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    छत्तीसगढ़ की मुस्लिम महिलाओं ने इंसाफ के लिए लिखा मोदी को खत

    Published: Fri, 21 Apr 2017 04:15 PM (IST) | Updated: Sat, 22 Apr 2017 09:12 AM (IST)
    By: Editorial Team
    letter to pm modi 2017421 16252 21 04 2017

    अनिल मिश्रा, रायपुर। तीन तलाक के मुद्दे पर छत्तीसगढ़ की मुस्लिम महिलाएं भी केंद्र के साथ नजर आ रही हैं। इन्होंने आपबीती बताने मोदी को खत लिखे हैं। एक पीड़िता का दर्द है- मुझे शादी के 16 साल बाद छोड़ दिया गया...अब मैं कहां जाऊं। आपका ही सहारा है। प्रदेश की ऐसी सैकड़ों महिलाओं में से 30 पीड़ित इस पर अभियान छेड़ने वाले मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संपर्क में हैं। मंच का जज्बा फाउंडेशन मदद में जुटा है। मुस्लिम सामाजिक कार्यकर्ता भी तीन तलाक के खिलाफ हैं, जबकि धर्मगुरु बता रहे हैं कि मामले को गलत ढंग से पेश किया जा रहा है।

    दो छोटे बच्चे और दे दिया तलाक

    राजनांदगांव की मुमताजजहां ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखा है। इसमें बताया कि शादी के समय 20 साल की थी, आज 35 की हूं। दो छोटे बच्चे हैं। शौहर शेख मोहम्मद ने तलाक दे दिया। मायका नागपुर में है। मैं नागपुर आ गई हूं और वे शादी के लिए दूसरी लड़की तलाश रहे हैं। अब यहां मेरे रहने का ठिकाना है न खाने का। मैं गुजर-बसर कैसे करूं...। अब आपका ही सहारा है।

    घर से निकाला फिर दूसरी ले आया

    सरगुजा की मेहनाज खान की शादी साकेष उर्फ कादर खान से 2010 में हुई थी। मेहनाज ने बताया- मुझे मारपीट कर घर से निकाल वे दूसरी औरत ले आए। पुलिस हस्तक्षेप से एक बार घर ले गए लेकिन कहां सुधरने वाले थे। अब पिता के घर बिलासपुर में रह रही हूं। कोर्ट में केस चल रहा है। 17 अप्रैल को पेशी थी। पति ने बहुत बेइज्जत किया। समझ नहीं आता क्या होगा।

    दुखद है कि लोग बेजा फायदा उठा रहे हैं

    तीन बार तलाक बोल देने से जीवनभर का बंधन खत्म नहीं हो जाता। बेहद दुखद है कि लोग इसका बेजा फायदा उठा रहे हैं। हम हिंदुस्तान में रहते हैं तो नियम यहीं के लागू करना चाहिए।- पद्मश्री शमशाद बेगम, सामाजिक कार्यकर्ता

    गुस्से में तलाक नहीं होता

    तीन बार तलाक के लिए 1 महीने से एक साल तक का वक्त लगता है। गुस्से में एक बार बोल देने से तलाक नहीं होता। हमारे प्रदेश की बात करें तो 30 से ज्यादा महिलाएं इससे दुखी हैं। - डॉ. सलीम राज, पूर्व अध्यक्ष छत्तीसगढ़ हज कमेटी

    लोगों को जागरुक करेंगे

    एक साथ तीन तलाक दिया ही नहीं जा सकता। हम लोगों को जागरूक करेंगे। हम संविधान मानेंगे, लेकिन थोपना गलत है। कानून जरूरी है और शरीयत का कानून भी। इसे समाज पर छोड़ना चाहिए। -नौमान अकरम हामिद, पूर्व अध्यक्ष, शिरतुन्न्बी कमेटी रायपुर

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