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    नए साल में पुष्य नक्षत्र प्रति माह दो दिन

    Published: Thu, 10 Dec 2015 03:17 PM (IST) | Updated: Thu, 10 Dec 2015 03:26 PM (IST)
    By: Editorial Team
    pushya nakshtra 10 dec 20151210 152614 10 12 2015

    रायपुर(निप्र)। किसी भी नए कार्य की शुरुआत अथवा शादी-ब्याह में सोने-चांदी की खरीदी के लिए अति शुभ माने जाने वाला पुष्य नक्षत्र आने वाले साल 2016 में प्रत्येक माह पड़ेगा और इसका प्रभाव एक दिन शुरू होकर दूसरे दिन तक रहेगा। अगस्त माह में दो मर्तबा यानी माह के शुरुआत और माह के आखिरी दिनों में भी पुष्य नक्षत्र का संयोग बन रहा है।

    प्रत्येक माह में जहां पुष्य नक्षत्र का प्रभाव दो दिनों तक रहेगा वहीं अगस्त में चार दिनों तक पुष्य नक्षत्र का प्रभाव पड़ेगा। इस तरह नए साल में कुल 26 दिनों तक पुष्य नक्षत्र का प्रभाव रहेगा जिसके चलते इस बार लोगों को नए कार्यों की शुरुआत करने, सोना-चांदी, जमीन, मकान, वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि वस्तुएं खरीदने, गृह प्रवेश आदि करने के लिए ज्यादा शुभ मुहूर्त मिलेंगे।

    ज्योतिषी डॉ.दत्तात्रेय होस्केरे के अनुसार 27 नक्षत्रों में सर्वश्रेष्ठ नक्षत्र पुष्य नक्षत्र को माना जाता है, इसमें भी खासकर रवि पुष्य नक्षत्र अथवा गुरु पुष्य नक्षत्र को सर्वश्रेष्ठ कहा गया है। अमूमन 27 दिनों से 30 दिनों में नक्षत्रों में परिवर्तन होता है यानी लगभग एक माह में एक बार पुष्य नक्षत्र पड़ता है।

    साल 2016 में प्रत्येक माह पुष्य नक्षत्र पड़ेगा जिसका प्रभाव 24 घंटों तक रहेगा यानी यदि शुक्रवार की शाम पुष्य नक्षत्र शुरू होता है तो वह शनिवार की शाम तक रहेगा। इस तरह देखा जाए तो नए साल में प्रति माह दो दिन अर्थात साल में 24 दिन पुष्य नक्षत्र रहेगा। चूंकि अगस्त की 1 तारीख व 29 तारीख को भी पुष्य नक्षत्र है इसलिए इस साल 26 दिन पुष्य नक्षत्र का संयोग है।

    गुरु ग्रह की तरह गुण

    पुष्य नक्षत्र के सर्वश्रेष्ठ नक्षत्र होने के पीछे कारण यह है कि इसकी प्रकृति ब्रह्मांड के सबसे बड़े ग्रह गुरु जैसी है और इसका स्वामी ब्रह्मांड का दूसरा सबसे बड़ा ग्रह शनि है। शास्त्रों में 'गुरु' को पद-प्रतिष्ठा, सफलता और ऐश्वर्य का कारक माना गया है और 'शनि' को वर्चस्व, न्याय और श्रम का कारक माना गया है, इसीलिए पुष्य नक्षत्र की उपस्थिति में महत्वपूर्ण कार्य करने को शुभ माना जाता है।

    पुष्य नक्षत्र का स्वामी शनि

    पुष्य नक्षत्र को अमरेज्य कहा गया है, यह कर्क राशि का नक्षत्र है और इसकी प्रकृति गुण प्रधान है और इसका स्वामी शनि है। यह कर्क राशि में तीन डिग्री और 20 कला से लेकर 16 डिग्री व 40

    कला तक इसका वर्चस्व होता है।

    सोना-चांदी की खरीदी को महत्व

    चूंकि स्वर्ण (सोना) धातु को गुरु प्रधान माना गया है और रजत (चांदी) को चन्द्र प्रधान कहा जाता है, इसलिए पुष्य नक्षत्र में इन दोनों धातुओं की खरीदी को महत्व दिया जाता है।

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