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    परिजन रूठे तो ग्रामीणों ने निभाया बाबुल का फर्ज

    Published: Mon, 17 Apr 2017 12:36 AM (IST) | Updated: Mon, 17 Apr 2017 04:29 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    करतला। एक साल पहले ही उसकी मां चल बसी थी। मां के जाने के बाद जिम्मेदारी के डर से पिता और भाई ने भी साथ छोड़ दिया। अब इस बेसहारा बेटी को अपना कहने वाला और कोई नहीं था। इस बिनब्याही युवती की चिंता को अपने कंधे की डोली बनाने ग्रामीण एकजुट हुए और बाबुल का फर्ज निभाते हुए एक अच्छे वर का चुनाव कर शादी भी कराई। परिजनों का साथ छूट जाने के बाद आर्थिक तंगी से जूझ रही कन्या का चंदा एकत्र कर कन्यादान किया और धूमधाम से पिया के घर विदा किया गया। विदाई की शुभ घड़ी में खुशी के आंसू साझा करने पूरा गांव पहुंचा था।

    मानवता की मिसाल पेश करता यह उदाहरण करतला विकासखंड के ग्राम सुखरीकला का है। यहां रहने वाली मोनिका वैष्णव की शादी में उसके परिजन मौजूद नहीं थे। मां की मौत एक वर्ष पूर्व हो चुकी थी। उसके जाने के बाद पिता व भाई का साथ भी छूट गया। अब इस बालिग बेटी को उसके विवाह की चिंता ग्रामीणों को सताने लगी। ग्रामीणों ने बेटी के लिए रिश्ता ढूंढ़ना शुरू किया। ग्राम पासिद में रहने वाले सुरजीत वैष्णव ने मोनिका का हाथ थामने सहमति दी। 9 अप्रैल को मोनिका और सुरजीत की शुभ मुहूर्त में विधि-विधान के साथ विवाह संपन्न कराया गया। शादी की संपूर्ण तैयारी से लेकर सभी प्रकार के खर्च की जिम्मेदारी ग्रामीणों ने उठाई। मोनिका को गांव की बेटी बनाकर पिया के घर विदा करने सारा गांव पहुंचा था और विदाई की शुभ घड़ी में खुशी के आंसू भी साझा किए।

    धन-सामान का यथाशक्ति योगदान

    इस विवाह के लिए ग्रामीणों ने अपनी स्वेच्छा के अनुसार सामग्री की व्यवस्था की। अपनी-अपनी क्षमता के अनुरूप संस्कारों पर होने वाले व्यय के लिए धन और दाम्पत्य जीवन में काम आने वाले सामान भी उपलब्ध कराए गए। आज के दौर में अक्सर देखा जाता है कि पड़ोसी भी एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल होने का वक्त नहीं निकाल पाते। ऐसे में एक पराई बेटी को अपना मानकर न केवल शादी कराई गई, यथाशक्ति उसका जीवन सुखद बनाने प्रयास भी किया गया। ग्राम सुखरीकला के ग्रामीणों का यह उदाहरण दूसरों के लिए किसी मिसाल से कम नहीं।

    जनपद अध्यक्ष ने भी किया प्रोत्साहित

    इस बात की जानकारी करतला जनपद अध्यक्ष श्रीमती धनेश्वरी कंवर को भी मिली। इस पुण्य कार्य में अपना योगदान शामिल करते हुए उन्होंने भी यथासंभव आर्थिक मदद प्रदान की। खुद आगे बढ़ने के साथ उन्होंने ग्रामीणों को भी विवाह के लिए यथासंभव सहायता करने प्रेरित किया। इस कार्य में ग्राम पंचायत सरपंच, उपसरपंच, पंच समेत समस्त ग्रामीणों ने सहभागिता निभाई। ग्रामीणों की इस सोच और सहभागिता से समाज को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद की जा रही है।

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