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    स्वेच्छानुदान के लिए पूर्व राज्यमंत्री से प्रमाण पत्र लेना अब जरूरी नहीं

    Published: Fri, 19 May 2017 11:19 PM (IST) | Updated: Fri, 19 May 2017 11:19 PM (IST)
    By: Editorial Team

    महासमुंद। नईदुनिया प्रतिनिधि

    मंत्रियों के स्वेच्छानुदान या जनसंपर्क निधि से लाभान्वित होने वाले हितग्राहियों को अब पूर्व राज्यमंत्री से पहचान का प्रमाण-पत्र लेने की जरूरत नहीं है। हितग्राहियों को अब उनके आईडी प्रूफ के आधार पर जनपद पंचायत कार्यालय से चेक जारी किया जाएगा। यह जानकारी सीईओ जनपद पंचायत अंकिता गर्ग ने दी।

    नईदुनिया में 19 मई को 'स्वेच्छानुदान चाहिए तो लाओ पूर्व राज्यमंत्री का प्रमाण-पत्र' शीर्षक से प्रकाशित समाचार पर संज्ञान लेकर सीईओ ने 19 मई को दस्तावेजों का अवलोकन किया। नियमावली खंगाला और वरिष्ठ अधिकारियों से मार्गदर्शन लेने के बाद यह स्पष्ट किया कि अब से स्वेच्छानुदान प्राप्त करने वाले हितग्राहियों को पूर्व राज्यमंत्री से प्रमाण पत्र लाने की बाध्यता नहीं होगी। उनके प्रमाण पत्र के बगैर ही लोगों को सक्षम सरकारी कार्यालय से जारी पहचान पत्र के आधार पर स्वेच्छानुदान के चेक दिए जाएंगे।

    13 साल से चल रही थी व्यवस्था

    वर्ष 2004 में प्रदेश में पहली बार भाजपा की सरकार बनी। तब महासमुंद से पूनम चंद्राकर विधायक बने। भाजपा सरकार में उन्हें राज्यमंत्री बनाया गया। इसी समय से जनपद में स्वेच्छानुदान के लिए हितग्राहियों से इनके प्रमाण-पत्र लेने की व्यवस्था शुरू हुई। राज्यमंत्री और बाद में संसदीय सचिव रहते हुए पूनम चंद्राकर ने बहुत से लोगों को स्वेच्छानुदान, जनसंपर्क निधि से लाभान्वित किया। लिहाजा उनके द्वारा जिन हितग्राहियों के लिए राशि जारी की जाती रही, महासमुंद जनपद उन्हीं से इनकी पहचान का प्रमाण-पत्र लेता रहा। 2008 के चुनाव में उन्हें टिकट नहीं मिली। कांग्रेस से अग्नि चंद्राकर विधायक बने। लेकिन सरकार भाजपा की बनी । लिहाजा इस मसले पर कभी गौर नहीं किया गया। उनका प्रमाण पत्र तब भी लिया जाता रहा। 2013 के चुनाव में क्षेत्र से निर्दलीय विधायक डा विमल चोपड़ा चुने गए। तीसरी बार भी सरकार भाजपा की है। लिहाजा अब तक यह मामला कभी सामने नहीं आया।

    नेताओं के अहम टकराने से सामने आया मामला

    यह मामला सत्ता-संगठन के नेताओं के अहम टकराने से सामने आया। दरअसल, अब तक विभिन्न नेताओं के जरिए लोगों को मंत्रियों से स्वेच्छानुदान दिलाने में कई नेता आगे रहे। उनके लोगों को जब यह राशि जारी की गई, तब भी जनपद के कर्मचारी पूर्व राज्यमंत्री का प्रमाण-पत्र की मांग करने लगे। यह संगठन के अन्य पदाधिकारियों को नागवार लगा। जानकारी अनुसार बीते दिन जनपद सीईओ कार्यालय में नेताओं ने इस पर एतराज जताया और कहा कि जो संगठन के पदाधिकारी हैं, उनका भी लेटरपेड मान्य किया जाए।

    वर्जन..

    नियमावली में ऐसा कहीं भी उल्लेख नहीं है, जिसमें स्वेच्छानुदान का चेक जारी करने के लिए पूर्व राज्यमंत्री का लेटरपेड अनिवार्य रूप से लिया जाए। सभी दस्तावेजों का मैने निरीक्षण किया है, और अब से इस तरह के लेटरपेड की अनिवार्यता समाप्त की जाती है। चेक देने के लिए हितग्राही का आईडी प्रूफ ही पर्याप्त है।

    - अंकिता गर्ग, सीईओ जनपद पंचायत

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