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    चार दशक से चुनौती बनी जगरगुंडा की खूनी सड़क पर दोबारा काम शुरू

    Published: Thu, 12 Oct 2017 07:42 PM (IST) | Updated: Fri, 13 Oct 2017 08:37 AM (IST)
    By: Editorial Team
    road demo 12 10 2017

    रायपुर। पिछले चार दशकों से सरकार के लिए चुनौती बनी जगरगुंडा सड़क पर अप्रैल के बाद अब दोबारा काम शुरू हो गया है। पुलिस अफसरों का कहना है कि दिसंबर तक इस 56 किमी सड़क का आधा काम हो जाएगा और मई-जून तक इसे पूरा कर दिया जाएगा।

    दोरनापाल-जगरगुंडा सड़क प्रदेश की सबसे खतरनाक सड़क मानी जाती है। इसी सड़क पर स्थित ताड़मेटला के जंगलों में अप्रैल 2010 में सीआरपीएफ के 76 जवानों की शहादत हुई थी। सड़क निर्माण की सुरक्षा में ही अब तक यहां 49 जवानों की शहादत हो चुकी है।

    इस साल 23 अप्रैल को बुरकापाल के पास निर्माणाीन पुलिया की सुरक्षा में तैनात सीआरपीएफ के गश्ती दल पर नक्सलियों ने हमला किया था जिसमें 25 जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद सीआरपीएफ ने सड़क निर्माण को सुरक्षा देने से इंकार कर दिया था। इसके बाद बरसात आ गई और काम बंद ही रहा।

    इसी महीने सड़क का काम दोबारा शुरू किया गया है। दोरनापाल से पोलमपल्ली तक सड़क बन चुकी है। इसके आगे तिमेलवाड़ा और कांकेरलंका के बीच करीब 4 किमी तक कंक्रीट इसी महीने बिछाया गया है। यह ऐसी सड़क है जिसका 18 बार टेंडर किया गया लेकिन नक्सली दहशत की वजह से कोई ठेकेदार सामने ही नहीं आया।

    मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह ने आखिर में इस चुनौती को पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन को सौंपा। पिछले साल जोर-शोर से काम चला। पूरे 56 किमी तक मिट्टी बिछाने और बेस बनाने का काम पूरा हो गया था कि तभी बुरकापाल की वारदात हो गई। अब फिर से काम शुरू हुआ है और बड़ी तेजी से कंक्रीट बिछाया जा रहा है। पुलिस अफसरों की मानें तो इस साल यह सड़क बनकर तैयार हो जाएगी। कंक्रीट की मजबूत सड़क ऐसी होगी कि यहां नक्सली ब्लास्ट बेअसर होगा।

    यह है जगरगुंडा

    कभी वनोपज का केंद्र और उप तहसील मुख्यालय रहे जगरगुंडा में अब कंटीले तारों से घिरा सलवा जुडूम का कैंप है। तार के पार मौत का सामान लेकर नक्सली खड़े रहते हैं। जगरगुंडा से बीजापुर के बासागुड़ा तक, दंतेवाड़ा के अरनपुर तक और सुकमा के दोरनापाल तक 3 रास्ते हैं। बासागुड़ा की तरफ से भी जगरगुंडा तक सड़क निर्माण का काम चल रहा है। इस ओर भी सुरक्षा में लगे 24 जवान अलग- अलग हमलों में शहीद हो चुके हैं।

    लगातार हुई हैं घटनाएं

    दोरनापाल-जगरगुंडा सड़क पर कई घटनाएं हो चुकी हैं। 2008 में मुकरम के पास नक्सलियों ने सड़क काट दी थी। जगरगुंडा से टीम थानेदार हेमंत मंडावी के नेतृत्व में गड्ढा पाटने निकली और एंबुश में फंस गई। इसमें 12 जवानों ने शहादत दी। 2010 में ताड़मेटला में 76 जवान शहीद हुए। छुटपुट घटनाओं की तो गिनती ही नहीं है। 2007 में जगरगुंडा में सलवा जुडूम कैंप खुलने के बाद नक्सलियों ने चिंतलनार के आगे 12 किमी मार्ग पर सभी पुल उड़ा दिए हैं। इन पुलों का काम भी साथ-साथ चल रहा है।

    इनका कहना है

    अप्रैल में बुरकापाल घटना के बाद जगरगुंडा रोड का काम बंद हो गया था। इसी महीने इसे दोबारा शुरू किया गया है। हम इस साल बरसात से पहले 56 किमी कंक्रीट सड़क तैयार कर देंगे।

    -डीएम अवस्थी, एमडी, पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन छत्तीसगढ़

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