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    लाइलाज बीमारी से जूझ रहे बेटे को जिंदगी जीना सिखा रहा पिता

    Published: Mon, 19 Jun 2017 10:10 AM (IST) | Updated: Mon, 19 Jun 2017 06:13 PM (IST)
    By: Editorial Team
    sick son 19 06 2017

    शमशाद अहमद, रायगढ़ । मधुबनपारा में रहने वाला 12 वर्षीय आयाज लाइलाज मस्क्यूलर डिस्ट्राफी नामक बीमारी से पीड़ित है। 12 साल की उम्र में ही मासूम को जिंदगी ने कई मायने सिखा दिए हैं। उसे इस उम्र में ही पिता का साथ न दे पाने का मलाल होने लगा है।

    आयाज कक्षा तीसरे तक स्कूल गया इसके बाद बीते तीन सालों से अब पूरी तरह से व्हील चेयर पर निर्भर हो गया है। आयाज खान जन्म से ही लाइलाज बीमारी मस्क्यूलर डिस्ट्राफी से जूझ रहा है। शुरू में तो वह सहारे से खड़ा होकर चल फिर लेता था।

    पिता इनायत खान द्वारा आरंभ में आयाज को शालिनी स्कूल में दाखिला कराया कक्षा तीसरी तक आटो से आना जाना करता था और अब वह घर में रहता है। दरअसल बीते तीन सालों तक सहारे से थोड़ा-थोड़ा चल फिर लेता था, लेकिन अब बीते तीन सालों से वह अपने पैरों पर भी खड़ा नहीं हो पाता है और पूरी तरह से व्हील चेयर पर आश्रित हो गया है।

    पिता इनायत खान बताते हैं कि आयाज पढ़ाई लिखाई बहुत होशियार है लेकिन अब चूंकि वह चल फिर नहीं सकता है यहां तक की उसे बाथरूम जाने बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। किसी तरह से उसे बाथरूम वगैरह ले जाया जाता है अब वह अपने पैर पर बिलकुल भी खड़ा नहीं हो पाता है कमर से नीचे का हिस्सा बिलकुल कमजोर हो चुका है। चूंकि परिवार की आर्थिक रूप से कमजोर है।

    जिसकी वजह से अपने बेटे को दूसरी सुविधाएं भी नहीं दे पाते हैं, लेकिन आयाज का कहना है कि उसके पिता उसकी हर ख्वाहिश की पूर्ति करते हैं। आयाज कहता है कि वह जानता है कि वह एक लाइलाज बीमारी से जूझ रहा है जिसका की कोई इलाज नहीं है।

    उसका कहना है कि वह जब कभी उदास होता है तो पिता तुरंत जान जाते हैं और उसे जीवन के ऐसी परिस्थितियों को उसके सामने रखते हैं, जिससे उसे जीने का हौसला बढ़ जाता है। मासूम आयाज कहने को महज 12 साल का है लेकिन उसकी बातों से लगता है कि वह अपनी उम्र से काफी बड़ा है। वह पिता को अपना रोल मॉडल मानता है।

    मां उसकी हर जरूरी को बिना कहे समझ जाती है। वह स्कूल नहीं जा पाता है जिसका उसे बेहद मलाल है वह जीवन में कुछ करना चाहता है लेकिन अपनी बीमारी की वजह से वह अपने पैरों पर खड़ा नही हो सकता है।

    जिससे कभी-कभी वह बेहद निराश हो जाता है ऐसे में वह पिता के कहे बातों को याद करता है और अपनी मां को देखता है तो उसे जीवन में ऊंची उ डान भरने का हौसला मिलता है भले ही वह उसे पा नहीं सकता है। वह कहता है कि उसकी चाहत है कि वह पिता के लिए कुछ करे।

    रमजान में पूरे रोजे रखकर करता है इबादत

    आयाज के माता पिता बताते हैं कि अपनी जिद से रमजान माह के पूरे रोजे रख रहा है बीमारी की वजह से उसके माता पिता नहीं चाहते है कि वह रोजे रखे लेकिन उसकी जिद के आगे माता पिता भी उसे रोजे रखने को लेकर हौसला बढ़ाते हुए उसका साथ दे रहे हैं और अब तक वह रमजान माह के पूरे रोजे रख रहा है।

    वह कहता है कि उसे अपने खुदा पर पूरा भरोसा है और एक दिन ऐसा आएगा जब दूसरे बच्चों की तरह वह भी अपने माता पिता के लिए कुछ करेगा।

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