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    शिक्षा गुणवत्ता अभियान की खुली पोल, शिक्षा विभाग की बढ़ी परेशानी

    Published: Sat, 22 Apr 2017 04:01 AM (IST) | Updated: Sat, 22 Apr 2017 04:01 AM (IST)
    By: Editorial Team

    पांच साल में पहली बार सिर्फ एक छात्र मेरिट में

    रायगढ़। नईदुनिया प्रतिनिधि

    माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा दसवीं कक्षा के लिए घोषित परीक्षाफल जिले में शिक्षा गुणवत्ता अभियान की पोल खोल रही है। दो साल पहले इस अभियान की शुरुआत की गई थी, जिसमें शिक्षा के स्तर को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा था। लेकिन इस साल की परीक्षाफल से शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    प्रदेश सरकार द्वारा स्कूलों के लिए चलाये जा रहे शिक्षा गुणवत्ता अभियान की पोल भी खुल चुकी है। बताते चलें कि पूर्व राष्ट्रपति दिवंगत डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम के स्मरण में शिक्षा गुणवत्ता अभियान चलाई जा रही है। इस अभियान के तहत पहले चरण में जिले के 882 सरकारी स्कूलों को सम्मिलित किया गया था। जबकि दूसरे चरण में 681 स्कूलों को फोकस किया गया है। बावजूद इसके स्कूलों में पढ़ाई का स्तर नहीं बढ़ रहा है। गौरतलब है कि शिक्षा गुणवत्ता अभियान के तहत स्कूलों में पढ़ाई का स्तर बेहतर करना था, जिससे अच्छा रिजल्ट आने की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन जिले में जिस तरह खराब परीक्षाफल आया है उससे अनुमान लगाया जा सकता है कि शिक्षा गुणवत्ता अभियान में सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। बताते चलें कि एपीजे अब्दुल कलाम के दिवंगत होने के पश्चात स्कूलों में शिक्षा गुणवत्ता अभियान की नींव रखी गई थी। गुणवत्ता अभियान का ही नतीजा है कि इस वर्ष अप्रैल माह से नये शैक्षणिक सत्र चलाया जा रहा है ताकि परीक्षाफल बेहतर आ सके। लेकिन यह अभियान विभाग के लापरवाही की भेंट चढ़ चुकी है। पिछले पांच साल के भीतर पहली बार ऐसा हुआ है कि प्रदेश में प्रावीण्य सूची की लंबी फेहरिस्त देने वाला रायगढ़ जिले में केवल एक बच्चे ने इतिहास रचा है।

    जनप्रतिनिधियों की भी लापरवाही

    शिक्षा गुणवत्ता अभियान का दूसरा चरण पिछले फरवरी माह से चलाया जा रहा है जिसमें अभी 681 स्कूलों को फोकस किया गया है। बताते चलें कि इन स्कूलों में विभाग के आला अधिकारियों के अलावा जनप्रतिनिधियों को भी सुध लेना होता है। लेकिन अभी तक स्कूल जनप्रतिनिधियों से अछूते हैं। जनप्रतिनिधि स्कूलों की सुध लेने नहीं पहुंचते जिसके चलते यहां अनियमितता बरती जाती है।

    सचिव स्तर के अधिकारी करते हैं दौरा

    शिक्षा गुणवत्ता अभियान के तहत संचालित होने वाले स्कूलों की मॉनिटरिंग राजधानी से होती है, जिसमें सचिव स्तर के अधिकारियों को समय-समय पर स्कूल का जायजा लेना होता है। पिछली बार रेल एसपी पारुल माथुर द्वारा स्कूलों का जायजा लिया गया था। जिसमें उनके द्वारा कई खामियों को उजागर किया गया था। बावजूद इसके स्कूलों में ऐसी दिक्कतों को दूर नहीं किया जाता है। यही वजह है कि इसका परिणाम परीक्षाफल में देखा जा रहा है।

    ऐसे आंका जा सकता है हाईस्कूल का परीक्षाफल

    वर्षविद्यार्थीयों की संख्या

    2013-1403

    2014-1506

    2015-1603

    2016-1708

    2017-1801

    और जानें :  # PANCH SAL ME MATRA EK MERIT
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