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    मुठभेड़ से लौटते जवानों ने फूंके आदिवासियों के 16 घर, पुलिस का इनकार

    Published: Fri, 19 May 2017 08:38 PM (IST) | Updated: Sat, 20 May 2017 12:56 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    गणेश मिश्रा, बीजापुर

    सुरक्षाबलों द्वारा 13 से 15 मई तक नक्सलियों के खिलाफ चलाए गए अब तक के सबसे बड़े अभियान के दौरान बीजापुर की सीमा पर बसे सुकमा जिले के रायगुड़ा गांव के 16 मकान आग के हवाले कर दिए गए। इसमें मकान के साथ ही राशन व अन्य सामान भी खाक हो गए हैं। भरी गर्मी में सिर से छत छिन जाने से 9 परिवारों के 30 लोग बेघर हो गए हैं, जो एक ही जाति के हैं।

    ग्रामीणों का आरोप है कि 14 मई रविवार को सुबह पास के गांव चिन्नााबोडकेल में मुठभेड़ के बाद वापसी के दौरान जवानों ने ही मकानों को आग लगाई। वहीं दूसरी ओर इस मामले में सुकमा के दो जवानाें ने गुरुवार को इस आगजनी के लिए नक्सलियों को जिम्मेदार ठहराते हुए चिंतलनार थाने में एफआईआर दर्ज कराई है।

    डीआरजी, एसटीएफ और कोबरा जवानाें ने नक्सलियों के आरामगाह माने जाने वाले सुकमा के पूवर्ति इलाके में 96 घंटे का महाभियान चलाया था। इस दौरान रायगुड़ा के 16 मकानों को आग लगा देने की घटना की पड़ताल के लिए 18 मई को 90 किमी की दूरी तय कर नईदुनिया टीम रायगुड़ा पहुंची।

    इस दौरान भी जले हुए मकानों से धुआं उठ रहा था। पत्रकार के पहुंचने की खबर मिलते ही पूरा गांव जुट गया। ग्राम पटेल माडवी मुत्ता ने बताया कि 14 मई को पास के गांव चिन्नााबोडकेल के पास नक्सलियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ हुई थी।

    दोपहर करीब दो बजे जवानाें की टीम ने गांव पहुंची और ग्रामीणों को खदेड़ दिया। ढाई से चार बजे के बीच जवानाें ने गांव में रहने वाले दोरला जाति के सोढ़ी धर्मा, सोढ़ी जोगा, वेट्टी भीमा, सोढ़ी कन्नाा, माडवी मुत्ता, माडवी नरसा, माडवी गणेश, माडवी सरेस व सोढ़ी चिलका सहित नौ परिवारों के 16 मकानों को आग के हवाले कर दिया। इनमें एक मकान खपरैल छत वाला था जबकि 15 घास के छत वाले।

    आगजनी में घर के साथ अनाज, धान, बर्तन, वनोपज सबकुछ जलकर खाक हो गए। पटेल ने बताया कि आगजनी के बाद गांव में मौजूद कुल 37 मकानों के लोगाें ने पास के भीमारम गांव में दो दिन तक शरण लिए रहे। दहशत के चलते किसी ने थाने में रिपोर्ट नहीं लिखाई है।

    पीड़ितों के घर बनाने जुटे चार गांव के 3 सौ ग्रामीण

    गांव के युवा सोढ़ी गंगा ने बताया कि आगजनी की घटना के बाद रायगुड़ा, चिन्नााबोडकेल, जब्बागट्टा और पूवर्ति गांव के ग्रामीणों की बैठक हुई, जिसमें नई जगह पर सभी प्रभावितों को नया मकान बनाकर देने का निर्णय लिया गया। मंगलवार से चारों गांव के करीब 3 सौ बच्चे, युवा, महिला, बुजुर्ग सभी मिलकर घर बनाने में जुटे हुए हैं। तीन-चार दिन में मकान बनाकर सौंप दिया जाएगा। गंगा ने बताया कि पीड़ित परिवारों के सभी सदस्यों के लिए रोजाना दोनों समय का राशन खर्च भी चाराें गांव के ग्रामीण ही वहन कर रहे हैं।

    महाभियान में 15-20 नक्सलियों को मार गिराने का सीआरपीएफ का दावा झूठा

    रायगुड़ा में पत्रकार के पहुंचने की खबर पर गुरुवार शाम करीब 5 बजे एके47 जैसे अत्याधुनिक हथियारों से लैस करीब 8-10 वर्दीधारी नक्सली पहुंचे और पूछताछ करने लगे। यह भरोसा होने पर कि हम पत्रकार ही हैं, वे जंगल की ओर ले गए और कुछ भीतर जाने के बाद एक जगह बिछाए तिरपाल पर बैठने को कहा।

    इसके बाद दल के लीडर ने अपना परिचय देने हुए बताया कि उसका नाम जगदीश इरपा है। वह उस इलाके का डीवीसी कमांडर और इंटेलीजेंस प्रभारी है। इरपा ने बीते बुधवार को सीआरपीएफ के आईजी देवेन्द्र चौहान के बीजापुर में ली गई पत्रकारवार्ता में किए गए उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अभियान के दौरान 15-20 नक्सलियों को मारे जाने का दावा किया था।

    नक्सली कमाण्डर ने बताया कि बुरकापाल में भी उनके सिर्फ दो साथी मारे गए थे, जिनमें एक तेलंगाना के चेरला और दूसरा बीजापुर के लिंगापुर का रहने वाला था। इरपा ने बताया कि गांव में घराें को आग लगाकर वापस जा रहे जवानाें पर हमारे पीएलजीए के सदस्यों ने हमला किया था, जिसमें दो जवान घायल हुए थे। उसने बताया कि बुरकापाल हमले में माओवादियों के चार प्लाटून शामिल थे।

    उन्होंने जो एंबुश लगाया गया था, उसमें जवान नहीं आ पाए थे, 300 मीटर दूर थे इसलिए अपने ही एंबुश को तोड़कर जवानाें पर हमला किया था। उसने यह भी कहा कि हाल ही में राजनाथ सिंह ने नक्सल समस्या के समाधान के लिए दिल्ली में 10 राज्यों की बैठक ली थी, जिसमें कई निर्णय लिए गए थे। इसका परिणाम रायगुड़ा में देखने को मिला है।

    उसने कहा कि सीआरपीएफ और सुरक्षाबलों के जवानों से उनकी कोई दुश्मनी नहीं है। सरकार ने अपने मतलब के लिए उन्हें बस्तर में तैनात किया है। उनके द्वारा बस्तर में ग्रामीण और महिलाओं के साथ जो अत्याचार किए जा रहे हैं, उनका बदला लेने हम हमले करते हैं। उसने इस बात को भी स्वीकारा कि दुर्दान्त नक्सली कमाण्डर पापाराव को ग्रेहाउंड्स जवानाें के साथ हुए मुठभेड़ में गोली लगी थी, जो पेट को चीरते हुए निकल गई थी।

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