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    बारिश नहीं, खेतों में पड़ रही दरारें

    Published: Sun, 13 Aug 2017 03:50 AM (IST) | Updated: Sun, 13 Aug 2017 03:50 AM (IST)
    By: Editorial Team

    बागबाहरा। नईदुनिया न्यूज

    अंचल में खंड वर्षा का सिलसिला जारी है। कहीं झमाझम बारिश हो रही है, तो कहीं सिर्फ बूंदाबांदी। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। पर्याप्त बारिश नहीं होने से धान की फसल पर खतरा मंडराने लगी है। पानी के अभाव में फसल का विकास रुक गया है। रोपाई वाले खेतों में दरारें पड़ गई है। बारिश नहीं होने से कृषि कार्य थम सा गया है। सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच गई है। किसी तरह किसान अपनी धान फसल को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। सावन में पर्याप्त बारिश नहीं होने से अभी भी धान फसल पर खतरा मंडरा रही है। किसानों को बूंदाबांदी से ही संतोष करना पड़ रहा है।

    कर्ज लेकर कर रहे हैं किसानी

    किसान खेती-किसानी कार्य के लिए साहूकारों, सोसाइटियों और अन्य जगहों से कर्ज लेकर हजारों रुपए लगा चुके हैं। बारिश नहीं होने से किसानों के खेतों में लगे धान की फसल पीला पड़ गई है। पानी के अभाव में धान फसल मुरझाकर मरने लगी है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। खेत सूखे, किसानों में निराशा

    इधर, मौसम की बेरूखी से किसान हताश और परेशान हैं। पहले ही खेतों में धान की बोआई कर चुके किसानों को चिंता सताए जा रही है कि फसल पककर तैयार होगी या नहीं। यदि पर्याप्त बारिश न हो तो फसल बर्बाद होते देर नहीं लगती। सिंचाई सुविधा संपन्न किसानों के खेतों को छोड़ इन दिनों अंचल के कई खेतों में दरारें आ गई हैं।

    बारिश के इस मौसम में गर्मी के मौसम की तरह तेज धूप पड़ रही है। जिससे धान के पौधे सूखकर लाल हो गए हैं। खेतों में दरारें पड़ने लगी है।फसल की स्थिति देखकर किसान रुआसे हो गए हैं।

    इस संबंध में कृषक दिनेश चंद्राकर का कहना है कि पर्याप्त बारिश नहीं होने से क्षेत्र में रोपा, बियासी का कार्य पूरा नहीं हुआ है। जिन किसानों के खेतों में रोपा, बियासी हुआ है, ऐसे किसानों के फसल पानी के अभाव में पीला पड़कर मुरझाकर मरने लगा है।

    किसान तेजन चंद्राकर बंसुलाडबरी ने कहा कि बारिश नहीं होने और लगातार मोटरपंप चलने से भू-जलस्तर भी नीचे चला गया है। किसानों के पास सिंचाई के लिए कोई सुविधा नहीं है। स्थिति को देखते हुए शासन क्षेत्र को सूखाग्रस्त घोषित कर किसानों का ऋण माफ करें। मजदूर व प्रभावित किसानों को रोजगार देने राहत कार्य प्रारम्भ की जानी चाहिए।

    राकेश साहू कसेकेरा का कहना है कि सावन माह बीतने के बाद भी पर्याप्त बारिश नहीं हो पाई है, जिसके कारण खेतों में लगी खरीफ धान फसल प्रभावित हो रही है। जिन किसानों के खेत में मोटरपंप की सुविधा है, वे ही रोपाई, बियासी और निंदाई कर रहे हैं। बोर की सुविधा नहीं होने पर अनेक किसान बादलों के बरसने का इंतजार कर रहे हैं।

    प्रेमसिंह ठाकुर धौराभाठा का कहना है कि गांवों में धान फसल की स्थिति काफी खराब है। सिंचाई पानी के अभाव में पौधों का विकास रुक गया है। खेतों में पानी नहीं होने से धान के पौधे सूखकर लाल व पीले होने लगे हैं। जमीन में दरारें पड़ रही है।

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