Naidunia
    Saturday, December 16, 2017
    PreviousNext

    कुर्सी को लेकर एक बार सहा अपमान तो अब हमेशा साथ रखते हैं अपनी फोल्डिंग चेअर

    Published: Wed, 09 Aug 2017 01:11 AM (IST) | Updated: Wed, 09 Aug 2017 10:55 AM (IST)
    By: Editorial Team
    retired lecturer 201789 10497 09 08 2017

    जशपुरनगर, रायगढ़। कुर्सी को लेकर ग्राम तपकरा निवासी सेवानिवृत व्याख्याता इस कदर आहत हुए कि कभी किसी दूसरे की कुर्सी पर नहीं बैठते। ट्रेन में सीट नहीं मिलने से लेकर कई कार्यालयों में कुर्सी को लेकर अपमानित महसूस करने के बाद सेवानिवृत व्याख्याता मुरारीदत्त शर्मा किसी भी कार्यालय या स्थान पर जब भी जाते हैं तो अपनी कुर्सी साथ लेकर जाते हैं।

    आज भी वे कहीं जाते हैं तो एक थैले में फोल्डिंग कुर्सी लेकर जाते हैं और समुचित व्यवस्था होने पर भी अपनी ही कुर्सी का उपयोग करते हैं। एक शिक्षक का स्वाभिमान किस हद तक हो सकता है उसे तपकरा निवासी सेवानिवृत शिक्षक मुरारीदत्त शर्मा (70) से सहज ही समझा जा सकता है।

    अपने अध्यापन सेवा में एक उम्र श्री शर्मा ने कुर्सी का उपयोग स्कूलों में नहीं किया। प्रदेश के कई जिलों में वे सेवारत रहे और कई बार अस्वस्थता के दौर से गुजरने के बाद भी अपने सिद्धांतों को नहीं बदला। 20 साल पहले राजधानी रायपुर क्षेत्र से दूसरे जिले में शैक्षणिक सेवा देने के दौरान नियमित ट्रेन में मुरारीदत्त शर्मा को जाना होता था।

    इसी समय में कई बार टिकट मिलने पर भी सीट नहीं मिलने से वो आहत होते और एक दिन इस कदर आहत हुए कि उन्होंने निर्णय लिया कि अब कहीं सीट की अपेक्षा नहीं करेंगे और अपनी कुर्सी ही साथ रखेंगे। इसके लिए अनुकूल कुर्सी की तलाश में भी उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ी।

    रायपुर क्षेत्र के बाद वे अंबिकापुर स्थानांतरित हुए तब एक अनुकूल कुर्सी की तलाश की, बाद में उसे वे हमेशा साथ रखने लगा। श्री शर्मा ने बताया कि जमीन सहित कुछ न्यायिक मामले में उन्हें लंबे समय तक न्यायालय बार-बार जाना होता था।

    न्यायालय सहित कई कार्यालय में जब वे किसी अधिकारी, अधिवक्ता व अन्य लोगों के साथ बैठते थे और वहां कोई अन्य आ जाता था तो अपमानित होकर उठना पड़ता था। जिसके बाद उन्होंने पूर्ण रूप से निर्णय ले लिया कि वे किसी की कुर्सी पर अपेक्षा नहीं रखेंगे और स्वयं की ही कुर्सी का उपयोग करेंगे।

    श्री शर्मा ने अपने अध्यापन काल में सत्य, अहिंसा के पाठ पढ़ाते हुए बुराइयों और आत्मसम्मान पर भी हर कक्षा में चर्चा करते रहे। श्री शर्मा बताते हैं कि आज भी कहीं उनके विद्यार्थी मिलते हैं और उनमें नैतिक गुणों को देखकर खुशी मिलती है।

    स्कूल में वे जब सेवा देने के लिए जाते थे तो इस बात का ध्यान रखते थे कि कक्षा में कभी भी कुर्सी में नहीं बैठें। अपने जीवन का अधिकांश व्याख्यान उन्होंने खड़े रहकर ही दिया। लंबे समय तक वे स्कूलों में एक मिनट के लिए भी कुर्सी में नहीं बैठे, जो चर्चा का विषय भी बना।

    स्कूल में बिना कुर्सी के उपयोग की सेवा से उनका मानना था कि तत्परता और जिम्मेदारी का एहसास बना रहता था। सेवा निवृत्त होने के बाद मुरारी शर्मा पौधों को लेकर अध्ययन कर रहे हैं। खासकर वे दो पौधों की भिन्नता पर अध्ययन कर रहे हैं।

    ऐसे मिली कुर्सी

    अपनी कुर्सी साथ लेकर चलने के निर्णय के साथ कुर्सी मिलने की कहानी भी मुरारी दत्त शर्मा के साथ विशेष रूप से जुड़ी है। 20 साल पहले जब वे कुर्सी लेने के लिए अंबिकापुर के एक बड़े व्यापारी के पास पहुंचे और सुविधा अनुरूप फोल्डिंग कुर्सी की मांग की तो व्यापारी ने असमर्थता जताई।

    जिस पर श्री शर्मा ने गुस्से में कहा कि लाखों का सामान दुकान में है और एक छोटा सा सामान उपलब्ध नहीं करा रहे हो। एक बड़ा ताला लाकर दे रहा हूॅं जिसे दुकान में लगाकर घर में आराम करो।

    जिस पर व्यापारी बहुत दुखी हुआ और अपनी पत्नी को घर में फोन कर पत्नी को स्थिति बताते हुए व्यक्ति उपयोग के लिए हाल ही में हांगकांग से लाई गई एक फोल्डिंग स्टूल दुकान भेजने को कहा, जिसे लगभग डेढ़ सौ रुपए में पाकर श्री शर्मा खुश हुए और इसी कुर्सी का नियमित उपयोग करने लगे। इस कुर्सी को उन्होंने और मोडिफाई कर अपने अनुकूल बनाया और इसे ही लेकर वे जहां जाते हैं उपयोग करते हैं।

    प्रकृति प्रेम और शुद्घता का प्रचार

    मुरारी शर्मा प्रकृति प्रेमी हैं और साथ ही शुद्घता को लेकर प्रचार-प्रसार में जुटे हैं। पौधरोपण से लेकर कृषि कार्यों में उनकी सहभागिता देखते बनती है। स्थानीय स्तर पर संसाधन होते हुए भी वे साइकिल का उपयोग आज भी करते हैं।

    जर्सी गाय को कोई गाय बोलता है तो वे नाराज हो जाते हैं। देसी गाय के पालन को बढ़ावा देने स्वयं भी दिनचर्या का एक हिस्सा गौ सेवा में बिताते हैं। श्री शर्मा ने कहा कि भारतीय गौवंश खतरे में है और जर्सी गायों का प्रचलन देश ही नहीं बल्कि विश्व हित में नहीं है। कई देशों में जहरीले होने के कारण जर्सी गाय के दूध पर प्रतिबंध लगा हुआ है।

    प्रतिक्रिया दें
    English Hindi Characters remaining


    या निम्न जानकारी पूर्ण करें
    नाम*
    ईमेल*
    Word Verification:*
    Please answer this simple math question.
    +=

      जरूर पढ़ें