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    पांच दोस्त 5 कुल्हड़ से गढ़ रहे पर्यावरण बचाने की कहानी

    Published: Sat, 11 Nov 2017 03:48 AM (IST) | Updated: Sun, 12 Nov 2017 07:52 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    रायपुर। सोच बड़ी हो तो कार्य करने के लिए किसी बड़े मंच की जरूरत नहीं होती। बस इरादे नेक होने चाहिए। बदलते फैशन व स्टाइल के चलते प्लास्टिक के गिलास, डिस्पोजल में चाय पीने का चलन बढ़ गया है। विलुप्त हो रहे कुल्हड़ के प्रति समाज को जागरूक करने का बीड़ा उठाया बीएड के पांच स्टूडेंट्स ने।

    वे अपने बैग में कुल्हड़ लेकर चलते हैं। उसी में चाय पीते हैं और आसपास के लोगों को भी कम से कम सार्वजनिक स्थल पर कुल्हड़ में चाय पीने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। प्लास्टिक गिलास में 35-40 तरह के कार्बनिक यौगिक पाए जाते हैं, जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के साथ कैंसर को न्योता देते हैं।

    कुल्हड़ में चाय पीने को दे रहे नसीहत

    स्टूडेंट हरिनंदन कुमार और उनके साथी इसी दीपावली से यह अभियान चलाए हुए हैं। वे दीवाली के समय मिट्टी के दीए को लेकर अखबारों में चले अभियान से वे बेहद प्रेरित हुए। उन्होंने भी पर्यावरण बचाने की एक कोशिश शुरू कर दी। कुम्हारों की खस्ताहाली से भी वे दुखी हैं।

    उनका कहना है कि कुल्हड़ का चलन बढ़ने से कुम्हारों का भला होगा। अपने आसपास के लोगों को संदेश देने के साथ बीएड के छात्रों को भी कुल्हड़ के फायदे बता रहे हैं।

    स्टूडेंट दीपशिखा साहू की मानें तो पुराने समय में लोग चाय कुल्हड़ में ही पीते थे। साथ ही दूध-दही, छाछ भी मिट्टी के बर्तनों में रखा जाता था। इसके कई फायदे रहते थे। मिट्टी का बर्तन एक तरफ जहां हमें अपनी मिट्टी से जोड़ता है, वहीं इसकी सौंधी-सौंधी खुशबू से चाय का स्वाद दोगुना बढ़ जाता है।

    शुरू में लगा संकोच

    कुल्हड़ के प्रति शुरू में जब कॉलेज कैंटीन में साथियों को संदेश देने पहुंचीं तो पायल धु्रव को बहुत संकोच लगा। लेकिन इरादे नेक होने की वजह से रंजिता महतो, अस्मिता प्रधान भी साथ में आईं। अन्य साथी भी ग्रुप से जुड़ गए और इंटरनेट के जरिए कुल्हड़ व प्लास्टिक के फायदे व नुकसान के बारे में जानकारी देने लगे।

    इस कार्य में शासकीय माध्यमिक शाला देवपूरी स्कूल की एचएम रेखा महिलांग का बड़ा सहयोग मिला, जिन्होंने बीएड़ की पढ़ाई कर रही इन स्टूडेंट को कोर्स के साथ कुल्हड़ के प्रति जागरूक करने की सराहना की है।

    चाय तो सिर्फ कुल्हड़ में

    इन स्टूडेंट का मानना है कि दूसरे को संदेश देने से पहले स्वयं इसका पालन करना चाहिए। इसलिए सबसे पहले घर हो या कैंटीन, चाय तो सिर्फ कुल्हड़ में पीनी है। इसकी शपथ ली गई और अपने घर में दर्जन के हिसाब से कुल्हड़ भी खरीद कर रख लिया है। अभी तो 50 रुपए में 12 कुल्हड़ मिल रहे हैं।

    वहीं कल्पना बंजारे की मानें तो चाय पीने के लिए प्लास्टिक ग्लास को छोड़कर कई दूसरी भी वस्तुएं हैं, लेकिन पर्यावरण व कुम्हारों की स्थिति में सुधार लाना है तो अधिक से अधिक मिट्टी के बर्तनों का उपयोग किया जाना चाहिए।

    कुल्हड़ में चाय पीने से फायदे

    - कुल्हड़ मिट्टी से बनाया जाता है, जिसके उपयोग से शरीर स्वस्थ रहता है। साथ ही कोई बीमारी भी नहीं होती है।

    - कुल्हड़ में जो सूक्ष्म तत्व होते हैं, वे शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं। इससे हड्डियां मजबूत होती हैं।

    -कुल्हड़ की मिट्टी में कैल्शियम भरपूर मात्रा में होता है, जो शरीर में कैल्शियम बढ़ाता है।

    डिस्पोजल के गिलास से नुकसान

    -पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं।

    -गिलास फूडग्रेज प्लास्टिक के बजाय खराब और रिसाइकल किए गए प्लास्टिक से बनते हैं।

    - इससे स्वास्थ्य को काफी नुकसान पहुंचता है।

    कैंसर रोग को बुलावा देता है

    कुल्हड़ के साथ चीनी मिट्टी, कांच के गिलास में गर्म पेय पदार्थ पीने से उतना शरीर को नुकसान नहीं होता है, जितना प्लास्टिक के गिलास में चाय पीने से होता है। 35-40 जहरीले कार्बनिक यौगिक प्लास्टिक के गर्म पेय में पाए जाते हैं। इसके अलावा पर्यावरण को भी नुकसान होता है, इसलिए वाकई बीएड़ स्टूडेंट का यह प्रयास समाज को एक नया संदेश देगा। - डॉ.शम्स परवेज, रसायन शास्त्री व पर्यावरण विद, पं. रविशंकर शुक्ल विवि

    स्वास्थ्य के लिए बेहतर

    जहरीले कार्बनिक यौगिकों से कैंसर के अलावा स्कीन जैसे कई रोग होते हैं। प्लास्टिक के डिस्पोजल के गिलास में गर्म पदार्थ का सेवन इसकी बड़ी वजह होती है। - डॉ. रमेश जैन, एमडी, प्राइवेट प्रैक्टिसनर

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