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    छत्तीसगढ़ में सरकार कराएगी बंदरों की नसबंदी

    Published: Wed, 15 Nov 2017 07:15 AM (IST) | Updated: Wed, 15 Nov 2017 02:41 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    रायपुर। जंगली हाथी और भालू के साथ ही राज्य के कई हिस्सों में उत्पाती बंदर आफत बने हुए हैं। इनकी संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में सरकार ने अब उनकी नसबंदी कराने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई राज्य वन्य जीव बोर्ड की बैठक में यह फैसला किया गया।

    बंदरों की नसबंदी (स्टरलाइजेशन) के लिए कोरिया और रायगढ़ जिले में एक-एक केंद्र स्थापित होंगे। सरगुजा एवं उत्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की बैठक में कुछ जनप्रतिनिधियों ने बंदरों के आतंक की शिकायत की थी। इसी के मद्देनजर यह फैसला लिया गया है।

    ईको टूरिज्म का डिजाइन फाइनल

    बैठक में राज्य में ईको टूरिज्म के शुभंकर श्यामू-राधे के डिजाइन का अनुमोदन किया गया। शुभंकर के डिजाइन में राजकीय पशु वन भैंसा के सिर पर राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना को बैठा दिखाया गया है। इस शुभंकर का उपयोग सोशल मीडिया में ईकोटूरिज्म से संबंधित जानकारियां रोचक ढंग से पहुंचाने के लिए किया जाएगा।

    बनेगी कार्ययोजना

    बैठक में यह निर्णय भी लिया गया कि बर्ड काउंट इंडिया संस्था के सहयोग से राज्य में पक्षियों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराया जाए। इसके आधार पर स्टेटस आफ वर्डस इन छत्तीसगढ़ रिपोर्ट का प्रकाशन किया जाएगा। पक्षियों के संरक्षण और पक्षी आधारित ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने की कार्य योजना तैयार की जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि कांगेर घाटी में अनेक दुर्लभ प्रजातियों के पक्षियों का रहवास है।

    हाथी पुनर्वास को मिली मंजूरी

    सूरजपुर के प्रतापपुर तहसील में स्थित तैमोर पिंगला अभ्यारण्य में हाथी बचाओ एवं पुनर्वास केन्द्र की स्थापना के प्रस्ताव को केन्द्रीय चिड़िया घर प्राधिकरण से अनुमति मिल गई है। केन्द्र इस वर्ष दिसंबर तक तैयार हो जाएगा।

    विशेषज्ञों ने बैठक में बताया कि झारखंड और ओड़िशा में हाथियों के प्राकृतिक रहवास का नुकसान होने के कारण वे छत्तीसगढ़ का रूख कर रहे हैं। इसे रोकने के लिए हाथियों के प्रवास संबंधी सूचनाओं का आदान-प्रदान आवश्यक है।

    विशेषज्ञों ने इसके लिए पड़ोसी राज्यों, पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के साथ एमओयू करने की आवश्यकता बतायी। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय वन मंत्री को इस संबंध में पत्र लिखने की सहमति प्रदान की।

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