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    मजदूरी से मिले पैसों से की पढ़ाई और आ गया मेरिट लिस्ट में

    Published: Fri, 21 Apr 2017 10:32 PM (IST) | Updated: Sat, 22 Apr 2017 08:21 AM (IST)
    By: Editorial Team
    satishji 21 04 2017

    आनंद साहू, महासमुंद । जिला मुख्यालय से करीब 50 किमी दूर छोटा सा गांव है भटगांव (देवरी)। यहां के एक मजदूर के बेटे ने खुद भी गर्मी की छुट्टियों में मजदूरी किया। मजदूरी से मिलने वाले स्र्पए से पुस्तक-कॉपी और अन्य पाठ्य सामग्री जुटाया और निरंतर स्वअध्ययन से वह कर दिखाया जो सुविधाओं के बीच कान्वेंट में पढ़ने वाले बच्चे भी नहीं कर सके।

    दसवीं बोर्ड के टाप टेन में आठवां स्थान अर्जित कर सतीश यादव ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी परिचय के मोहताज नहीं होते हैं । घर की माली हालत ठीक नहीं होने के बावजूद सतीश ने हार नहीं माना। माता देवकी यादव और पिता रामकुमार यादव रोजी रोटी की तलाश में हर साल पलायन कर उप्र चले जाते हैं।

    इसके चलते अपनी दादी मनटोरा बाई के मायका गांव बीकेबाहरा में बचपन से दादी के साथ रहकर पढ़ाई कर रहा है। सातवीं कक्षा में था तब से गर्मी की छुट्टी लगते ही मेहनत मजदूरी शुरू किया और अपने पढ़ाई का खर्च स्वयं निकालने लगा।

    एक कमरे के एक छोटे से मकान में रहकर और शासकीय स्कूल में पढ़ाई कर सफलता अर्जित करने वाले सतीश का सपना बड़ा होकर इंजीनियर बनने का है। वह इन दिनों बागबाहरा के झलप चौक में बन रहे मकान में मजदूरी करने जाता है जिससे अपनी आगे की पढ़ाई जारी रख सके।

    घर का सब काम खुद कर लेते हैं सतीश

    नईदुनिया से खास बातचीत में सतीश ने बताया कि वह अपनी बुजुर्ग दादी मनटोरा (65) के घरेलू कामों में रोज हाथ बंटाता है। खाना बनाने से लेकर बर्तन धोने तक का काम भी करता है। बावजूद, गरीबी और लाचारी को कभी पढ़ाई में बाधा नहीं बनने दिया। जिस मकान में आज सतीश मेशन मजदूरी का काम कर रहा है, उनका सपना है कि बड़ा होकर इंजीनियर बने।

    शासकीय हाई स्कूल बीकेबाहरा के शाला प्रबंधन समिति अध्यक्ष पुनितराम साहू ने बताया कि सतीश शुरू से ही पढ़ाई में होशियार है। इसके चलते शिक्षक भी उसकी पढ़ाई के लिए हर संभव मदद करते रहे हैं। शिक्षकों के ही मार्गदर्शन में वह अपने बिजली विहीन मकान में पड़ोसी की मदद से एक बल्ब की सुविधा लेकर पढ़ाई करता था। इतने संघर्ष के बावजूद अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले सतीश को बधाई देने वालों का तांता लग गया।

    पिता को पता नहीं बेटा टाप किया है

    इस मजदूर परिवार की विडंबना देखिए कि ईट भठ्ठे में काम करने उप्र गए पिता रामकुमार को अब तक पता ही नहीं है कि बेटा सतीश ने टाप-10 में स्थान बनाकर महासमुंद जिले का मान बढ़ाया है। महासमुंद जिले से वह एकमात्र छात्र है जो प्रावीण्य सूची में शामिल है। परीक्षा परिणाम घोषित हुआ तब परिणाम से बेखबर सतीश अपने गांव भटगांव में शादी समारोह में गया हुआ था। स्कूल के शिक्षक उसके गांव जाकर लाए और स्कूल से लेकर कलेक्टोरेट तक सतीश का सम्मान हुआ। अभावग्रस्त जीवन जी रहे सतीश की आंखें सम्मान पाकर भर आई।

    बड़े भाई के प्रोत्साहन को माना मील का पत्थर

    सतीश अपनी सफलता का श्रेय अपने दादी-दादा, माता-पिता, गुरुजन एवं बड़े भाई पंकज यादव को देते हैं। पंकज गरीबी की वजह से आगे नहीं पढ़ सके। आठवीं के बाद बड़े भाई पंकज ने पढ़ाई छोड़ दी और मजदूरी कर परिवार के भरण पोषण में सहायता कर रहे हैं। पंकज के प्रोत्साहन और प्रेरणा से सतीश जी-जान से पढ़ाई में जुटा हुआ है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए रोज 8-9 घंटे पढ़ाई करता था।

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