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    बंगाल की खाड़ी में बना लो-प्रेशर, प्रदेश में हो सकती है बारिश

    Published: Wed, 15 Nov 2017 09:06 AM (IST) | Updated: Wed, 15 Nov 2017 09:26 AM (IST)
    By: Editorial Team
    chhattisgarh weather 15 11 2017

    रायपुर। प्रदेश के मौसम ने एक बार फिर करवट बदल ली है। बीते कुछ दिनों से जहां अच्छी ठंड का एहसास होने लगा था तो वहीं 2 दिन में तापमान 2 डिग्री चढ़ गया है। आने वाले 3 दिनों में तापमान में बढोत्तरी ही दर्ज होगी, गिरावट नहीं।

    दक्षिण छत्तीसगढ़ के साथ-साथ मौसम विभाग ने पूरे प्रदेश में हल्की बारिश की संभावना जताई है। यह असर है बंगाल की खाड़ी में बनने वाले कम दाब क्षेत्र का, जो सक्रिय है और तेजी से बढ़ रहा है। यही वजह है कि मंगलवार को शहर में बदली छाई रही। शाम 5 बजे अंधेरा हो चुका था। वहीं शहरवासियों ने मौसम में आए बदलाव का अपने तरीके से फायदा उठाया।

    मौसम विज्ञान केंद्र रायपुर में मौसम वैज्ञानी एचपी चंद्रा के मुताबिक पिछले सालों की तुलना में ठंड तय समय पर ही। तापमान में भी ज्यादा फर्क नहीं है। इस साल ठंड अच्छी पड़ेगी। उनके मुताबिक फिलहाल उत्तर भारत से आने वाले हवाओं से राज्य में ठंड पड़ती है, जो पूर्व की गर्म हवाओं से प्रभावित हो रही है।

    राज्य में सबसे ठंडा रहा अंबिकापुर

    अंबिकापुर और पेंड्रारोड का तापमान लगातार 12 से 13 डिग्री के बीच बना हुआ है। जहां मंगलवार को पूरे प्रदेश में तापमान बढ़ा तो रायपुर का तापमान स्थिर ही रहा। रायपुर, जगदलपुर का तापमान सामान्य से अधिक था, जबकि अन्य जिलों के तापमान सामान्य से कम रहा।

    स्कॉई रेडियो मीटर से जांचेंगे प्रदूषण, अल्ट्रा वायलेट किरणों की भी गणना

    रायपुर। शहर स्थित लालपुर मौसम विज्ञान केंद्र में प्रदूषण के स्तर को मापने और अल्ट्रा वायलेट किरणों की गणना करने वाला स्कॉई रेडियो मीटर यंत्र इंस्टॉल किया गया है, जो प्रदूषण के पल-पल की रिपोर्टिंग करेगा।

    प्रदेश के किसी भी मौसम केंद्र में लगने वाला यह पहला यंत्र है, जो केंद्रीय मौसम विज्ञान विभाग ने भेजा है। इससे सीधे दिल्ली में रिपोर्ट होगी और फिर वहां से मौसम विभाग की राष्ट्रीय वेबसाइट पर आंकड़े जारी होंगे।

    मौसम केंद्र के अफसरों के मुताबिक छोटे-छोटे धूल के पार्टिकल को नापने के लिए अभी शहर में बेहतर विकल्प मौजूद नहीं है। पर्यावरण मंडल द्वारा कलेक्टोरेट गार्डन के पास और एनआईटी के सामने लगाए गए उपकरणों के डाटा सटीक आंकड़े नहीं देते, लेकिन यह यंत्र सटीक गणना करेगा। गुरुवार को केंद्रीय मौसम विज्ञान विभाग नई दिल्ली के डायरेक्टर केजे रमेश रायपुर पहुंच रहे हैं, जो इस यंत्र का उद्घाटन करेंगे।

    इन्हें मिलेगा लाभ

    - ओजन परत में प्रदूषण की वजह से जगह-जगह ऐसे पेचेज (स्थान) बन गए हैं, जहां से सीधे अल्टा वायलेट किरण धरती पा आ रही हैं। इनकी वजह से तरह-तरह की बीमारियां हो रही हैं, स्किन कैंसर प्रमुख है। इस यंत्र के लगने से यह जानकारी मिलेगी कि छत्तीसगढ़, रायपुर में कितनी संख्या में अल्टा वायलेट किरणें सीधे गिर रही हैं। इन आंकड़ों के जरिए किरणों की तीव्रता का पता चलेगा, शोध में भी मदद मिल सकेगी।

    - आज बड़े निर्माण के पहले सोलर रेडिएशन की स्थिति जांची जाती है। इस यंत्र से प्राप्त डाटा आर्किटेक्ट के लिए भी मददगार होगा। बतौर उदाहरण- बड़े इमारतों में ग्लास का इस्तेमाल किया जाता है, इसकी वजह भी सोलर रेडिएशन ही है।

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