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    जामताड़ा गैंग के नाबालिग को पुलिस ने बताया बालिग, कोर्ट ने मंगाए सबूत-समय पर पेश नहीं करने पर जमानत पर छोड़ा

    Published: Wed, 12 Jul 2017 08:13 AM (IST) | Updated: Wed, 12 Jul 2017 08:13 AM (IST)
    By: Editorial Team

    0 दूसरे बालिग को भी कोर्ट ने दिया जमानत का लाभ

    0 एसपी ने थानेदार को जारी किया स्पष्टीकरण, विवेचक पर गिरेगी गाज

    एक्सक्लूसिव.....

    रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

    राजधानी पुलिस की लचर विवेचना और समय पर चालान पेश नहीं कर पाने के कारण जामताड़ा गैंग के दो शातिर एटीएम फ्रॉड को कोर्ट द्वारा जमानत का लाभ देते हुए रिहा करने का मामला सामने आया है। चौंकाने वाली बात यह है कि दोनों फ्रॉड को झारखंड में घेराबंदी कर दबोचने में क्राइम ब्रांच को कई दिनों तक कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी। ऐसे में थाना पुलिस की पूरी कार्यप्रणाली ही सवालों के घेरे में आ गई है। एसपी ने इसे गंभीरता से लेते हुए थानेदार को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है और विवेचक के खिलाफ कार्रवाई के संकेत दिए हैं।

    पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ऑनलाइन ठगी में पहली बार बैंक अफसर-कर्मचारी और जामताड़ा गैंग की मिलीभगत का खुलासा होने के बाद अप्रैल महीने में क्राइम ब्रांच की टीम ने झारखंड के देवघर में गैंग के 4 शातिर ठगों को कड़ी मशक्कत के बाद घेराबंदी कर पकड़ा था, जिनमें से 2 ठगों को रायपुर लाया गया था, जबकि दो ठगों को दुमका कोर्ट के आदेश पर हफ्ते छोड़ दिया गया। यहां लाए गए रामगढ़, दुमका के सुमन कुमार मंडल पिता लखी की उम्र सिविल लाइन पुलिस ने 18 साल बताकर दूसरे आरोपी मोहनपुर के घोरमारा निवासी गौरव कुमार शाह (19) के साथ कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया। गौरव व सुमन दसवीं-बारहवीं फेल हैं, लेकिन हाइटेक एटीएम ठगी में माहिर माने जाते हैं। इनके पास से 12 मोबाइल, कई सिम कार्ड, दो एटीएम, एसबीआई कियोस्क सेंटर आईडी आदि जब्त किए गए थे।

    परिजन ने नाबालिग बता लगाई थी आपत्ति

    सुमन कुमार मंडल के परिजन ने अपने वकील के माध्यम से 5 जून को सीजीएम कोर्ट में यह आपत्ति लगाई थी कि उनका बेटा नाबालिग है, फिर भी पुलिस ने उम्र ज्यादा दर्शाकर 25 अप्रैल को गिरफ्तारी की और जेल भेज दिया। कोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए सिविल लाइन पुलिस को सुमन की सही उम्र का सर्टिफिकेट सबूत के तौर पर 60 दिनों के अंदर चालान के साथ पेश करने का आदेश दिया।

    60 दिन बाद पेश किया चालान

    कोर्ट के आदेश पर सिविल लाइन थाने की टीम उम्र के संबंध देवघर गई और उसके परिजनों से पूछताछ के बाद सुमन मंडल के स्कूल का दाखिला-खारिज सर्टिफिकेट में नाबालिग होना पाकर उसे लेकर 26 जून को रायपुर पहुंची, लेकिन 60 दिन की समयावधि पूरी होने के कारण कोर्ट ने सुमन के साथ उसके दूसरे साथी गौरव शाम को धारा 167/2 के तहत जमानत का लाभ देते हुए रिहाई का आदेश दे दिया। दोनों जेल से निकलकर घर चले गए। इसके बाद 30 जून को पुलिस ने कोर्ट में चालान पेश किया, तब तक काफी देर हो चुकी थी।

    तकनीकी त्रुटि का मिला लाभ-टीआई

    सिविल लाइन टीआई हेमप्रकाश नायक ने बताया कि मामले में तकनीकी त्रुटिवश आरोपियों जमानत का लाभ मिला है। वरिष्ठ अफसरों से स्पष्टीकरण का नोटिस मिला था जिसके जबाव दिया गया है। प्रकरण का चालान कोर्ट में पेश किया जा चुका है।

    क्या था मामला

    अप्रैल महीने में राजा तालाब निवासी ट्रेवर्ल्स कारोबारी मुबशीर को एटीएम फ्रॉड ने काल करके खुद को बैंक का मैनेजर बताकर एटीएम ब्लॉक होने का झांसा देकर एटीएम कार्ड का कोड नंबर पूछ लिया था। इसके बाद उसके खाते से पांच हजार रुपए ऑनलाइन आहरण कर लिया। ठगी की शिकायत पर 10 अप्रैल को पुलिस ने धोखाधड़ी का केस दर्ज किया। जांच में खुलासा हुआ कि ठगों ने राजधानी के कई लोगों को फोन करके कार्ड पुराने होने, आधार कार्ड से लिंक करने, क्रय सीमा बढ़ाने के नाम पर कार्ड पर लिखे 16 अंक, पासवर्ड हासिल कर लेते हैं। फिर मोबाइल में प्राप्त ओटीपी नंबर व ऑनलाइन सॉफ्टवेयर से राशि निकाल लेते थे।

    पेशी में नहीं आने पर जारी होगा गिरफ्तारी वारंट

    पुलिस सूत्रों ने बताया कि जमानत पर छूटे दोनो आरोपियों को नियमित कोर्ट पेशी में आना होगा। अगर वे पेशी में नहीं आते है तब कोर्ट गिरफ्तारी वारंट जारी कर पुलिस को वारंट तामिल करने का निर्देश दे सकती है।

    वर्जन-

    जामताड़ा गैंग के दो सदस्यों को किन परिस्थितियों में जमानत का लाभ मिला है, इसकी प्रारंभिक जांच कराई जा रही है। जिस किसी विवेचक की इसमें लापरवाही पाई जाएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई करेगे।

    -विजय अग्रवाल, एएसपी सिटी

    11 सतीश 03

    सं. आरकेडी

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