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    धान बेचने बनाए नियमों से किसान उलझन में

    Published: Wed, 15 Nov 2017 07:46 PM (IST) | Updated: Wed, 15 Nov 2017 07:46 PM (IST)
    By: Editorial Team

    00 किसानों ने कहा 50-50 फीसदी नए-पुराने बारदाना का नियम अव्यवहारिक ।

    00 किसानों को करना पड़ रहा अतिरिक्त खर्च ।

    फोटो 15 एमएसएमडी 27

    फोटो कैप्शन-खरीदी केंद्र में धान को बारदाना में भरती हुई महिला मजदूर ।

    महासमुंद । नईदुनिया प्रतिनिधि

    धान बेचने के लिए बनाए नियमों से किसानों में उलझन हैं। बुधवार 15 नवंबर से जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू हो गई है। एक दिन पहले ही किसानों को टोकन मिला। लिहाजा टोकन के अनुसार बुधवार सुबह से ही किसान अपने-अपने साधन से धान लेकर खरीदी केंद्र पहुंचे। टोकन अनुसार किसानों को अपरान्ह 1 बजे तक खरीदी केंद्र तक पहुंचना था। किसान समय पूर्व ही पहुंच चुके थे। यहां वाहनों से धान खाली किया गया। टोकन अनुसार किसानों को 50-50 फिसदी नए व पुराने बारदाने दिए गए। हमालों ने खाली किए गए धान बारदानों में डाला। बाद 40-40 किलो प्रति बारदाने की तौलाई की गई। तौलाई के बाद सरना किस्म के धान लाल रंग, मोटा धान काला रंग व पतला धान हरा रंग के रस्सी से बांधे गए। किसानों ने जितनी मात्रा में धान बेचने का टोकन लिया था, पट्टे में जगह होने के बाद भी टोकन के अनुरूप मात्रा में ही उनके धान लिए गए। कई किसानों को धान लेकर वापस जाना पड़ा, वहीं कई किसानों को नए-पुराने बारदाना समान मात्रा में लेने के चलते असुविधा हुई। बारदाना व्यवस्था, अधिकत्तम तीन बार में धान बेचने के नियम को लेकर किसानों ने नाराजगी जताई।

    4 हजार कट्टा से अधिक भी काटे जा सकते हैं टोकन

    पिटियाझर धान खरीदी केंद्र के व्यवस्थापक रमेश सिन्हा ने बताया कि व्यवस्था खरीदी केंद्र में व्यवस्था के मद्देनजर 24 घंटा पहले 4 हजार कट्टा, 1600 क्विंटल धान खरीदी का ही टोकन दिया जा रहा है, व्यवहारिकता में 5-7 कट्टा बढ़ने पर भी टोकन दिया जा रहा है।

    एक एकड़ वालों से 14.40 क्विंटल ही खरीदा जा रहा धान

    नए-पुराने बारदाने के नियम के चलते एक एकड़ वाले किसानों से 36 बारदानों में 14.40 क्विंटल ही धान खरीदा जा रहा है। ऐसे किसानों को 60 किलो धान घर वापस ले जाना पड़ रहा। किसानों को बारदानों की सम संख्या पर ही धान बेचने की विवषता है।

    बोरा भराई का खर्च किसान वहन कर रहे

    किसानों के द्वारा खरीदी केंद्र तक लाए गए धान की भराई का खर्च किसानों को वहन करना पड़ रहा है। हमाल प्रति बोरा 1 या 2 रूपए किसानों से ले रहे हैं। टोकन से अधिक धान लाए जाने पर या बारदाना सम नहीं होने पर किसानों को परिवहन का अतिरिक्त भार पड़ रहा है।

    फोटो-भरत चंद्राकर अरंड

    किसान को हो रहा नुकसान

    अरंड निवासी किसान भरत चंद्राकर ने बताया कि सम संख्या में नया व पुराना बारदाना देने का नियम अव्यवहारिक है। किसान अपने घर से धान तौलकर नहीं लाते। अंदाज में टोकन कटाया जाता है। मालवाहक की क्षमता पर भी परिवहन में धान घटता-बढ़ता है। धान की पूरी तौलाई होने के बाद यदि एक बारदाना अतिरिक्त हो जाए तो इसे खरीदने का विकल्प नहीं है। किसान को यह बारदाना घर लेकर जाने या फिर पट्टे की क्षमता अनुरूप अतिरिक्त धान लाकर बेचने की मजबूरी है। किसानों को इस नियम से दिक्कतें हैं। वाहन भाड़े के नुकसान की पूरी आशंका है।

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    फोटो- हेमंत चंद्राकर

    तीन बार में बेचने का नियम बंद हो

    पिटियाझर निवासी हेमंत चंद्राकर का कहना है कि सरकार ने 15 नवंबर से 31 जनवरी तक खरीदी प्रारंभ की है, तो फिर इसमें तीन बार में ही धान बेचने की बाध्यता क्यों है। किसान अपने पट्टे और पंजीयन के मुताबिक कभी भी टोकन लेकर धान बेचे, इसमें तीन बार में ही धान बेचने की नीति खत्म होनी चाहिए।

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    फोटो- बसंत चंद्राकर

    हर वैरायटी के लिए टोकन

    पिटियाझर के किसान बसंत चंद्राकर ने बताया कि पतला, मोटा, सरना वैरायटी की अनुमानित मात्रा बताकर किसानों को टोकन लेना पड़ रहा है। यहीं धान किसानों को बेचना है। टोकन में यदि 100 क्विंटल लिखा है और किसान इससे अधिक धान ले आए तो टोकन से अधिक खरीदी नहीं की जा रही है। जबकि टोकन से कम लाने पर खरीदी हो रही है। इससे किसानों की उलझने बढ़ी है। सरकार को इन नियमों को सरलीकृत करना चाहिए, जिससे किसान आसानी से अपना धान बेंच सके।

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