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    कुनकुरी पंचायत में भवन,बतौली पंचायत कर रही उपयोग

    Published: Sat, 22 Apr 2017 04:00 AM (IST) | Updated: Sat, 22 Apr 2017 04:00 AM (IST)
    By: Editorial Team

    बतौली। नईदुनिया न्यूज

    बतौली और कुनकुरी पंचायत के बीच वर्षों से चले आ रहे सीमांकन मामले का पटाक्षेप लोक सुराज अभियान में हो गया है। सीमांकन किए जाने के बाद चार बड़ी संपत्तियां कुनकुरी के पाले में आ गई है। वर्तमान में इसका उपयोग बतौली पंचायत कर रहा है। अब मामला तीन बड़ी संपत्तियों के इस्तेमाल को लेकर फंस गया है। प्रकरण जनपद पंचायत सीईओ को भेज दिया गया है। दो पंचायतों के बीच फंसे इस पेंच का निपटारा अधिकारियों के जिम्मे है।

    लोक सुराज अभियान के तहत कुनकुरी पंचायत ने इस बार सीमांकन किए जाने का आवेदन किया था। मामला बतौली और कुनकुरी पंचायत के बीच सीमा रेखा का था। प्रकरणों के निपटारे के संदर्भ में प्रकरण राजस्व कार्यालय बतौली को प्रेषित किया गया था। तत्कालीन तहसीलदार उमेश पटेल ने दोनों पंचायतों के बीच सीमांकन कार्य संपन्न कराया और प्रकरण अंतिम निपटारे के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को सौंपते हुए जनपद कार्यालय बतौली प्रेषित कर दिया। अब मामला जनपद बतौली के सीईओ के पास विचाराधीन है। इस मामले में गौरतलब है कि कुनकुरी पंचायत की सीमा बतौली के बगीचा चौक से लेकर मंगल भवन के पीछे वाली सड़क तक है। ऐसे में इस स्थल पर संचालित मंगल भवन, पंचायत भवन बतौली, नल-जल योजना के तहत पंचायत पानी टंकी और प्रतीक्षा बस स्टैंड कुनकुरी पंचायत के हिस्से में आ जाते हैं। वर्तमान में उक्त संपत्तियों का उपयोग बतौली पंचायत कर रहा है। वर्षों से बतौली पंचायत के अधिकारिता में संचालित हो रहे भवनों व बस स्टैंड के संचालन पर अब सवाल उठने स्वाभाविक है। इनमें से कई भवनों का निर्माण बतौली पंचायत व जनपद पंचायत बतौली में किया है। सीमांकन के बाद हाल में निर्मित सार्वजनिक शौचालय भी कुनकुरी पंचायत के हिस्से में आ गया है। तहसील कार्यालय से प्रेषित पत्र में उक्त संपत्तियां कुनकुरी पंचायत का सौंपे जाने का निर्देश भी दिया गया है।

    मेरे समय में लोक सुराज के तहत मामला आया था। मैंने सीमांकन कर प्रकरण जनपद कार्यालय प्रेषित कर दिया था। चूंकि मामला सिर्फ सीमांकन का नहीं है। कुनकुरी की जमीन पर मंगल भवन, पंचायत भवन बतौली, पानी टंकी व बस स्टैंड का है। उक्त संपत्तियों को सौंपे जाने का अधिकार क्षेत्र पंचायत विभाग को है। सीईओ बतौली दोनों पंचायतों के पदाधिकारियों के साथ बैठक लेकर किसी निर्णय पर पहुंच सकते हैं।

    उमेश पटेल

    तत्कालीन तहसीलदार

    दोनों पंचायतों के बीच किसी तरह का विवाद नहीं है। पूर्व के वर्षों में देवरी, बतौली, कुनकुरी, खड़धवा एवं पंचायत हुआ करती थी। 90 के दशक में सबसे पहले देवरी अलग हुआ। इसके बाद सभी पंचायतें धीरे-धीरे अलग हो गई। राजस्व नक्शे के आधार पर कुनकुरी और बतौली के बीच सीमांकन लंबित था। अब लोक सुराज में आवेदन करने पर निर्णय आया है। पंचायत अधिनियम के तहत जो भी फैसला हो स्वीकार्य है। बतौली पंचायत भवनों का किराया भी दे सकती हैं।

    साधना सिंह

    सरपंच, कुनकुरी पंचायत

    अभी तक हमारे पास ऐसी कोई सूचना नहीं भेजी गई है। संतोषी मंदिर के बाद से जमीन कुनकुरी पंचायत की जरुर है लेकिन उक्त भवनों का अधिकारिता बतौली पंचायत के पास है। निर्माण एजेंसी बतौली पंचायत है। भवन बतौली पंचायत के नाम से पंजीकृत है इसलिए आगे जो नियम संगत कार्रवाई हो वह स्वीकार्य है।

    हिंदलाल

    सरपंच, बतौली

    और जानें :  # panchyat dispute
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