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    कृष्ण की लीलाओं का है आध्यात्मिक पक्ष

    Published: Tue, 20 Jun 2017 10:27 PM (IST) | Updated: Tue, 20 Jun 2017 10:27 PM (IST)
    By: Editorial Team

    पᆬोटोः20जानपी 20

    डबरामठ में भागवत कथा

    अकलतरा। नईदुनिया न्यूज। भगवान श्री कृष्ण ने बाल्यकाल से ही अपने पराक्रम से प्रजा को अचम्भित किया उक्त बातें ग्राम कोटमीसोनार में रामजानकी डबरामठ में श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन भगवान श्री कृष्ण की बाल्यकाल की कथा का वर्णन करते हुए पं. रामकृष्ण तिवारी ने कही।

    उन्होंने आगे बताया कि भगवान श्रीकृष्ण के धरती में जन्म लेते ही भगवान कृष्ण द्वारा बाल्य अवस्था में ही कई लीलायें की गई। भगवान मात्र छः दिन के थे, चतुर्दशी के दिन पुतना आई। भगवान तीन माह के हुए तो करवट उत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा था। इसी बीच भाकटासुर राक्षस आया। भगवान श्री कृष्ण की बाल लीला एवं पराक्रम देखकर राक्षस भी भगवान के सामने नतमस्तक हो गया। भगवान श्रीकृष्ण की प्रत्येक लीला दिव्य है एवं हर लीला का आध्यात्मिक पक्ष है। चीरहरण प्रसंग के साथ-साथ कथा व्यास ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव एवं बाल्य काल की अन्य लीलाओं से अवगत कराया। रामजानकी डबरामठ में श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। डबरामठ के महन्त सर्वेश्वर दास महाराज द्वारा कृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर छप्पन भोग लगाया गया। श्रीमद् भागवत कथा आयोजन स्थल पर प्रतिदिन क्षेत्रवासियों की भीड़ उमड़ रही है। श्रद्धालुओं द्वारा संगीत के साथ श्रीमद् भागवत कथा का आनंद लिया जा रहा है। आज की कथा में गोबिन्द दास, जगराम दास, हीरालाल सोनी, लखन लाल थवाईत, रतिराम पटेल, गोलू थवाईत, किश्नु पाण्डेय, रोहित बैष्णव, संतराम यादव, राजेश दुबे, सुरेश तम्बोली, लक्ष्मीकांत सोनी, रमाद्यांकर सोनी एवं भक्तगण बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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