाश, डीपीओ, आईसीडीएस

    प्रतिक्रिया दें
    English Hindi Characters remaining


    या निम्न जानकारी पूर्ण करें
    नाम*
    ईमेल*
    Word Verification:*
    Please answer this simple math question.
    +=

      जरूर पढ़ें