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    ये विश्व की सबसे प्राचीन नाट्यशाला, इसलिए है सुर्खियों में

    Published: Thu, 07 Dec 2017 09:38 AM (IST) | Updated: Fri, 08 Dec 2017 09:08 AM (IST)
    By: Editorial Team
    ramgarh theatre 07 12 2017

    रायपुर। विश्व की सबसे प्राचीन रामगढ़ नाट्यशाला की झांकी गणतंत्र दिवस पर राजपथ में नजर आएगी। रामगढ़ भगवान राम और कवि कालीदास से संबंधित होने के कारण शोध का केंद्र बना हुआ है। इस कारण छत्तीसगढ़ से इसी थीम पर झांकी का प्रस्ताव तैयार कर दिल्ली भेजा गया था, जिसका चयन कर लिया गया है।

    रामगढ़ की प्राचीन नाट्यशाला की झांकी दिल्ली में तैयार होगी, लेकिन इसे आकार देंगे छत्तीसगढ़ के कलाकार। रामगढ़ अंबिकापुर-बिलासपुर मार्ग पर है। इसे रामगिरी भी कहा जाता है, क्योंकि रामगढ़ पर्वत टोपी की आकृति का है।

    एक प्राचीन मान्यता के अनुसार भगवान राम अपने अनुज लक्ष्मण और पत्नी सीता के साथ वनवास काल के दौरान यहां निवास किए थे। यह भी कहा जाता कि महाकवि कालिदास के मेघदूत में इसी रामगिरी का वर्णन है, जहां उन्होंने बैठकर अपनी कृति मेघदूत की रचना की थी।

    रामगढ़ की गुफा नाट्यशाला दर्शनीय है, जो कि विश्व की प्राचीनतम गुफा है। इसे रामगढ़ नाट्यशाला और सीता बंगरा भी कहा जाता है। पहाड़ी काटकर बनाई गई है नाट्यशाला: ईसा पूर्व तीसरी- दूसरी सदी की यह नाट्यशाला पहाड़ी काटकर बनाई गई थी, जिसे 1848 में कर्नल आउस्ले ने प्रकाश में लाया था।

    1903-04 में डॉ. जे ब्लाश ने इसे आर्केलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में प्रकाशित किया। इसके अनुसार नाट्यशाला की लंबाई 44.5 फीट और चौड़ाई 15 फीट है। प्रवेश द्वार गोलाकार और लगभग छह फीट ऊंचा व दीवारें लम्बवत है। इसकी छत पर पॉलिश है। यहां 30 लोग बैठ सकते हैं।

    इसके प्रवेश द्वार पर बाईं ओर ब्राह्मी लिपी और माघी भाषा में दो पंक्तियां लिखी है। अनुसंधानों से पता चला है कि दो हजार साल पहले यहां नाट्य मण्डप बनाया जाता था, जहां नाटक अभियय भी होते थे।

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