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    सरकार ने दान में मांगीं दुर्लभ किताबें, लाइब्रेरी में दर्ज होगा नाम

    Published: Sat, 20 May 2017 07:35 AM (IST) | Updated: Sat, 20 May 2017 09:17 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग दुर्लभ किताबों, साहित्य, पांडुलिपियों, ग्रंथों आदि को बचाने का मिशन शुरू करने जा रहा है। इसके लिए लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने रायपुर बीटीआई मैदान शंकर नगर में शुरू होने जा रही सेंट्रल लाइब्रेरी के लिए लोगों से दान में किताबें मांगी हैं। जो व्यक्ति किताबें दान करेगा, उसके नाम से ये किताबें सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होंगी। ऐसे व्यक्ति का नाम चिरस्थायी बना रहेगा।

    सरकार ने अनुरोध किया है किहर घर में व्यक्ति के पास ऐसी किताबें हैं, जो बाजार या किसी लाइब्रेरी में भी उपलब्ध नहीं हैं। ऐसी किताबों को संकलित कर उन्हें केमिकल और अन्य उपाय के जरिए संरक्षित किया जाएगा। यहां एक शोधकेंद्र भी होगा, जिस पर शोधार्थी शोध कर सकेंगे।

    संकलित किताबें स्केन करके ई-लाइब्रेरी की तरह इंटरनेट पर डाल दी जाएंगी। राज्य के जिलों में स्थापित लाइब्रेरी में भी ये किताबें दान की जा सकती हैं। विभाग इन किताबों को रायपुर में स्थापित होने जा रही सेंट्रल लाइब्रेरी में दुर्लभ किताबों के कक्ष में रखेगा।

    किताबों का संरक्षण गोवा और कोलकाता के विशेषज्ञ करेंगे। सेंट्रल लाइब्रेरी में तीन करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। करीब दो करोड़ में ग्रंथालय में आलमारियां सेट होंगी, जिनमें इन्हें संरक्षित रखा जाएगा।

    राज्य मुख्य ग्रंथपाल आरएन सिंह का कहना है कि नगर, राज्य, राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय स्तर की वे किताबें , पांडुलिपि, ग्रंथ को दान में मांग रहे हैं, जिन्हें पढ़ने से आने वाली पीढ़ी को जानकारी मिलेगी।

    स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को पत्रः पुरानी और दुर्लभ किताबों के लिए स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, साहित्यकारों, इतिहासकारों को पत्र लिखकर और खुद विभाग के कर्मचारी घर पहुंचकर अनुरोध कर रहे हैं कि वे कोई पुरानी किताबें दें। किताबों के अलावा कोई हस्तलिखित पुरानी पत्रिका, पाण्डुलिपि, साहित्य से परिचय कराने वाली किताबों को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए यह योजना बनाई गई है।

    ये किताबें हो सकती हैं: दुर्लभ किताबों में 300 साल पुरानी कोई हस्तलिखित गीता, कुरान, बाइबिल हो सकती है। सल्तनत और मुगल बादशाहों की नीति जैसे बहादुरशाह जफर के दीवाने जफर तो बेगम भोपाली 150 साल पुरानी अनूठी किताबें दी जा सकती हैं।

    6000 शब्दों के उर्दू, अरबी, संस्कृत, तुर्की, अंग्रेजी और परशियन भाषा में उच्चारण करने वाली किताबें, रायपुर या प्रदेश के किसी नगरीय निकाय स्तर की कहानी या दुर्लभ तथ्यों वाली किताबें भी शामिल हो सकती हैं।

    अनुरोध कर रहे हैं

    - सेंट्रल लाइब्रेरी के लिए किताब दान में दे अनुरोध कर रहे हैं। लोगों के पास किताबें हैं , मुझे लगता है कि लोगों से अच्छा रिस्पांस मिलेगा। दुर्लभ किताबों में खराब हो रही हैं। - एस. प्रकाश, संचालक, डीपीआई

    इन्हें भी संरक्षित करने की जरूरत

    - राज्य सरकार की पहल अच्छी है। किताबों के अलावा किसानों द्वारा बोई जा रही दुर्लभ फसल, सब्जी की किस्में, घरों में रखे पुरातात्विक अवशेष, सालों पुराने प्रचलित सिक्के व रुपए, पुराने जमाने के कपड़े और उन्हें बनाने वाले चरखे आदि को भी संरक्षित करने की पहल की जा सकती है। - एलएस निगम, इतिहासकार

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